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Bhabhi ki choti behan

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Added : 2015-08-14 23:54:27
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प्यारे दोस्तो नमस्कार मेरा नाम अमिरिश पुरी (बदला हुआ) है! और मैं19 साल का हूँ !अंर्तवासना पर ये मेरी पहली कहानी है, आशा करता हूँ कि आप लोगों को जरुर पसंद आयी होगी! तथाकिसी प्रकार की गलती या त्रुटी हो तो गुरुदेव से क्षमा प्रार्थीहूँ !ये कहानी दो वर्ष पहले की है, मैं उस समय बी कॉम फर्स्ट ईयर में पढ़ता था! जब मेरेभैया की शादी पटना शहर में ही तय हो गयी थी!भैया का ससुराल मेरे कोचिंग के रास्ते में ही पड़ता था! एक दिन की बात है जब मैं कोचिंग से आ रहा था तो रास्ते मेंमुझे मेरी होने वाली भाभी मिल गयी और मैंने बाइक रोक दी ! उन्होंने मुझे तुरंत पहचान लिया! हमलोग सगाई पर मिल चुके थे! वो बज़ार अपने निज़ी समान लेने आयीं थीं ! मैने कहा घर छोड़ दूँ , उन्होंने कहा जरुर ! मैंने उन्हें घर छोड़ दिया , वो अन्दर आने को कहने लगीं ! मैं मना कर दिया क्योंकी उस समय शाम के 5 बज़ रहे थे ! परंतु उनके ज्यादा जोर देने पर मैं मना नही कर पाया और उनके पीछे अन्दर चला गया !उस समय घर उनके और उनकी छोटी बहन जिसका नाम रुपा था के सिवाये कोई नहीं था , सभी लोग पड़ोस में मेंहदीं समारोह में गये हुए थे , वो खाना खाने के लिये कहने लगी तोमैंने मना कर दिया !इतनें में उनकी छोटीबहन रुपा आयी क्या कमाल की छोड़ी थी , रंग तो उसका गेहुँआ था पर साली की फिगर कमाल की थी!वो अक्सरघर मे फ्रॉक ही पहना करती थी , हमलोग उनके बैडरुम मे बैठकर इधर-उधर की बातें करने लगे, उसने बताया की उसे डांस करना बहुत पसंद है ! इसी साल उसने दसंवी मे प्रवेश किया है! हमारे बातों का सिलसिला कुछ देर तक यूँ ही चल रहाथा की इतने में पड़ोस की आंटी ने भाभी को किसी काम से बुला लिया!हमलोग फिर से बातें करने लगे , थोड़ी देर बाद मुझे जोरो से 1न0 लगी मैंने संकोचवश वाथरुम पुछा उसने बता दिया , आते ही मैने देखा कि मेरा फोन उठाकर गैलरी में रखी विडिओ साँग देख रही थी तभी उसने एक ऐसा फोल्डर खोला जिसमे ब्लू फिल्म छिपाई गई थी, वो उसे प्ले करके देखने लगी, शायद उसे अच्छा लग रहा था, इसलिये उसने अपने चुचियों पर हल्के-हल्के हाथ फेर रही है , मैं वहीं दरवाजे के पिछे खड़े हो कर पर्दे के चिलमन से सब-कुछ देख रहा था ! अब मेरा सब्र भी टुट रहा था , और मेरा लण्ड भी तनकर ईफिड टॉवर बन चुका था ! मैने पिछे जा कर फ्रॉक के उपर से ही उसकी चुचियों को दबाने लगा ! पहलेतो वो चौंक गयी लेकिन मुझे पा कर वो शांत हो गयी ! अब मैंने उसकी चुचियों को आहिस्ते-अहिस्ते­ मसलना शुरु किया अब उसे भी मज़ा आने लगा था ! धीरे-धीरे मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में घुसा दिया और उसकी चुत को सहलाने लगा , अब उसके मुँह से सिस्कारियाँ निकलने लगी , मैने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके होठों को जोर-जोर से चुसने लगा मैने अपना जीभ उसके मुँह मे दे दिया वो मेरेजीभ को लोलीपॉप की तरह चुसे जा रही थी , हमदोनों को थोड़ी-थोड़ी गर्मी लगने लगी थी उसने मेरी टीशर्ट उतारी और मैने उसकी फ्रॉकउतारा तो मैं उसकी चुचियों को ही देखता रह गया साली की चुचियाँ छोटे-से मौसम्मी के आकार के थे !मैं उसकी चुचियों को अपने मुँह मे भरकर चुसे जा रहा थाऔर मेरा एक हाथ उसकी पैंटी में अपना कमाल दिखा रहीं थी उधर उसके मुँह से सिस्कारियाँ निकल रही थी! मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था मैंने तुरंत उसकी पैंटी उतारी औरउसक चुत को बुरी तरह चुसने लगा वोतो जैसे तड़प उठी मै अभी भी उसकी चुतको चुसे जा रहा था इसी बीच वो मेरे मुँह में ही झड़ गयी मैंने सारा रस चट कर दिया , अब मैं अपनी जीभ से उसकी चुत को चोदे जा रहा था ! उसे भी मज़ा आ रहा था अब वो फिरसे अपने उफान पर आ रही थी ! उसकी गहरी गुलाबी चुत को छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था , अब मैं थोड़ा उपर आ कर उसकी दोनों टाँगों को अलग-अलग फैलाकर अपने लण्ड को उसकी चुत पर जोर-जोर से रगड़ने लगा, उसकी सिस्कारियाँ भीजोर पकड़ने लगी ! तभी मुझे अपने लण्ड पर गिलापन मह्सुस हुआ वो फिर से झड़ चुकी थी! अब मैंने भी देर ना करते हुए अपना लण्ड उसकी चुत में घुसाने लगा , चिकनाई की वज़ह से लण्ड थोड़ा अन्दर चला गया मैंने एक जोर का धक्का मारा लण्ड पूरा अदंर चला गया दर्द के मारे उसके मुँह से जोर की चीख निकली मैंने अपना एक हाथ उसके मुँह पे रख दियाउसकी आँखों से आँसू निकल पड़े ! अब मैंने लण्ड को पिछे करके एक धक्का और मारा अबकी बार लण्ड सीधा बच्चेदानी से जा टकराया इस बार भी उसके मुँह से चीख निकल पड़ी लेकिन इस बार का दर्द पिछली बार से ज्यादा था मैं कुछ देर इसीमुद्रा मे रहा!जब दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने अपने लण्ड को आगे पीछे करना शुरु कर दिया अब उसकी सिस्कारियाँ भी आह-आह की आवाज़ में बदल चुकी थी जिसने मेरी स्पीड बढ़ा दी ! 20 मिनट तक मैंने जोरदार झटकों से उसे चोद रहा था, उसके मुँह से उँउँउँउँउँ-ईईईई­ई ऊँऊँ की आवाज़ें निकल रही थी, अब उसकी साँसें भी तेज़ होने लगी बदन एठने लगा ओओओओओओओओओओ और उसकी चुत से झड़ना बह गया ! मैने भी समय की नज़ाकत को समझते हुए 5मिनट बाद अपना खौलता हुआ लावा उसकी चुत में उड़ेल दिया! हमलोग कुछ देर इसी हालत मे रहे, थोड़ी देर बाद हमने अपने-अपने कपड़े पहन लिये और बैठकर बातें करने लगे ! तभी दरवाजे की बेल बजी, रुपा ने कहा लगता है दी..... आयी है दरवाजा खोलने के पहले हमने एक-दुसरे की जोरदार चुम्मी ली और मै़ने उसके चुची को तीन-चार बार मसला , फिर वोदरवाजा खोलने चली जाती है भाभीअदंर आती हैं , मैंने पुछा आप इतनी देर से कहाँ थीं? भाभी ने कहा मैं पड़ोस मे मेहंदी समारोह मे गयी हुई थी !रात के 9 बज़ चुके थे तो भाभी ने मुझे रुकने को कहा, मैंने कहा-मैंयहाँ रुका तो घर पर सभी लोग परेशान होंगें, और डाँट भी पड़ेगी! भाभी ने कहा अगर एसी बात है तो मैं घर पर फोन करके कह देती हूँ की आज तुम यहीं रुकोगे, तब तो कोई परेशान नहीं होगा ! मेरे तो मन मे जैसे मन मे लड्डू फूट रहे थे, तो मैने भी कह दिया जैसा आप ठीक समझें ! मैं अपने ससुराल मे रुका या नहीं आगे की कहानी अगले भाग में !यदी आप कहानीके विषय में अपने बहुमुल्य विचारदेना चाहते हैं

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