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पार्टी से चुदाई तक का सफ़र.

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Added : 2015-08-12 14:34:00
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पार्टी से चुदाई तक का सफ़र:-


दोस्तो, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, कि आपने मेरी कहानियाँ


मेरी इस कहानी को पढ़ने वाली सभी चूतों और लौड़ों को मेरा बार बार सलाम !
दोस्तो ! इस कहानी को पढ़कर चूतें और लण्ड पानी छोड़ देंगे, यह मेरा आपसे वादा है और आपका भी मन चुदाई के लिए बेकरार हो जाएगा।
ये बात आज से कुछ दिन पहले की है|जब मैं अपने दोस्त की शादी में गया हुआ था और मेहमानों की खातिरदारी में लगा हुआ था कि अचानक मेरी नज़र एक शादीशुदा औरत पर पड़ी।
हाय क्या फिगर था। हालांकि मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ पर यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर वो किसी ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले तो अच्छे अच्छों की छुट्टी कर दें और देखने वाले अपने लण्ड संभालते रह जाएं।
उनकी मस्तानी चाल को देख कर यूं लग रहा था मानो फैशन शो की रैम्प पर कैट-वॉक कर रही हो। उनके चूतड़ पेन्डुलम की तरह दोनों तरफ झूल रहे थे।
उन्होंने गहरे नीले रंग का डीप गले का चोलीनुमा ब्लाउज मैचिंग पारदर्शी साड़ी के साथ पहना था। उनकी पीठ तो मानो पूरी नंगी थी सिवाय एक पतली सी पट्टी के जो उनके ब्लाउज को पीछे से संभाले हुई थी।
उन्होंने साड़ी भी काफी नीची बांधी हुई थी जहां से उनके चूतड़ों की घाटी शुरू होती है। साड़ी भी कस कर लपेटे हुई थी जिससे कि उनके मादक चूतड़ और उभर कर नजर आ रहे थे और दोनों चूतड़ों की थिरकन साफ साफ देखी जा सकती थी।
मैंने गौर किया कि चलते वक्त उनके चूतड़ अलग अलग दिशाओं में चल रहे थे। पहले एक दूसरे से दूर होते फिर एक दूसरे के पास आते। मानो उनकी गाण्ड खुल बन्द हो रही हो। जब दोनों चूतड़ पास आते तो उनकी साड़ी गाण्ड की दरार में फंस जाती थी।
मुझे वो अच्छी लगी और उसकी सेक्सी फिगर को देखकर मेरा लण्ड कुछ मूड में आने लगा और आये भी क्यों न, उसके मोटे मम्मे, चौड़ी गाण्ड देखकर तो किसी का भी लण्ड पागल हो जाये।
तभी मेरे मान मे हुआ की जब ये इतनी सुंदर है तो इसकी चुची कितनी सुंदर होगी सो उसकी चुची देखने के लीए मैं उसके आस पास मंडराने लगा और उसका पार्स नीचे गीरा दीया |
और वो जैसे ही पार्स उठाने के लीए झुकी उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया जिससे कि उनकी चूचियों का नजारा मेरे सामने आ गया। हाय क्या कमाल की चूचियां थीं।
एक पल को तो लगा कि दो चांद उनकी चोली में से झांक रहे हों। वो ब्रा नहीं पहने थी जिससे कि चूची दर्शन में कोई रूकावट नहीं थी। मैं खड़े खड़े उस खूबसूरत नजारे को देखने लगा।
चोली के ऊपर से पूरी की पूरी चूचियां नजर आ रही थीं। यहां तक कि उनके खड़े गुलाबी निप्पल भी साफ मालूम दे रहे थे।शायद उन्हें मालूम था कि मैं ऊपर से फ्री शो देख रहा हूं।
इसीलिए मुझे छेड़ने के लिए वो और आगे को झुक गई जिससे उनकी पूरी की पूरी चूचियां नजर आने लगीं।
हाय क्या नजारा था। मैं खुशी खुशी चूचियों की घाटी में डूबने को तैयार था। ऐस लगता था मानो दो बड़े बड़े कश्मीरी सेब साथ साथ झूल रहो हों
एकाएक उस ने अपना सर ऊपर उठाया और मुझे अपनी चूचियों को घूरते हुए पकड़ लिया। जब हमारी नजर मिली तो मैं ने सॉरी बोला अपने निचले होठ को दांतों में दबा कर मुस्कराते हुए बोली सॉरी और कहा की मेरी ग़लती थी |
और हम लोग वाहा से अलग हो गये और पूरी पार्टी मे उसको देखता ही रहा |और पार्टी ख़त्म होने के बाद वो चली गयी और उस रात मैं ने उसकी याद मे मूठ मार कर बीता दीया |
फिर मैं ने उसके बारे मे पता कीया की वो हमारे रूम से कुछ दूर पर उसका घर था |वो अपने पाती के साथ रहती थी और उसके घर मे कोए नही था | हा और पता चला की उसके घर के उपर बाला कमरा खाली है |और वो कीसी बैचलर को ढूँढ रहे है |
और मैं भी रूम चेंज करना चाहता था सो मैं उसके पास चला गया और रूम की बात कर के उसके यहा सिफ्ट हो गया |
आब मैं उसको चोद्ने का प्लान बनाने लगा की और इसलीए मैं उन दोनो से दोस्ती कर ली और कभी कभी उसके घर भी जाने लगा| और उसको चोद्ने का मौका ढूँडने लगा |
और एक दिन मैं कॉलेज से लौटा तब बहुत तेज़ बारिश हो रही थी और मैं जल्दी से अपने रूम जाने लगा और छत पर पहुंचा तो देखा वो बारिश के मज़े ले रही थी !! न जाने क्यूँ मेरी नज़र उनके पेट पर गई, जोकि कपड़े गीले होने बाद साफ़ नज़र आ रहा था !मुझे देखते ही भाभी ने अपने आपको थोडा संभाला और कहा- काफी दिनों बाद इतनी अच्छी बारिश हुई है !!

मैंने पूछा- आपको शायद बहुत अच्छा लगता है बारिश में नहाना !!
तो उन्होंने कहा- हाँ नहाना भी, बारिश में नाचना भी..
इस बात पर मैंने हंसते हुए बारिश का कुछ पानी उनके मुँह पर फैंका तो उन्होंने भी बदला लेने के लिए ऐसा ही किया.. देखते ही देखते हम दोनों एक दूसरे के साथ बारिश में ही खेलने लगे।
फिर ना जाने कैसे अचानक भाभी का पाँव फिसला और वो सीधी मेरे ऊपर आकर गिरी !! उन्हें गिरने से बचाने के लिए मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ना चाहा तो मेरे हाथ उनकी कमर पर रुके लेकिन हम दोनों ही नीचे गिर पड़े !!

भाभी मेरे ऊपर थी और मेरे हाथ उनकी कमर पर, वो लम्हा मेरी ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल लम्हा था !! पता नहीं क्यूँ मेरे हाथों ने कमर पर से हटने की बजाय अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली !!
हम दोनों की आँखें एक दूसरे की आँखों में ही देख रहे थे और मुझे उन आँखों में कोई रुकावट नज़र नहीं आ रही थी !! शायद इसीलिए मैंने उनकी नंगी गर्दन पर चूम लिया !!

वो थोड़ा घबराई और उठने की कोशिश करने लगी, मगर मेरी पकड़ काफी मजबूत थी, मैंने एक करवट ली और अब मैं उनके ऊपर था। यह सब कुछ खुली छत पर तेज़ बारिश में हो रहा था !!

बारिश का पानी हम दोनों के बदन को गीला कर चुका था.. लेकिन तब भी मैं उनके बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था !! मेरी आँखें उनकी आँखों में ही देख रही थी, मेरे हाथ उनके दोनों हाथों को संभाले हुए थे, मेरे पैर उनके पैरों में लिपटे हुए थे !! हम दोनों के बदन एक दूसरे से सटे हुए थे !!

मैंने उन्हें और चूमना शुरू किया, उनकी गर्दन पर, उनके होठों पर !! अब उनका ऐतराज़ करना भी बंद हो चुका था, लेकिन वो खामोश ही थी !!
मेरे हाथों ने उनके बदन पर चलना शुरू किया, मेरा एक हाथ उनके पेट पर था और दूसरा उनकी गर्दन पर !! तभी मैंने अपने हाथ से उनकी सलवार के कमरबंद को ढीला कर दिया और उनकी सलवार को बदन से अलग कर दिया !!

उनकी केले जैसी चिकनी जांघ देखकर मैं पागल सा होने लगा था, मैंने उन्हें चूमना शुरू कर दिया और तभी मैंने भाभी की पहली कराह सुनी- आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह !!

वो अपने हाथ से मेरे सिर को पीछे धकेलने लगी.. मैंने दोनों जाँघों को हाथ में पकड़ कर कमर पर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उनकी कमीज़ को भी उतार दिया !!!

अब एक ऐसा नज़ारा मेरे सामने था जिसके लिए मैंने हजारों मन्नत की थी.. भाभी का गोरा चिकना गठीला बदन मेरी आँखों के सामने था और वो भी उस हालत में जिसमें मैं सिर्फ सोच सकता था.. उन्होंने अपनी आँखों को बंद कर लिया !!

उन्होंने काली ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.. जोकि उनके गोरे बदन के ऊपर और भी खूबसूरत लग रही थी।
मैंने उनकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया और उनकी कड़क चूचियों को दबाने लगा..फिर मैंने उनके चूतडों को पकड़ा और अपने पास खींच कर होठों को चूमने लगा।
अब मैं उनके होठों को चूसते हुए एक हाथ से चूतड़ सहला रहा था जबकि मेरा दूसरा हाथ उनकी चूचियों से खेल रहा था।

भाभी मेरे लण्ड को हाथ में पकड़ कर सॉफ्ट टॉय की तरह मरोड़ रही थी।
एक दूसरे को पागलों की तरह चूमते हुए हम वहीं जमीन पर लेट गए। चूत की खुशबू पा कर मेरा लण्ड फनफनाने लगा। भाभी भी गर्म हो गई थी और अपनी चूत मेरे लण्ड पर रगड़ रही थी।
काफी देर तक यूं मजे लेने के बाद हम दोनों बैठ कर अपनी फूली हुई सांसों को काबू में करने की कोशिश करने लगे। भाभी ने अपने बाल खोल दिए। मैं बालों को हटा कर उनकी गर्दन को चूमने लगा।
फिर दोबारा उनके प्यारे प्यारे होठों को चूमते हुए उनकी चूचियों से खेलने लगा।

भाभी मेरा सिर पकड़ कर अपनी रसीली चूचियों पर ले गई और अपने हाथ से पकड़ कर एक चूची मेरे मुंह में डाल दी। मैं प्यार से उनकी चूचियों को बारी बारी से चूमने लगा। वो अपनी जीभ लपलपा कर मेरे लौड़े को चूसे जा रही थी।
तभी नीचे से गाड़ी की आबाज आई देखा तो भाभी का पाती था | वो ब्रा और पैंटी छोर कर अपने कापरे पहन कर चली गयी |
और मैं अपने हाथो से ही मूठ मार कर ब्रा और पैंटी से साफ कर लीया |और फिर से उसको चोद्ने का मौका ढूँढ ने लगा |लकिन मौका नही मिल पा रहा था | हा लेकिन उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता तो मैं भाभी का उपर से मज़ा लेता था|
आब जब भी वो छत पर आती थी तो बिना ब्रा और पैंटी के आती थी और मैं उनकी चुची और चूत को जाम के चूस्ता था और गॅंड और चुची को खूब दबाता था |
फिर एक दिन वो उपर आई और मैं रोज की तरह उसकी चुची को चूसने लगा तब वो मेरे लंड को दबा कर बोली आज रात को तो मैं इस लंड को पूरा अंदर ले लूँगी |
तो मैं ने पूछा कैसे तो बताई की उसके पती को ओफिस के काम से एक वीक के लीए बाहर जाना है |और उस ने मुझे नीचे बुलाया है |
मैं गया तो उसका पती मुझे बोला की वो ओफिस के काम से एक वीक के लीए बाहर जा रहा है और अगर भाभी को किसी चीज़ की ज़रूरत हुई तो मैं पूरा कर दू |
मैं ने हा कहा और वो चला गया |
और उसके जाने के बाद मैंने उसके लाल लाल होंठों पर जोर से किस करने लगा उसकी होंठों की लपस्टिक मेरे होंठों पर भी लग गई। और मैने उसके मुँह में अपनी जीभ चारों तरफ घुमानी शुरू कर दी।
उनकी जीभ मेरे मुँह में ऐसे चल रही थी कि बहुत मज़ा आ रहा था। फ़िर मैंने उनकी गर्दन पर अपनी जीभ चलानी शुरू की और वो थोड़ी गर्म होने लगी। फ़िर मैंने उसे दिवार की और उल्टा कर दिया।
उनकी गान्ड मेरे लन्ड को छू रही थी और उनके मुँह से आवाज़ निकल रही थी- आ औ औइ अं अह … मुझे पता नहीं चला कि किस करते करते मेरा हाथ उसके वक्ष पर कैसे चला गया, मैं ऊपर से ही उसके बूब्स को दबा रहा था,
भाभी ऊह अह ऊह्ह आह्ह्ह उह्ह्ह आह्ह ऊह्ह उह्ह्ह आह्ह कर रही थी।
उसके बाद मैने धीरे-धीरे भाभी की साड़ी को खोल दिया और अब भाभी बलाऊज और पेटीकोट में ही थी।
फिर भाभी ने मेरी कमीज़ में हाथ दे दिया और मेरे शरीर को ज़ोर से अपने हाथों से पकड़ लिया. मैंने धीरे धीरे उसके ब्लाउज़ में हाथ डाला और अपना चेहरा ब्लाउज़ के ऊपर रख दिया।
और बलाऊज के ऊपर से ही उसकी चुच्ची को दबाने लगा और अपने मुंह में लेने लगा, फिर मैं
उनके पीछे गया और उन्हें मेरे कड़क लंड का अहसास उनके नरम नितम्बों पर कराया, उस अहसास को महसूस करके भाभी की सिसकी ही निकल गई थी। मैंने पीछे से एक हाथ लेकर भाभी के पेट पर हाथ चलाते हुए उनकी नाभि पर पकड़ लिया
और दूसरा हाथ उनके बदन पर चलाते हुए उनके ब्लाउज के बटन एक एक कर के खोलने लगा और फिर मैंने उसके बलाऊज भी उतार दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसकी चुच्ची को चूमने लगा।
उसकी ब्रा में से भी उसकी चुच्ची का ऊपर का हिस्सा बाहर आ रहा था मैने उसको भी चूमा और उसकी ब्रा को भी खोल दिया तो उनके बड़े बड़े स्तनों के पूर्ण नग्न दर्शन हुये।
मेरा लन्ड भी अंगड़ाई ले रहा था और उनके चुचूक मैंने अपने मुँह में लिए।उनके निपल इतने बड़े थे कि कैसे बताऊँ आपको ! मैंने इतने मोटे निपल पहले कभी नहीं देखे थे।
उसके चूचुक सख्त हो गए थे और चूची सख्त कठोर होती जा रही थी। मैं उन्हें मस्त होकर चूसे जा रहा था।
इसी बीच उसने मेरे पजामे में हाथ डाल दिया और मेरा पजामा नीचे कर दिया। और मेरे लण्ड को ज़ोर से दबा दिया और हिलाने लगी।पांच मिनट चूची चूसने के बाद मैंने उसकी चूत को ऊपर से ही सहलाना शुरू किया, उसकी चूत तो पहले ही काफी गीली हो रही थी,तो फिर मैंने उनके पेटिकोट का नाड़ा खोला और पेटिकोट निकाल दिया और उसने काले रंग की पैंटी पहनी थी।तो फिर भाभी ने भी मेरी अंडरवीयर निकाल दी और मेरे लण्ड को प्यार से सहलाने लगी।
इसके बाद मैंने भी भाभी की पेंटी में हाथ डाल कर उनकी चूत में ऊँगली करना शुर कर दिया। उस समय ठण्ड का सा मौसम था और बारिश भी हो रही थी लेकिन जब मैंने उनकी चूत में ऊँगली डाली तो ऐसा लगा जैसे मैंने किसी जैम लगी गरम डबल रोटी के बीच में हाथ डाल दिया हो। मैंने ऊँगली भाभी की चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दी और भाभी ने और बुरी तरह से मचलना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि भाभी झरने वाली है और मैं इस धुली हुई चूत का रस बेकार नहीं जाने देना चाहता था तो मैंने भाभी की पैंटी उतारी और उन्हें सामने करते हुए उनके गर्म होंठों पर मेरे होंठ रख कर उन्हें चूसना शुरू कर दिया और दूसरी तरफ मेरी उंगलियाँ उनकी गीली चूत में अन्दर बाहर होती ही जा रही थी। मैंने यह काम सिर्फ कुछ सेकंड किया होगा कि भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया। मैं समझ चुका था कि अब इनके झरने का वक्त आ चुका है और वो झड़ गई। फिर मैंने भाभी की चूची से अपना मुँह हटाया और उसकी नाभि को चाटना शुरू किया। भाभी अब बहुत गरम हो चुकी थी। मैंने फिर धीरे धीरे अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चाटने लगा। भाभी की सिसकी निकल गई और उसने अपनी टाँगें फैला दी जिससे मैं उसकी चूत को अच्छी तरह से चाट सकूँ। गौरी की योनि से नमकीन स्वाद आ रहा था तभी उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।

इसके बाद मैंने भाभी को सोफे पर बैठा दिया और अंदर से तेल की शीशी ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर तेल लगा लिया फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। इससे उसकी चूत मेरे लण्ड के करीब आ गई और मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। भाभी सिसकारियाँ भरने लगी।

फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा। भाभी की चूत काफी कसी थी। मैंने जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में ठेल दिया। लण्ड का सुपारा ही अंदर गया था कि भाभी जोर जोर से चीखने लगी। अपने हाथ-पाँव मारने लगी और बोलने लगी- मुझे छोड़ दो ! मुझे कुछ नहीं करना।

मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया और जोर-जोर से धक्के लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी आधा ही अंदर गया था कि उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उसका मुँह बंद था।
मैंने धक्के लगाने चालू रखे। मेरे हाथ से बंद होने के कारण उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाजें आने लगी। मैं समझ गया कि उसको मजे आ रहे हैं, मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया, उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।
मुझे उसकी चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी।मैं जान गया कि उसकी चूत की झिल्ली मैंने तोड़ दी है।शादी के तीन साल बाद भी वो कुंवारी ही थी। मैंने उसके पति को मन ही मन धन्यवाद दिया कि उसका सील तोड़ने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने दूसरा जोर का धक्का दिया जिससे मेरा तीन चौथाई लण्ड उसकी चूत में समा गया। इस झटके के लिए वो तैयार नहीं थी। और इस झटके के साथ ही भाभी अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने लगी।
और भाभी के मुंह से उफ की आवाज निकली पर अपने होठों को भींच कर नीचे से जवाबी धक्का दिया और मेरा लण्ड जड़ तक उसकी चूत में समा गया। फिर मेरी कमर पर हाथ रख कर मुझे थोड़ा रूकने का इशारा किया और बोली, "तुम्हारा लण्ड तो बड़ा ही जानदार है। एक झटके में मेरी जान निकाल दी। अब थोड़ी देर धीरे धीरे अन्दर बाहर कर के मजा लो !"

भाभी के कहे मुताबिक मैं धीरे धीरे उसकी चूत में लण्ड अन्दर बाहर करने लगा। चूत काफी गीली हो चुकी थी इसलिए मेरे लण्ड को ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी। मैं धीरे धीरे चूत चोदते हुए भाभी की मस्त चूचियों को भी मसल रहा था।
बड़ी ही गजब की चूचियां थी उसकी। एक हाथ में नहीं समा सकती थी। पर इतनी कड़ी मानो कन्धारी अनार। वो चित्त लेटी हुई थी पर चूचियों में जरा भी ढलकाव नहीं था और हिमालय की चोटियों की तरह तन कर ऊपर को खड़ी थी। उत्तेजना की वजह से उसके डेढ़ इन्च के निप्पल भी तने हुए थे और मुझे चूसने का आमन्त्रण दे रहे थे।

मैं दोनों निप्पलों को चुटकी में भर कर कस कस कर मसल रहा था। भाभी भी सिसकारी भर भर कर मुझे बढ़ावा दे रही थी। आखिर मुझसे नहीं रहा गया और उसके पैरों को कन्धे से उतार कर जमीन पर सीधा किया और उसके ऊपर पूरा लम्बा होकर लेट गया। भाभी ने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को पकड़ कर पास पास कर लिया और मैं दोनों निप्पलों को एक साथ चूसने लगा। ऐसा लग रहा था कि सारी दुनिया का अमृत उन चूचियों में ही भरा हो। मैं दोनों हाथों से चूचियों को मसल रहा था। चूचियों की मसलाई और चुसाई में मैं अपनी कमर हिलाना ही भूल गया।

तब भाभी अपने हाथ नीचे करके मेरे चूतड़ों पर ले गई और उन्हें फैला कर एक उंगली मेरी गाण्ड में पेल दी। मैं चिहुंक गया एक जोरदार धक्का भाभी की चूत में लगा दिया। भाभी खिलखिला कर हंस पड़ी और बोली "क्यों राज्जा ! मजा आया ? अब चलो वापस अपनी ड्यूटी पर।"

भाभी का इशारा समझ कर मैं वापस कमर हिला हिला कर उसकी चूत चोदने लगा। भाभी भी नीचे से कमर उठाने लगी और धीरे धीरे हम दोनों पूरे जोश के साथ चुदाई करने लगे। मैं पूरा लण्ड बाहर खींच कर तेजी से उसकी चूत में पेल देता। भाभी भी मेरे हर शॉट का जवाब साथ साथ देती।

पूरे कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। जैसे जैसे जोश बढता गया हमारी रफ्तार भी तेज होती गई। आखिर उसकी चूचियों को छोड़ मैंने उसकी कमर को पकड़ कर तूफानी रफ्तार से चुदाई शुरू कर दी।
भाभी भी कहां पीछे रहने वाली थी। वो भी मेरी गर्दन में हाथ डाल कर पूरे जोश से कमर उछाल रही थी।

मैंने धक्के और तेज़ कर दिए। वो मेरे जोश का अंत जान कर खुद भी और तेज़ धक्के मारने लगी। अंत मैं हम दोनों साथ साथ झड़े।
मैंने अपने लंड को झड़ने से पहले ही उसकी चूत से निकाल लिया। वो मुड़ी और झट से मेरे लंड को पकड़कर अपनी हाथों से निचोड़ने लगी और फिर मुँह में लेकर उसने मेरा मुठ मार दिया।
आह ! लावा की तरह मेरा मुठ निकल पड़ा और उसके मुँह से निकलकर उसके स्तनों के ऊपर से बहता हुआ नीचे आ गिरा, उसने अंतिम बूँद तक चूसा मेरे लंड को।

फिर भाभी को मैने उठाकर बैड पर उल्टा लिटा दिया| भाभी का चूतड़ ऊपर नीचे हो रहा था।मैं उसके हिलते हुए चूतड़ को देख रहा था।
भाभी के चूतड़ काफी बड़े और गोरे थे। मैने उसके चूतड़ों पर हल्के हल्के हाथ घुमाना शुरू कर दिया और भाभी को आनन्द आने लगा।


फिर मैने भाभी के दोनो चूतड़ों की दरार को चीर कर भूरे और गुलाबी गाण्ड के छेद को सहलाना शुरू कर दिया।बहुत समय तक भाभी के गांड के छेद को सहलाने के बाद मैं धीरे धीरे उसकी गांड में ऊँगली घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा। वो एक दम से उछल पड़ी और मस्ती में अपनी आंखे बंद कर ली। फिर मैंने उसकी गांड में अपनी दो ऊँगलियाँ घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर तक उसकी गांड में अपनी उंगली अंदर बाहर करने के बाद उन्होंने मैने गांड को अपने हाथों से खोला और अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रगड़ने लगा। वो जोर जोर से सिस्कार रही थी।
फिर मैने अपने लंड को उसकी गांड के छेद की सीध में रख कर एक धक्का मारा। तो वो कहने लगी कि धीरे करना ! मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई !

मैंने धीरे से अपना लण्ड गांड में दबाया और एक झटका दिया। जैसे ही गांड में लण्ड का टोपा घुसा, वो चिल्ला पड़ी।

मैं रुक गया और उसकी चूची दबाने लगा। उसको मजा आने लगा। फ़िर मैंने एक झटका जोर से लगा दिया पूरा का पूरा लण्ड गांड को चीरता हुआ अंदर घुस गया।
"आह्हह्ह! ओह्ह्ह्ह! मैं मर गई!" वो चिल्लाई।

भाभी की चीखों को सुन कर मैं बोला, "भाभी मैं जानता हूँ कि दर्द हो रहा है परंतु अभी आनंद आने लगेगा !"
और फिर धीरे धीरे अपना लंड गांड के अंदर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद जब भाभी की चीखों की आवाज़ सीत्कारों में बदल गई तो मैने भाभी की कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया।
कुछ समय बाद गांड मारने की गति बढ़ा दी|

भाभी की गान्ड चोदते चोदते अब मैं भी चरमसीमा पर आ चुका था और ऊपर से भाभी की टाईट गान्ड हाय् कैसे टाईम बढ़ाऊं मेरे शरीर की कसक बढ़ती जा रही थी वासना से निहाल हुआ जा रहा था।
लन्ड कड़क रहा था धार सी छूटने का अह्सास होने लगा था। बस धक्के मारते मारते और वीर्य रोकते रोकते भी रिसने लगा और अचानक ही लन्ड बाहर निकालते ही उसकी चूतड़ पर तेज धार निकल पडी भाभी की गान्ड तर हो उठी मेरी पिचकारी तेजी सी निकल रही थी|
भाभी ने भी आखिर दम तोड़ ही दिया और सिमट पड़ी उसका पानी निकल पड़ा और भाभी झर गई।।

फिर हम कुछ साथ मे ही लेटे रहे |और उनकी चुची से खेलता रहा और बोला भाभी एक बात बोलू तो वो बोली बोलो तो मैं बोला मैं आप के यहा रूम क्यू लीया जानती हो तो वो बोली क्यू मैं बोला आप को चोद्ने के लीए मैं तो आप को उस रात की पार्टी से ही चोद्ने का प्लान बना रहा था |
लेकिन आज जा के आप को चोद पाया हू |तो वो मुस्कुराए और बोले मैं भी पार्टी से ही तुम से चुड़ना चाहती थी |
ये बात सुन कर मुझे और जोस आ गया और मैंने उनको एक बार और चोद दीया | उस दिन मैंने भाभी को 6 बार चोदा फिर हम दोनो नंगे ही सो गये |उसके बाद क्या-क्या हुआ?
मैंने भाभी को सुबह उठ कर कैसे चोदा और कहा कहा चोदा
जानने के लिए मेरी अगली कहानी का इंतज़ार कीजिए !

आप अपनी राय जरुर बतायें।

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