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Diwali ka gift chut me rasgula daal k khila meri padosan

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Added : 2015-11-28 04:25:38
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हेलो दोस्तों आपसबो को दिवाली की शुभकामनाये, आज मैं आपको अपनी पड़ोसन की चुदाई की कहानी बताने जा रहा हु, ये कहानी बिलकुल नयी और ताज़ी है, तो सोचा आपलोग के साथ मैं ये चुदाई की कहानी शेयर करूँ. क्यों की आप लोग दिवाली के दिन भी टाइम निकाल के antarvasna स्टोरी पे आये हो. जब मैं आपलोगो की कहानियां पढता हु तो मेरा भी फ़र्ज़ है की मैं भी आपके साथ अपनी भी कहानी शेयर करूँ.

मैं दिल्ली में पढाई करता हु, २२ साल का नौजवान हु, काफी सुन्दर हु, मुझे लड़कियों को या भाभी को घूरना बहुत ही अच्छा लगता है, पर आज तक मैंने कभी चुदाई नहीं की, कभी मौका ही नहीं मिला था, पर आज तो मैं मेरी किस्मत का दरवाजा खुल गया है. मैं आज अकेला कमरे में बोर हो रहा था, तभी किसी ने मैं दरवाजा खटखटाया जाके देखा तो सामने बाली भाभी थी, तो वो बोली भैया अगर आप फ्री हो तो क्या लाइट लगा दोगे मेरे बालकनी में, आपको तो पता होगा की ये नहीं होते है (अपने हस्बैंड के बारे में) कंपनी के काम से विदेश गए है, मैं अकेली हु, इसलिए मुझे लाइट लगाने नहीं आती है, मैंने लाइट ले आई मार्किट से.

मैंने कहा हां हां क्यों नहीं, मैं लगा देता हु, और मैं उनके फ्लैट में चला गया, मेरा दरवाजा और उनका दरवाजा सामने ही, ही, मेरी पड़ोसन का नाम सोनी है, गजब की सुन्दर, बड़े बड़े चूच, चौड़ी गांड, सुराही की तरह पेट, गोरी, लाल लाल होठ, लम्बे बाल, बहुत ही सुन्दर लगती है, मैं जब से देखा था सोनी को तब से मैं उनकी याद में मूठ मार चूका हु, फिर मैं उनके यहाँ लाइट लगाने लगा, उस समय वो नाईटी पहनी थी, अंदर ब्रा नही पहनी थी इसवजह से उनकी चूचियाँ हिल दुल रही थी, उनका बाल खुला था, बार बार वो अपने लम्बे बाल को झटक के पीछे कर रही थी वो तो क़यामत की तरह था.

मुझे सोनी भाभी को देख कर रहा नहीं जा रहा था, जवान लण्ड बार बार खड़ा हो रहा था, मुझे उनके चोदने का मन करने लगा, तो मैंने भाभी की बड़ाई करनी सुरु कर दी, मैंने कहा भाभी कहा भैया आपको इस दिवाली में छोड़कर चले गए, ऐसे उनको जाने मत दो या तो आप भी उनके साथ चले जाया करो क्यों की इंसान को सब कुछ बार बार मिल सकता है जवानी नहीं मिलती, भाभी बोली हां ये बात से मैं सहमत हु, जितना मस्ती करना है कर लो फिर मौका नहीं मिलेगा, भाभी फिर बोली पर आपको ये सब चीज का एहसास कैसे हो गया है आपकी तो शादी भी नहीं हुयी है, तो मैंने कहा कई चीजो का एक्सपीरियंस सोच कर ही हो जाता है.

भाभी बोली आप हो बड़े होशियार खैर दिल्ली में कोई आपकी गर्ल फ्रेंड है की नहीं तो मैंने कहा नहीं भाभी कोई नहीं है, तो भाभी बोली किसी को पटाये हो की नहीं तो मैंने कहा मुझे पता ही नहीं है कैसे पटाते है क्या बोलते है, भाभी बोली चलो समझ लो मैं आपकी गर्ल फ्रेंड हु, आप मेरे से पटाने बाली बात करो, मैंने कहा कैसी हो डिअर आज कल दिखती नहीं हो, तो भाभी बोली चुप हो जा, मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हु, तो मैंने कहा फिर कैसी हो, भाभी बोली मैं सीधी साधी भारतीय लड़की हु, जो सिर्फ अपने पति के लिए हु, मैंने कहा ओये जान एक बार आजमा कर तो देख लो, तो भाभी बोली क्या है स्पेशल तेरे में, मैंने कहा ये तो आजमा के ही पता चलेगा, मैंने तुम्हे बहुत खुश रखूँगा,

भाभी चुप हो गयी, मैंने कहा क्या बात है भाभी बुरा लग गया क्या, तो भाभी बोली नहीं नहीं बस यूं ही, मैंने भी यही चाहती थी अपने ज़िंदगी में की कोई मुझे खुश रखे, मेरा पति मुझे प्यार नहीं करता मुझे किसी चीज की कमी नहीं है बस प्यार की है मेरा पति किसी और औरत के चक्कर में है, वो उसी के साथ पर्व में रहता है, आज वो किसी होटल में रंगरेलियां मना रहा होगा. और रोने लगी, मैंने उनके नजदीक जाके कहा, रोने से काम नहीं चलेगा, खुश रहो भाभी जी, आप इसके लिए सोचो क्या करना है, ऐसे काम नहीं चलेगा ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसलिए इंसान को ख्सः रखना चाहिए, और मैंने उनका सर अपने कंधे पे टिका लिया, और पीठ को सहलाते हुए सांत्वना देने लगा, फिर वो भी मुझे पकड़ ली.

मेरे बाहों में एक जवान औरत थी जिसकी चूचियाँ मेरे साइन से चिपकी हुयी थी, मैंने पहली बार किसी औरत को इतना करीब पाया था, फिर क्या था कब हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे पता ही नहीं चला, देखते ही देखते मेरी धकड़न तेज हो गयी, और हम दोनों बेड पे लेट गए, मैंने उनके चूचियों को दबाने लगा और उनके मुह से सिस्कारियां निकलने लगी, फिर वो बोली अरे छोडो और वो खड़ी हो गयी, मैंने कहा हो गया सत्यानाश, मैंने कहा क्या हुआ भाभी मैंने किसी को भी नहीं बताऊंगा, आप चिंता नहीं करो वो खड़ी एक पल सोचने लगी, फिर वो इधर उधर बाहर झांक के देखि, और अंदर आई बोली चलो पहले मिठाई खाओ दिवाली में मिठाई कहते है, मैंने कहा आप मुझे खुद खिलाओ,

वो रसगुल्ले खिलाने लगी, मैंने एक खाया और एक मैंने उनके मुह में दे दिया, और मैं उनके होठ के पास जाके बोला मेरा रसगुल्ला मुझे वापस कर दो, फिर वो अपने मुह से निकाली और होठ में फसा ली मैंने उनके होठ से आधा काट लिया फिर उनके होठ को चूमने लगा, एक बार फिर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे, और फिर बेड पे चले गए मैंने उनकी नाईटी खोल दी, और फिर चूच को मसलने लगा, वो अब आह आअह आअह कर रही थी, मैंने निचे आके देखा जांघो के बीच में काले बाल के बीच में एक दरार सा था, मैंने ऊँगली डाली भाभी उछल गई, मैं तुरंत दोनों ऊँगली से चिर के देखा लाल लाल बूर पहली बार दर्शन हुआ, ये कहानी आप antarvasna.us पे पढ़ रहे है.

फिर मैं सुंघा ओह्ह्ह आनंद ही आनंद था, नमकीन नमकीन रस मैंने कहा भाभी नमकीन है मीठा क्यों नहीं है, तो बोली, बूर में कोई रसगुल्ला थोड़े ना होता है, मुझे लगा फिर रसगुल्ला ही डाल के देख लेते है, मैंने रसगुल्ला लाके बूर के अंदर दे दिया और रसगुल्ला को चाटने लगा, भाभी बोली बड़े ही शरारती हो, मैंने कहा आपने ही बना दिया आज मुझे, फिर मैं बूर में रसगुल्ला डाल के खाता गया और वो खिलाती गयी, मेरा लण्ड खड़ा हो गया था, फिर भाभी बोली मुझे भी आइसक्रीम चखाओ मैंने अपना मोटा कला लण्ड उनके मुह में दे दिया, वो चूसने लगी, मुझे अजीब सी सिहरन हो रही थी, फिर वो मुझे धक्के दे के निचे कर दी और दोनों पैर को अलग अलग कर दी.

मैंने अपना लण्ड उनके चूत पे रखा और धक्का दिया, पूरा लण्ड उनके बूर में समा गया भाभी आअह आआह आआह आआह ओह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह की आवाज निकल रही थी और मैंने चोदे जा रहा था, वो भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी और मैं चोदे जा रहा था, फिर क्या था करीब एक घंटे तक हम दोनों ने एक दूसरे को संतुष्ट किया, शाम होने लगी फिर हम दोनों चोद के और चुदवा के उठे, फिर लड़ी लगाई, और फिर मैं पटाखे लेके आया और बारह बजे रात तक पटाखे छोड़े, फिर चुदाई की, करीब ५ बजे गए थे उन्ही के घर सो गया एक दूसरे को पकड़ के, दिन में करीब बारह बजे उठे फिर मैंने अपने फ्लैट में आये और नहा धोकर मैंने ये कहानी आपके साथ शेयर कर रहा हु, कहानी लिखते लिखे मेरे पास दो बार फ़ोन आ गया की आज रात को दोनों बहार चलेंगे खाना खाने और आज फिर एन्जॉय करेंगे क्यों की हो सकता है कल मेरे पति आ जायेगे,

आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी जरूर रेट करे, और मैं कोई और चुदाई की तो जरुर antarvasna.us पे शेयर करूँगा

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