कज़िन के साथ गे सेक्स - Antarvasna.Us
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कज़िन के साथ गे सेक्स

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Added : 2017-02-14 17:13:03
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हेलो फ्रेंड्स , मेरा नाम विकास
है , और में २३ साल का हूँ
आज जो कहानी में आपको बताने जा रहा
हूँ वो अन्तर्वासना पर मेरी पहली
कहानी है , इसलिए अगर मुझसे कोई गलती
हो जाए तो मुझे माफ़ करियेगा
जो कहानी में आज आपको बताने जा रहा
हूँ उसमे पहली बात तो यह है की ये
एक गे सेक्स कहानी है और दूसरी बात
ये की ये अनुभव मैंने अपने कजिन के
साथ लिया है
वैसे तो मुझे हमेशा से लडकिया ही
पसंद है पर मुझे लड़को के साथ सेक्स
में भी मज़ा आता है , मैं हमेशा से ही
बोहोत गोरा रहा हूँ ,और मेरा शरीर
भी लड़कियों की तरह बोहत चिकना रहा
है, मेरे कजिन का नाम रोहित है , और
वो भी दिखने मैं गोरा है,और वो मुझसे
से एक साल छोटा है .
हम दोनों मैं बचपन से ही सेक्स करनी
की वासना रहती थी , मुझे ये तो याद
नही की हम दोनों के बीच ये सब कब शुरू
हुआ पर हाँ मुझे ये ज़रूर याद है की
जब भी हमारा परिवार बुआ के घर जाता
था ,मैं और रोहित किसी भी अकेले कमरे
मैं चले जाते थे और बारी से एक दूसरे
का पैंट खोल कर एक दूसरे के लुंड को
चूमा करते थे और मुँह मैं लेकर चूसा
भी करते थे , तब हम सिर्फ 5th या 6th क्लास
में थे.
हम धीरे धीरे एक दूसरे के निप्पल्स
को चूमने और चाटने लगे और होंठो पर
किस करने लगे , हम एक दूसरे की गांड
की गोलाईयों को होठो से चूम कर , जीभ
लगा कर , बोहोत सारा थूक लगा कर चाटा
करते थे , हमे इन सब चीज़ों में बोहोत
मज़ा आता था , कभी कभी हम अपने घरवालो
के देखे जाने से बाल बाल बचे , पर हमें
इन सब को करते रहने में इतना मज़ा आता
था की हम किसी भी हाल में ये सब बंद
नही करना चाहते थे , हम जैसे जैसे
बड़े होते गए हमारी सेक्स करने की
इच्छा बढ़ती गयी , पर हमने कभी भी एक
दूसरे की गांड नही मारी थी , फिर एक
दिन मैंने एक ब्लू फिल्म देखि जिसमे
एक लड़का, लड़की की गांड मारता रहता
है , मैंने यहाँ बात रोहित को बताई
की हमे भी यह करना चाहिए ,हम दोनों
अभी ज़्यादा उम्र के नही हुए थे , और
हमारा स्पर्म भी नही निकलता था , हमने
बोहोत कोशिश की लेकिन गांड का छेद
इतना टाइट होता है की हम लंड को गांड
के अंदर भी नही डाल पाते थे , लेकिन
हम वो सब करते रहे जो हम हमेशा से
करते थे ,
मेरी बुआ सुबह अपने ऑफिस जाती हैं
तो शाम को ही वापस आती है , अब में 11th
क्लास में आ चूका था , और में अपने
टीनएज के दिन में बोहोत ज़्यादा ही
सेक्स के बारे में सोचने लगा था ,
एक दिन में घर पर बोर हो रहा था ,हमारे
स्कूल की छुट्टियां चल रही थी , मुझे
पता था की रोहित भी घर पर ही होगा
, तो में 10 बजने का इंतज़ार करने लगा
की कब बुआ ऑफिस जाए और में उनके घर
जाकर रोहित के साथ मज़े करू, टाइम आने
पर में रोहित के घर चला गया , हमें
कई घंटो के लिए घर खाली मिल चुका था
, ये शायद पहली बार था जब में रोहित
के घर ऐसे समय पर गया था जब घर पर कोई
नही था , यूँ तो हम जब भी पहले मिलते
थे तो एक दूसरे को चूमते थे , शर्ट
ऊपर उठा कर एक दूसरे के निप्पल्स
चूसते थे , और लुंड चूसने के लिए थोड़ी
देर के लिए पैंट नीचे कर लिया करते
थे , पर क्योंकि आज हम अकेले थे , तो
हमने आज एक दूसरे के सारे कपडे उतार
दिए , हमने एक दूसरे को पहली बार पूरा
नंगा देखा था इसलिए हम बोहोत एक्ससाइटेड
हो गए , रोहित ने जैसे ही मेरे चिकने
शरीर को देखा वो अचानक से मेरे पास
आकर मेरे होठो को चूमने लगा , मैं
भी उसका साथ देने लगा , हम एक दूसरे
को बोहोत ज़ोर से चुम रहे थे , रोहित
अपने हाथ मेरी पीठ पर सहला रहा था
, और मेरे हाथ उसके बालो को सहला रहे
थे , फिर वो अपने दोनों हाथो से मेरी
गांड दबाने लगा , जिससे में और भी
मदहोश हो गया , उसने इसके बाद मुझे
चूमते हुए बिस्तर पर लेटा दिया और
मेरे ऊपर आकर लेट गया और मुझे चुमता
ही रहा , मैंने अपनी जीभ उसके मुँह
में डाल दी , वो मेरी जीभ को चूसने
लगा , फिर उसने भी अपनी जीभ निकाल
ली और अपनी जीभ से एक दूसरी की जीभ
को सहलाने लगे , वो मेरे निचले होठ
को चूसने लगा , हम दोनों के मुँह पर
बोहोत सा थूक लग चूका था पर हम और
मज़ा आ रहा था , फिर उसने धीरे से मेरी
होंठो के नीचे चूमा और फिर धीरे धीरे
मेरे गले को चूमने लगा , उसने अपने
हाथो की उंगलिया मेरे हाथो की उँगलियों
से जकड ली थी , रोहित धीरे धीरे अपनी
होठो से मेरे गले को सहला रहा था ,
जिससे मुझे गुदगुदी हो रही थी और
बोहोत मज़ा भी आ रहा था , फिर उसने थोड़ा
सा थूक बाहर निकल और अपने होठों से
मेरे गले पर लगाने लगा, वो मेरे गले
को चाटा जा रहा था , में आँखे बंद कर
इन सब का मज़ा ले रहा था , फिर वो मेरे
चेस्ट को पागलो की तरह चाटने लगा
, उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरी चेस्ट
को चाटा जा रहा था , फिर वो मेरे निप्पल्स
पर आ गया , और वो उन्हें ज़ोर ज़ोर से
चूसने लगा ,मुझे ऐसी फीलिंग आ रही
थी जो में शब्दो में बयान नहीं कर
सकता , तभी मुझे एक आईडिया आया जो
की मैंने रोहित को बताया , फिर हम
69 की पोजीशन में आ गए वो मेरे ऊपर
था , पर हम 69 की पोजीशन में लंड चूसने
के लिए नहीं बल्कि निप्पल्स चूसने
के लिए आये थे , रोहित ने अपने निप्पल्स
मेरे मुह के ऊपर रख दिए , और वो मेरे
ऊपर लेट कर मेरे निप्पल्स चूसने
लगा , हम दोनों को ही बोहोत मज़ा आ रहा
था , अचानक से उसने मेरे एक निप्पल
को अपने दांतो से धीरे से काट लिया
, मेरे मुह से हल्की सी सिसकारी निकाल
गयी ,अब वो मेरे निप्पल्स को दांतो
से धीरे धीरे कटा जा रहा था ,मुझे
ऐसा एहसास आज से पहले कभी नही हुआ
था , मैंने भी उसके निप्पल्स को काटना
शुरू कर दिया उसे भी बोहोत मज़ा आने
लगा ,फिर वो एक हाथ से मेरे लंड को
सहलाने लगा और फिर वो निप्पल्स छोड़
कर थोड़ी नीचे की तरफ बढ़ा , रोहित ने
अपनी जीभ मेरी नाभि के ऊपर रख दी और
उसकी नाभि मेरी मुँह के ऊपर , हम अब
एक दूसरे की नाभि को थूक लगा कर चाटने
लगे , थोड़ी देर बाद , रोहित मेरे लंड
की तरफ बढ़ा और उसे चूमने लगा , मैं
भी उसके लंड को चूमने लगा , फिर मैंने
अपना मुह खोल खाल कर उसका लुंड अपने
मुँह में भर लिया , रोहित की मुह से
आह निकाल गयी , उसने कुछ देर के लिए
मेरे लुंड को छोड़ दिया और अपने लुंड
की चुसाई का मज़ा लेने लगा , वो लगातार
मुँह से सिसकारियां निकाल रहा था
, वो अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगा
, जिससे उसका लंड मेरे मुह के बोहोत
अंदर तक जाने लगा , मुझे भी उसका लुंड
चूसने में मज़ा आ रहा था , फिरउसने
मेरे भी लुंड चूसना चालु कर दिया
, हम दोनों को ऐसा लग रहा था जैसे हम
कभी भी एक दूसरे का लुंड छोड़े ही नही
,इन सब से रोहित बोहोत ही ज़्यादा उत्तेजित
हो गया और उसने मेरे मुँह में अपना
व्रीय छोड़ दिया , अचानक से छोटे इस
व्रीय के कारन मुझे बोहोत ही गन्दा
लग और में जल्दी से बाथरूम जाकर सब
थूक दिया ,फिर मैंने आकर रोहित को
थोड़ा दांत तो मुझे गुस्से में देख
उसने मुझे गले लगा लिया , फिर हम दोनों
एक दूसरे से लिपट कर नंगे ही लेट गए
, थोड़ी देर बाद रोहित का लंड फिर खड़ा
होने लगा , हमने सोचा की आज जब मौका
मिला ही है तो गांड मार कर भी देखा
जाए , फिर हमने ये फैसला किया की में
रोहित की गांड में अपना लंड डालूंगा
, फिर मैंने थोड़ा सा तेल लेकर रोहित
की गांड के छेद में लगा दिया , और थोड़ा
सा तेल अपने लंड पर भी लगा लिया , रोहित
बिस्तर पर अपनी पीठ के बल लेट गया
उसने अपनी टाँगे ऊपर उठा ली , मैंने
अपना लंड रोहित की गांड के छेद की
ऊपर रखा और अपने हाथ बिस्तर पर रखकर
,थोड़ा सा उसके ऊपर लेट गया , मैंने
धीरे से अपने कमर को आगे की और धक्का
दिया तो मेरे लुंड का सुपारा ,गांड
के छेद में चला गया , रोहित दर्द से
बिलबिला उठा , और मुझे लंड बहार निकलने
को बोलने लगा , मैंने उससे कहा की
यहाँ बस शुरू में दर्द देगा ,पर वो
नही माना और मुझे लंड निकलना पड़ा
,उसने बोला की हम अब ये कभी नही करेंगे
, पर मैंने कहा नही हम करेंगे , तुम
ऐसा करो की अपना लंड मेरी गांड में
डालो , तो रोहित मान गया , में अपनी
पीठ के बल आते गया , रोहित ने मेरी
गांड के छेद में तेल लगाया और थोड़ा
तेल खुद के लंड पर लगाया ,फिर उसने
अपने लंड का सुपारा मेरे गांड के
छेद पर रखा , और मेरे ऊपर लेट गया ,
फिर उसने अपनी कमर को हल्का सा धक्का
दिया , उसके लंड का सुपारा मेरे छेद
में घुस गया, मुझे बोहोत ही तेज़ दर्द
होने लगा , तो मैंने उससे कहा की अभी
और मत डालना , थोड़ी देर रुक कर डालना
, वो मेरे ऊपर दो मिनट उसी पोजीशन
में लेटा रहा फिर मेरा इशारा पाकर
उसने अपनी कमर को और दाख लगे जिससे
उसका लंड आधा मेरे गांड में चला गया
मेरे मुह से चीख निकाल गयी ahhhhhhhhhhhh,
मुझे बोहोत दर्द हो रहा था पर में
रुकना नही चाहता था ,उसने कुछ देर
रुक कर कर एक और ज़ोर का ढक लगाया , जिससे
लंड पूरा अंदर हो गया , परमें दर्द
से चीखने लगा , उसने मेरे होठो पर
अपने होंठ रख दिए जिससे मेरी चीख
रुक गयी , पर मेरे आँखों से थोड़े आंसू
निकल गए , फिर जब मुझे थोड़ा सुकून
मिला तब रोहित ने अपना लंड निकल कर
धीरे से दोबारा अंदर डाल दिया ,और
अब वो धीरे धीरे लंड अंदर बहार करने
लगा ,मेरा दर्द भी अब खत्म हो गया
था ,मुझे इन सब में मज़ा आने लगा था
, जब भी रोहित का लंड अंदर जाता मैं
उसे महसूस कर पा रहा था , मैं एक अलग
ही दुनिया में पहुँच चुख था , में
आँखे बंद करके अपनी गांड मरनेका
मज़ा ले रहा था , रोहित ने अपनी रफ़्तार
बढ़ा दी मेरी मुह से सिसकारियां निकलने
लगी ,,,,,,,, aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh
yessssssssss , रोहित मेरी गांड जम कर मारो
, और तेज़ aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh,mmmmmmmmmmmmmmmmmmmm
मैं उसका चेहरा पास सागर उसे किस
करने लगा , और वो मेरी गांड मार जा
रहा था ........मममममम
फिर उसने अपनी रफ़्तार थोड़ी काम कर
दी ,वो अब थोड़े धीरे से लंड को अंदर
बहार कर रहा था उसने अपना मुह मेरे
पास लाकर मुझे किस किया और फिर धीरे
धीर गांड मारते मारते मेरे चेस्ट
और गले को चाटने लगा , थोड़ी देर चाटने
के बाद उसने अपनी रफ्ता बढ़ा दी मेरी
सिसकारियां टेक्स हो गयी , मैंने
अपनी टाँगे रोहित की कमर के चारो
ओर लपेट ली , उसके धक्के तेज़ होते
ही जा रहे थे,मेरा लंड उसके पेट से
घिस रहा था जिससे मुझे और मज़ा आ रहा
था , में सिसकारियां निकलता जा रहा
था , aaaaaaaaaaaaaa hhhhhhhhhhhhhhh ,mmmmmmmmmmmmmmmm aaaaaaaaaaaaa, फ़क मी
रोहित aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh

फिर उसने बोला की उसका व्रीय निकलने
वाला है तो मैंने कहा की अपने व्रीय
को मेरे अंदर ही छोड़ दे ............
उसने अपने धक्के तेज़ कर दिया और 7-8
धक्को के बाद उसने अपना व्रीय मेरे
अंदर छोड़ दिया , क्योंकि मेरा लुंड
उसके पेट से घिस रहा था आइल मेरा भी
व्रीय छूट गया और उसके और मेरे पेट
पर फ़ैल गया , वो थक कर मेरे ऊपर ही लेट
गया , 15 मिनट वैसे ही लेटे रहने के
बाद वो उठा गया , और एक कपडा लेकर मेरा
सारा व्रीय साफ़ कर दिया , मुझे ऐसा
लग रहा था मानो में टांगो में जान
ही न हो , पर मेरे अंदर एक अलग ही प्रकार
का संतोष था , मैंने उससे व्रीय अपने
अंदर छोड़ने इसलिए बोल दिया था क्योंकि
उसका व्रीय मेरे अंदर जाना मुझे
ऐसा अहसास दिल रहा था जैसे उसने हमारे
प्यार का कोई अंश मेरे अंदर छोड़ा
हो , में जितनी ज़्यादा देर हो सकता
उसे अपने अंदर रखना चाहता था , फिर
में अपने घर चला गया , और उसके कई घंटो
बाद जब में टॉयलेट गया तब वह व्रीय
मेरे अंदर से निकल जिसे देख कर मेरे
चेरे पर मुस्कान आ गयी . उसके बाद
हमने कई बार ये सब किया ,जिसके बारे
में कभी और लिखूंगा , पर मुझे हमेशा
इस बात का दुःख रहा की उसने मुझे कभी
अपनी गांड नही मारे दी और बाद में
उसने मेरा लंड चूसना भी बंद कर दिया
, ये सब सिर्फ मुझे ही करना पड़ता था,
और कुछ दिनों बाद उसने मेरे साथ सेक्स
करने से मन कर दिया , मैंने उसे बोहोत
मनाया पर वो नही माना , जिसका मुझे
अभी तक दुःख है ,
ये थी मेरे अपनी सेक्स कहानी , अगर
लिखने में कुछ गलती हुई हो तो मुझे
माफ़ करे
और आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे इस
ईमेल पर बताये............

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