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भाई के दोस्त ने बस मे

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Added : 2015-08-12 22:59:39
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हाय मेरा नाम रुची है. मेरी उम्र 22 साल है। मैं एक बहुत सुंदर और जवान स्त्री हूँ, मेरा कद 5 फुट 6 इंच है और मेरा रंग बहुत साफ़ है।
मेरा जिस्म बिल्कुल किसी कारीगर की तराशी हुई संगमरमर की मूर्ति की तरह है, लोग मुझे इस डर से नहीं छूते कि मेरे शरीर पर कोई दाग ना लग जाए।
मेरा फिगर 36-24-36 है और मेरी चूचियाँ मस्त गोल, सुडौल और सख्त हैं, गोरे रंग की चूचियों पर गहरे भूरे रंग की डोडियाँ बहुत सुंदर लगती हूँ।।।
लम्बे घने बाल, गांड तक आते हैं, जब वह मटक मटक कर चलती है सबकी पागल कर देती हूँ।।
मेरी गली के सारे लड़के मुझे पटाने की कोशिश करते रहते हैं। मेरे मम्मे लड़कों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं।
मेरी बड़ी सी गाण्ड देख कर लड़कों की हालत खराब हो जाती है और वो खड़े खड़े लण्ड को हाथ में पकड़ लेते हैं।
मेरे रेशमी लम्बे बालों में पता नहीं कितने लण्डों के दिल अटके पड़े हैं। मेरी पतली कमर, मेरे गुलाबी गुलाबी होंठ, लड़कों को मेरे घर के सामने खड़े रहने के लिए मजबूर कर देते हैं।
सब मुझे पटाने के हथकंडे आजमाते रहते थे पर मैं किसी से नहीं पट रही थी।
मैं देल्ही के पास के गाँव की रहने वाली हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी और सोचा कि मुझे भी अपनी बात सबको बतानी चाहिए। इसलिए आज मैं आपको एक व्यक्तिगत अनुभव सुनाने वाली हूँ।
+२ के बाद आगे पढ़ने के लीअ मे ने देल्ही की एक यूनिवर्साइटी मा दाखिला ले ली |
और मे लोकल बस से कॉलेज जाने लगी| वैसे तो दिल्ली की बसें लड़कियों के लिए मुसीबत भरी होती हैं, इतनी भीड़ होती है, ऊपर से भीड़ में हर मर्द आशिक बन जाता है।
दिल्ली की बसों में कोई न कोई अंकल हमेशा कभी मेरे मम्मे दबा देते, तो कभी मेरी चूत सहला देते।
कभी कोई लड़का अपना खड़ा लण्ड मेरी चूत या गांड से सटा के दबाता। कोई कोई तो इतनी बेरहमी से चूचियाँ मरोड़ता था कि सीधे बिजली की तरह चूत में कर्रेंट लग जाता।
एक दिन मे अपने भाई के लॅपटॉप मे मूवी दाख रही थी तो एक फोल्डर मे मूज़े ब्लू फिल्म वी मील गया मे उसको देख कर भाई का लॅपटॉप लौटा दी |
पर पता नहीं क्यों, पर वो नज़ारा देख कर मेरी चूत में खुज़ली सी होने लगी और मुझे अपनी सांसें कुछ भारी सी लगने लगी। मैं वहाँ पर पूरा कार्यक्रम देखकर बाथरूम जाकर अपने कमरे में तो आ गई पर मुझे फ़िर नींद नहीं आई।
वो दृष्य मेरी आंखों के सामने नाचने लगा। मैंने अपनी सलवार और कच्छी उतार दी और एक हाथ से अपनी चूचियाँ दबाते हुए अपने पैन को चूत में डाल कर चलाया।
फ़िर पैन के बज़ाए दूसरे हाथ की उँगली डाली। थोड़ी देर बाद मेरी चूत में से कुछ सफ़ेद सा निकला और मुझे पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।
सुबह मम्मी की आवाज़ ' कोलेज़ नहीं जाना है क्या ! जल्दी उठ !' से मेरी आँख खुली, तो जल्दी से कपड़े पहन कर बाहर आई।
मुझे रात की बात अभी भी याद आ रही थी, पर मैं कोलेज़ जाने के लिए तैयार होने लगी। मैं कच्छी और ब्रा पहन कर ही नहाती हूँ पर उस समय मेरी उत्तेज़ना बढ़ गई और मैं पूरी नंगी होकर नहाई और उँगली, साबुन की सहायता से अपनी चूत का पानी निकाला।
तरोताज़ा होकर, नाश्ता कर मैं कोलेज़ के लिए घर से निकल गई। थोड़ी सी दूर सड़क से बस मिल जाती है, वहीं से मैंने बस पकड़ी जो रोज़ की तरह ठसाठस भरी थी।
जैसे तैसे गेट से ऊपर चढ़ कर थोड़ा बीच में आ गई। तो वो रोज़ की कहानी चालू। आप तो जानते ही होंगे, जवान लड़की अगर भीड़ में हो तो लोग कैसे फ़ायदा उठाते हैं, और आप उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते।
वही मेरे साथ होता है। मेरे पीछे से कोई मेरे चूतड़ दबाने सा लगा, तो एक अन्कल मेरे कन्धे पर बार बार हाथ रख कर खुश होने लगे। एक महाशय सीट पर बैठे थे, भीड़ की वज़ह से मेरी साईड उनके सिर से दबी थी, जो उन्हें भी मज़ा दे रही होगी।
इतने में मेरे भाई का एक दोस्त जो बहुत दिन से मेरे पीछे पड़ा था और केवल मेरे लिए ही इस बस से आता-जाता था, अपने गाँव से बस में चढ़ा। लन्बा तगड़ा तो खैर वो है ही, हैण्डसम भी है। पर मैं उसे ज्यादा भाव नहीं देती थी।
आज़ तो वो सबको हटाता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। मैंने उसे देखा पर मैं कोई आपत्ति करने की स्थिति में नहीं थी। कुछ कहा तो बोला- बस में भीड़ ही इतनी है।
अब तो मेरी नाक उसकी छाती से टकरा रही थी।
मुश्किल से पाँच मिनट बीते होंगे कि अचानक ड्राईवर ने बड़े जोर से ब्रेक लगाए तो मैं करीब करीब उसके ऊपर गिर ही पड़ी। संभलने में मेरी मदद करते हुए उसने मेरे दोनों चूचियों को पूरी तरह जकड़ लिया।
इतनी भीड़ थी और हम इतने करीब थे कि मेरे सीने पर उसके हाथ और मेरी चूचियों का बेदर्दी से मसलना कोई और नहीं देख सकता था। मेरे सारे शरीर में कर्रेंट दौड़ गया, अपनी चूत में मुझे अचानक तेज़ गर्मी महसूस होने लगी।
इतना सुख महसूस हो रहा था कि दर्द होने के बावजूद मैंने उसे रोका नहीं।
वो फ़िर मेरे से सट कर खड़ा हो गया। बस चलने लगी। इतने में मैंने अपने चूतड़ों के बीच अपनी गाण्ड में कुछ चुभता सा दबाव महसूस किया।
पहले तो मैंने इस पर खास ध्यान नहीं दिया अप्र मैं समझ गई कि उसका लण्ड मेरे चूतड़ों की गरमी खा कर खड़ा हो गया है और वो ही मुझे चुभ रहा है। यह सोच कर मुझे रात वाला नज़ारा फ़िर याद आ गया और मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई।
अब मैं बिल्कुल बिना हिले कपड़ों के ऊपर से ही अपनी गाण्ड का तिया-पाँचा कराने लगी।
बस फिर क्या था, उसकी समझ में आ गया कि मैं कुछ नहीं बोलूंगी। फिर तो वह और भी पास आ गया और मेरे मम्मे सहलाने लगा। मेरी चूचियाँ तन कर खड़ी हो गई थी, वह उनको मरोड़ता और सहलाता। मेरी आँखें बंद होने लगी, मैं तो स्वर्ग में थी !
इतने में उस ने अपना हाथ नीचे से मेरी कुर्ती में डाल दिया। उसका हाथ मेरे नंगे बंदन पर चलता हुआ मेरे मम्मों के तरफ बढ़ने लगा।मेरी सांस रुकने लगी, मन कर रहा था की चीख कर अपनी कुर्ती उतार दूँ और उसके दोनों हाथ अपने नंगे सीने पर रख लूँ।

आखिर उसके हाथ मेरी नंगी चूचियों तक पहुँच ही गए। अब तो मेरी वासना बेकाबू हुए जा रही थी।
फिर उस ने अपना एक हाथ मेरे नवी के आस पास कलने लगा मेरा तो मान हो रहा था के आव मे नंगी हो कर चुड जाउ लेअकिन मे कुछ कर नही सकती थी |फिर उस ना मेरे नारे को खोल दीआ और पैन्टी के उपर से ही मेरे चूत
को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा | फिर अपनी उंगलिओं से मेरी चूत की फांकें अलग करके उसने एक उंगली मेरी गीली चूत में घुसानी चाही, लेकिन उसको रास्ता नहीं मिला।
फिर मुझ से रहा नही गया और मेरा हाथ व उसके लंड के उपर चला गया और मैं उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी |
फिर उस ने मेरे कान के पास आ कर बोला नेक्स्ट स्टॉप पर उतार जाना सोचने या संभलने का मौका मिले, इससे पहले ही मैं उनके साथ बस से उतर चुकी थी।
वो मुझे अपने साथ अपने एक दोस्त के रूम पर ले गया |और बोला उसका दोस्त ३-४ दीनो के ली देल्ही से बाहर गया है |रूम मे घुसते ही वो मुझसे लिपट कर जगह जगह मुझे चूमने चाटने लगा। इससे मेरी उत्तेज़ना और बढ़ गई।
इसके बाद जब उसने मेरी चूचियों को दबाना-मसलना शुरू किया तो मुझे जैसे ज़न्नत दिखाई देने लगी। वो एक हाथ से मेरी चूचियां और दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ों को बारी बारी दबा रहा था।
तो मैं बोली पहले डोर तो बंद करो तो वो उठा और जल्दी से डोर बंद कर के लौट गया|
कमरे में आते ही उसने मुझे चूम लिया और बाहों में ले लिया। मैं तो ख़ुशी से पागल हो रही थी उसकी बाहों में आकर।
उसने मुझे कहाँ कहाँ नहीं चूमा- होंठ पर, कान पर, हाथ पर, वक्ष पर !
फिर उसने मुझे कस के बाहों में भर लिया और मेरे होंठ चूसने लगा। फिर उसने मेरे बाल कान पर से हटाये और कानों के आस-पास चूसने लगा और उन्हें किस करता रहा।
इससे मेरे बदन में एक अजीब सी खुमारी छा गई और मैं अपना आपा खोने लगी। वो मुझे चूमता रहा और मैं बेहोश सी होने लगी। मन करता रहा कि बस वो मुझे चूमता रहे और मैं जन्नत में चली जाऊँ।

फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे वक्ष पर रखे और उन्हें दबाया...आआआआआह्ह्ह्ह्ह ऽऽ क्या स्पर्श था वो ! उसने फिर थोड़ा और जोर से दबाया और म्म्म्म्म्म्म्म्म्म बस पागल सी होने लगी मैं।
फिर उसने दूसरे स्तन के साथ भी यही किया और अब तो मैं बस और खोना चाहती थी।
फिर उसने मुझे पलंग पर लेटाया, मेरे ऊपर आ गया, मेरी आँखों में देखने लगा और कहा- तुम्हारी आँखें इतनी सेक्सी क्यों हो रही हैं?

मैंने कहा- बस तुम्हारे प्यार का नशा चढ़ा हुआ है !

यह सुनते ही उसने मेरे होंठ फिर चूम लिए और दोनों दूध को दबा दिया- ऊऊऊऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्हह क्या बताऊँ कि कैसा लगा ! ऐसा लगा कि हाँ, बस आजा राजा और मार दे मुझे !
मैं इसी दिन के लिए तड़प रही थी। फिर वो मुझे चूमता रहा- चूमता रहा और धीरे धीरे नीचे जाने लगा।
मैं तो बस रंगीन दुनिया में खोई हुई थी, उसने धीरे से मेरा कुरता उठाया और पेट पर चूम लिया..... हाय क्या बताऊँ - क्या हुआ- एक करंट सा दौड़ गया पूरे बदन में ४४० वाल्ट का !

फिर उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैं मना करने की स्थिति में नहीं थी, सो मैंने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो मेरा कुर्ता आराम से उतार सके। उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खींच दिया।
सलवार बिना लगाम के घोड़े की तरह झट से नीचे गिर गई। अब मैं उसके सामने केवल ब्रा और पैन्टी में रह गई थी।
मुझे शर्म तो आ रही थी लेकिन उत्तेज़ना शर्म पर हावी हो गई थी। सो मैं चुपचाप तमाशा देखती रही। उसने पहले तो मेरे सीने को फ़िर नाभि को ऐसे चूसना शुरू कर दिया मानो कुछ मीठा उस पर गिरा हो और वो उसे चाट कर साफ़ कर रहा हो।
मैं बुरी तरह उत्तेज़ित हो रही थी कि उसने मेरी कच्छी के ऊपर से एक उँगली मेरी चूत में घुसेड़नी शुरू कर दी। मुझे दर्द का भी अहसास हुआ पर मैं उसे मना ना कर सकी।
पता नहीं मुझे क्या हो गया था लेकिन मैं बेशर्म हो कर अपनी चूचियाँ अपने आप दबाने लगी थी।
फिर उस ने मुझे अपने सामने खड़ा किया और पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को चूमने लगा | मेरी जांघों को सहलाते हुए मेरी एक टांग को सोफे पर रख कर अपनी एक उंगली से मेरी पैंटी के इलास्टिक को थोड़ा सा हटाते हुए मेरी टाँगों के जोड़ को चाटने लगे।
मेरी हलकी सी आह निकली।
थोड़ी देर वहाँ चाटने के बाद उन्होंने मुझे घुमा कर मेरे कूल्हों को अपने सामने कर लिया और पैंटी के ऊपर से मेरे चूतड़ चूमने लगे।
फिर मेरी पैंटी को थोड़ा नीचे कर के मेरी गांड को सहलाते हुए चाटने लगे। मैं अपने दोनों हाथों से अपने मोम्मे दबा रही थी और सिसकार रही थी। मेरी चूत से पानी बहने लगा |
कुछ देर बाद उस ने मेरी पैंटी खींच कर नीचे कर दी और मैंने उसे उतार दिया। फिर मुझे सोफे पर बिठा कर स्वयं नीचे अपने घुटनों पर बैठ गए और मेरी टाँगों को खोल कर मेरी चूत के ऊपर चूमने लगे।
फिर उस ने ऊपर होकर मेरे होठों को चूमा और फिर नीचे हो कर मेरी नाभि के आस पास चाटने लगे।उसकी एक उंगली मेरी चूत को सहला रही थी और मैं जोर जोर से सिसकार रही थी। फिर उस ने अपनी जीभ से मेरी चूत के ऊपर चाटना शुरू कर दिया।
उन्होंने मेरी गांड के नीचे हाथ डाल कर मेरी चूत को अपने मुँह के और पास कर लिया। उनके हाथ मेरे मोम्मे दबा रहे थे और जीभ मेरी चूत के अंदर बाहर हो रही थी।
सिर्फ पाँच मिनट बीते होंगे कि मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं जोर से हुंकारते हुए झड़ गई।
फिर मैं पीछे मुड़ी और घोड़ी बन कर उसकी पैंट, जहाँ पर लण्ड था, पर अपना चेहरा और गालें रगड़ने लगी। मैंने उसकी शर्ट खोलनी शुरू कर दी थी। जैसे जैसे मैं उसकी शर्ट खोल रही थी उसकी चौड़ी और बालों से भरी छाती सामने आई।

मैं उस पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगी और चूमने लगी। धीरे धीरे मैंने उसकी शर्ट खोल कर उतार दी। वो मेरे ऐसा करने से बहुत खुश हो रहा था। मुझे तो अच्छा लग ही रहा था। मैं मस्त होती जा रही थी।

मेरे हाथ अब उसकी पैंट तक पहुँच गए थे। मैंने उसकी पैंट खोली और नीचे सरका दी। उसका लण्ड अंडरवियर में कसा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि जैसे अंडरवीयर फाड़ कर बाहर आ जाएगा।

मैंने उसकी पैंट उतार दी।

मैंने अपनी एक ऊँगली ऊपर से उसके अंडरवियर में घुसा दी और नीचे को खींचा। इससे उसकी झांटों वाली जगह, जो उसने बिलकुल साफ़ की हुई थी दिखाई देने लगी। मैंने अपना पुरा हाथ अंदर डाल कर अंडरवियर को नीचे खींचा।
उसका 7 इंच का लण्ड मेरी उंगलियों को छूते हुए उछल कर बाहर आ गया और सीधा मेरे मुँह के सामने हिलने लगा।

इतना बड़ा लण्ड अचानक मेरे मुँह के सामने ऐसे आया कि मैं एक बार तो डर गई। उसका बड़ा सा और लंबा सा लण्ड मुझे बहुत प्यारा लग रहा था और वो मेरी प्यास भी तो बुझाने वाला था।

मेरे होंठ उसकी तरफ बढ़ने लगे और मैंने उसके सुपारे को चूम लिया। मेरे होंठो पर गर्म-गर्म एहसास हुआ जिसे मैं और ज्यादा महसूस करना चाहती थी।
तभी उस ने भी मेरे बालों को पकड़ लिया और मेरा सर अपने लण्ड की तरफ दबाने लगा।

मैंने मुँह खोला और उसका लण्ड मेरे मुँह में समाने लगा। उसका लण्ड मैं पूरा अपने मुँह में नहीं घुसा सकी मगर जो बाहर था उसको मैंने एक हाथ से पकड़ लिया और मसलने लगी।

वो भी मेरे सर को अपने लण्ड पर दबा रहा था और अपनी गाण्ड हिला हिला कर मेरे मुँह में अपना लण्ड घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था।

थोड़ी ही देर के बाद उसके धक्कों ने जोर पकड़ लिया और उसका लण्ड मेरे गले तक उतरने लगा।
तो मैंने लंड चूसने की गति बढ़ा दी और अब लंड अपने मुँह में डाल कर अपने सिर को जोर जोर से ऊपर नीचे करने लगी।
तभी उस ने अपना लंड बाहर खींचना चाहा पर मैंने उसे नहीं छोड़ा सिर्फ मुँह से बाहर निकाल कर जोर जोर से हिलाने लगी और उनके लंड से वीर्य की अनगिनत पिचकारियाँ निकल कर मेरे बालों और चेहरे को भिगोने लगीं।
एक बार जब उनके लंड से वीर्य की अंतिम बूँद भी निकल गई |
थोड़ी देर के बाड़ वो फिर उठा और मेरे दोनों तरफ हाथ रख कर मेरे ऊपर झुक गया। फिर उसन मुझे अपने ऊपर कर लिया और मेरी ब्रा की हुक खोल दी। मेरे दोनों कबूतर आजाद होते ही उसकी छाती पर जा गिरे।
उसने भी बिना देर किये दोनों कबूतर अपने हाथो में थाम लिए और बारी बारी दोनों को मुँह में डाल कर चूसने लगा।

वो मेरे मम्मों को बड़ी बुरी तरह से चूस रहा था। मेरी तो जान निकली जा रही थी। मेरे मम्मों का रसपान करने के बाद वो उठा और मेरी टांगों की ओर बैठ गया। उसने मेरी पैंटी को पकड़ कर नीचे खींच दिया और दोनों हाथों से मेरी टाँगे फ़ैला कर खोल दी।

वो मेरी जांघों को चूमने लगा और फिर अपनी जीभ मेरी चूत पर रख दी। मेरे बदन में जैसे बिजली दौड़ने लगी। मैंने उसका सर अपनी दोनों जांघों के बीच में दबा लिया और उसके सर को अपने हाथों से पकड़ लिया।उसका लण्ड मेरे पैरों के साथ छू रहा था।
मुझे पता चल गया कि उसका लण्ड फिर से तैयार हैं और सख्त हो चुका हैं।

मैंने उस की बांह पकड़ी और ऊपर की और खींचते हुए कहा- मेरे ऊपर आ जाओ राजा..

वो भी समझ गया कि अब मेरी फुद्दी लण्ड लेना चाहती है।
उसके लण्ड का अगला भाग जिसे शायद सुपाड़ा कहते हैं जैसे ही मेरी चूत से टकराया लगा कि जैसे गर्म सरिया या रॉड सी मेरी चूत पर छुआ दी हो।
सच अगर चूत में लण्ड डलवाने की इतनी खुजली न मची होती तो मैं तुरन्त उसे वहां से हटा देती, लेकिन मैं अपनी चूत के हाथो मजबूर थी। अब उसने चूत पर लण्ड का दबाब बढ़ाना शुरू किया।
मुझे दर्द का एहसास हुआ तो मैने थूक लगाकर डालने की सलाह दी जिसे उसने तुरन्त मान लिया।
उसने सुपाड़े पर थूक लगाकर जोर का झटका मेरी चूत के छेद पर मारा, पर निशाना मिस हो गया और लण्ड मेरे पेट के निचले हिस्से की खाल को जैसे चीरता हुआ उपर आया।
मैने उसे अपने पर्स में निकालकर अपनी कोल्ड क्रीम की ट्यूब उसे दी और उसके लण्ड पर लगाने को कहा, अबके उसने लण्ड के साथ साथ मेरी चूत को भी क्रीम से भर दिया, उँगली डाल डाल कर क्रीम अन्दर पहुँचा दी।
मेरी हालत प्रति क्षण खराब होती जा रही थी।
मैने उससे कहा कि मैं रास्ता दिखाती हूँ तुम जोर का धक्का मारो।
फिर मैने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और दबाया। इशारा समझकर उसने शायद पूरी ताकत से धक्का मार दिया। उस समय ऐसा लगा कि उसने धक्का नहीं मुझे मार दिया।
एक झटके में उसका आधे से ज्यादा महालण्ड मेरी चूत में समा गया था। मेरी चूत निश्चित ही फट गयी थी और वह दर्द का अहसास हुआ जो आज तक कभी भी जिन्दगी में नहीं हुआ। मैं सिर पटकने लगी।
सारी उत्तेजना जाने कहाँ हवा हो गयी थी, मैं उससे लण्ड निकालने की रो-रोकर विनती करने लगी, लेकिन उसे तरस न आया, वो तो उल्टा मेरी चुचियों को चूसने और काटने लगा।
पर उसने लण्ड को वहीं रोक दिया। थोड़ी देर में मुझे कुछ आराम सा महसूस होने लगा तो मैने उसे बताया। अब उसने लण्ड को धीरे धीरे गति देनी चालू की। उसने धक्के अब भी मेरी चूत को फाड़े दे रहे थे।
भंयकर दर्द हो रहा था लेकिन ये उस जानलेवा दर्द के आसपास भी नहीं था जो पहले झटके में शायद क्रीम के कारण हो गया था।
थोड़ी ही देर में मुझको भी मजा सा आने लगा। उसके धक्के अभी भी दर्द पैदा कर रहे थे पर उस दर्द में भी एक अलग आनन्द की अनुभूति हो रही थी। मेरी चूत में से पता नहीं क्या कुछ निकल कर रिस रहा था।
पर उसका चूमना चाटना और बीच बीच में काटना अलग ही था। मैनें इतना आनन्द अनुभव किया जो जिन्दगी में पहले नहीं किया था। पर बात उससे आगे की भी थी। करीब २० मिनट बाद उसने अचानक धक्कों की स्पीड बढा दी।
मैने भी सहयोग करने का निश्चय करके नीचे से चूतड़ उछालने लगी।
दोनो अपने वेग में थे कि अचानक मेरी चूत में कुछ संकुचन सा हुआ और मैनें उसको कस के चिपटा लिया, अपने नाखून उसकी कमर में गाड़ दिये। तभी मैनें अपनी चूत में कुछ गर्म गर्म लावा सा गिरता हुआ महसूस किया।
कुछ ही मिनटों में हम दोनो शान्त हो गये थे। पर आखिर के वो एक-दो मिनट में जो आनन्द आया उसके सामने शायद जन्नत का सुख भी फीका हो।
मैं उसकी मुरीद हो गयी। उसने उसके बाद लण्ड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया, मैने उसे बड़े प्यार से चाट-चाट कर साफ किया।
फिर जब मैनें बैठकर अपनी चूत रानी को देखा तो मेरे मुँह से चीख सी निकल गयी |
उसमें से खून भी रिस रहा था। मैं यह देखकर डर गयी थी। पर उसने हिम्मत बंधायी। पता नहीं उसने मुझे वापस लिटाकर मेरी चूत में कपड़े से और क्रीम से क्या क्या किया पर सुकून था कि खून रूक गया था।
अब थकान बहुत महसूस हो रही थी। सो उस ने मुझे अपने साथ चिपका लिया और मेरे ऊपर एक टांग रख ली। वैसे लेटे लेटे ही हम दोनों की आँख लग गई और हम दोनों ने १५ मिनेट की नींद ले ली।
फिर उठ कर हम दोनों नहा कर आये तो उस ने खाना मंगवा लिया। खाना खाने के थोड़ी देर बाद ने अपने सारे कपड़े उतार दिये और मुझे अपनी गोद में उठा कर बैड पर ले जाने लगे।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिये और उनकी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर उनको चूमने लगी।
तब उस ने मुझे अपनी गोद में उठा कर बैड पर लिटा दिया और एक बार फिर हम दोनों चूमा चाटी में व्यस्त हो गये। मुझे थोड़ी सुस्ती आने लगी तो मैंने करवट लेकर उसकी की तरफ पीठ कर ली।
उस ने अपनी एक बाँह और एक टांग मेरे ऊपर रख ली।थोड़ी देर बाद उस ने अपने एक हाथ से मेरे मोम्मे को दबाना शुरू कर दिया और मेरी पीठ को चूमने चाटने लगे।
उनका लंड एक बार फिर से तन चुका था और मेरी गांड के नीचे से मेरी जांघों में घुसने की कोशिश कर रहा था। मैंने करवट ले कर उनके होठों को चूम लिया और उनके लंड को सहलाने लगी।
फिर मैं अपने घुटनों के बल घोड़ी बन गई तो उन्होंने मेरी गांड को चूमते हुए मेरी गांड के छेद को सहलाना शुरू कर दिया। "मम्म्म! रूचि तुम्हारी गांड कितनी स्वादिष्ट है!" मेरी गांड को चाटते हुए कुट्टी सर बोले।
मैं जोर जोर से सिस्कार रही थी। बहुत समय तक मेरी गांड के छेद को सहलाने के बाद सर ने अपने बैग से तेल की बोतल निकाली और अपने एक हाथ पर तेल लगाने लगे।
उस ने अपनी तेल से चिकनी हुई एक उंगली मेरी गांड में डाल दी और अंदर बाहर करने लगे।
मैं जानती थी कि उनका लंड उनकी दो तो क्या तीन उँगलियों से भी मोटा है |
और आज मेरी गांड फटने ही वाली है। कुछ देर तक मेरी गांड में अपनी उंगली अंदर बाहर करने के बाद उन्होंने मेरी गांड को अपने हाथों से खोला और अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रगड़ने लगे।
उसका खड़ा लण्ड मेरे चूतड़ों पर फ़िसलने लगा। मेरी सांसें तेज हो गई।
मेरे बदन पर उसके हाथ फ़िसलने लगे। मेरी टाइट हुई चूचियाँ उसने दबा डाली। मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा था। उसका लण्ड मेरी चूतड़ों की दरार को चीर कर छेद तक पहुंच गया था।
मैं अपने आप झुक कर उसके लण्ड को रास्ता देने लगी। लण्ड का दबाव छेद पर बढ़ता गया और हाय रे !
एक फ़क की आवाज के साथ अन्दर प्रवेश कर गया। उसका लण्ड जैसे मेरी गाण्ड में नहीं बल्कि जैसे मेरे दिल में उतर गया था। मैं आनन्द के मारे तड़प उठी।

आखिर मेरी दिल की इच्छा पूरी हुई। एक आनन्द भरी चीख मुख से निकल गई।
उसने लण्ड को फिर से बाहर निकाला और जोर से फिर ठूंस दिया। मेरे बदन में आग भर गई। उसके हाथों ने मेरे उभारों को जोर जोर से हिलाना और मसलना आरम्भ कर दिया था।
उसका हाथ आगे से बढ़ कर चूत तक आ गया था और उसकी दो अंगुलियां मेरी चूत में उतर गई थी। मैंने अपनी दोनों टांगें फ़ैला ली थी।
।मेरी घुटी घुटी चीखों को सुन कर वो बोला, "रूचि मैं जानता हूँ कि तुम्हें दर्द हो रहा है परंतु अभी तुम्हें आनंद आने लगेगा !" और फिर धीरे धीरे अपना लंड मेरी गांड के अंदर बाहर करने लगे।
थोड़ी देर बाद जब मेरी चीखों की आवाज़ सीत्कारों में बदल गई तो उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। कुछ समय बाद उन्होंने मेरी गांड मारने की गति बढ़ा दी, "आह्ह रूचि तुम्हारी गांड कितनी मस्त है!"
अब वो मेरी गांड पर जोर जोर से चपत मार रहे था |
कोई एक घण्टे तक मेरी गांड मारने के बाद उस के लंड ने मेरी गांड में गरम गरम वीर्य भर दिया।
उस ने अपना ढीला होता हुआ लंड मेरी गांड से बाहर निकाला और मेरे साथ सोफे पर बैठ कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया,"रूचि ! मैंने अपने जीवन में बहुत लड़कियों की गांड मारी है परंतु आज जैसा मज़ा कभी नहीं आया !" वो मेरे बालों को सहलाते हुए बोले।
"मुझे भी बहुत मज़ा आया !" उसके चौड़े सीने में अपना चेहरा दबाती हुई मैं बोली।

फिर हम दोनो उठ कर साथ स्नान की और फिर एक ही बस से वापस घर लौटने लगी | पूरे बस मे वी वो मारे साथ मज़ा लता रहा तो लास्ट मे पूछी की तुम्हारा नाम के है |तो उस ने राज बताया |

दोस्तो और मेरे भाईयो ! कैसी लगी आपको मेरी कहानी?

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई हो तो मुझे जरूर मेल करना और मुझसे कुछ पूछना हो तो भी मेल करना ! मैं जवाब दूँगी ! मुझे आपकी मेल का इन्तजार है ।
आपकी बड़ी चुची बाली रूचि या चुदक्कड या जो भी समझे.....................

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