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Chudai Ka Rajinama

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Added : 2015-12-08 22:25:10
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हैलो फ्रेंड्स.. मेरा नाम पवन कुमार शर्मा है.. मैं मऊनाथभंजन (उ.प.) का रहने वाला हूँ। मैंने इंजीनियरिंग कंप्लीट कर ली है और इस समय दिल्ली में जॉब कर रहा हूँ।
मैंने अन्तर्वासना की काफ़ी कहानियाँ पढ़ी हैं इसलिए मुझे भी लगा तो मैं भी आज अपनी पहली कहानी शेयर करने जा रहा हूँ।

बात उस समय की है.. जब मैं होली की छुट्टी पर कॉलेज से घर जा रहा था। मैं वाराणसी स्टेशन पर बैठकर ट्रेन का वेट कर रहा था। मेरी ट्रेन 2 घन्टे लेट थी.. तो मैं अपना मोबाइल निकाल कर टाइम पास करने लगा, फिर मैं अन्तर्वासना साइट खोल कर सेक्स की कहानियाँ पढ़ने लगा।

तभी मैंने देखा कि एक बेहद खूबसूरत लड़की मेरे पास आकर खड़ी हुई.. वो कुछ परेशान सी लग रही थी। मैंने नोटिस किया कि वो बार-बार अपना मोबाइल देख रही थी, शायद उसे किसी काम की जल्दी थी।
मैं अपना मोबाइल जेब में डालकर इधर-उधर घूमने लगा।

मैंने देखा कि वो बार-बार मेरी ओर देखती और सर नीचे करके मुस्कुराने लगती। मुझे पता नहीं था कि वो क्यों मुस्कुरा रही है।
फिर मैंने देखा कि वो मेरी पैंट की ज़िप को देखती.. जो कि मेरे कहानी पढ़ने के कारण मेरा लण्ड खड़ा हुआ था। मुझे हल्की-हल्की शर्म आने लगी।

मैं थोड़ी हिम्मत करके उसके पास गया और उससे पूछा- अज़ी टाइम क्या हो रहा है?
तो वो तपाक से बोल पड़ी- जी, हाथ में मोबाइल लिए हो.. और टाइम हमसे पूछ रहे हो?
मैं भी साला आधा पागल सा कुछ सोचते हुए बोला- जी.. वो क्या है कि मेरे मोबाइल में टाइम सैट नहीं है।

तो वो बोली- अच्छा… 6:15 हो रहा है।
मैंने ‘थैंक्स’ बोलकर अपने मोबाइल में झूठमूट का टाइम सैट करने लगा।

तभी एनाउन्समेंट हुआ कि वाराणसी से मऊ जाने वाली ट्रेन और 2 घंटे देरी से आने वाली है।
जिसे सुनकर हम दोनों चौंक पड़े।
तो मैंने पूछा- क्यूँ आपको भी इसी ट्रेन से जाना है क्या?
तो उसने ‘हाँ’ में जवाब दिया।

मेरे पूछने पर उसने बताया- मैं भी आपके ही कॉलेज की हूँ और होली की छुट्टी पर अपने घर जा रही हूँ..
मतलब वो भी मऊ की ही थी।
यह जानकर मैंने कहा- हे भगवान.. तुम मेरे ही कॉलेज की हो.. और आज मुलाकात हो रही है।
नाम पूछने पर उसने बताया- मेरा नाम पूनम है।
तो मैंने उससे कहा- अभी ट्रेन 2 घंटे बाद आएगी.. क्यों ना हम चलकर कुछ खाते हैं।

पहले तो उसने मना किया.. फिर बार-बार कहने पर वो मान गई।
हम दोनों पास की ही एक दुकान पर गए तो मैंने पूछ क्या लोगी.. ठंडा या गरम??

तो वो बोली- गर्मी बहुत है.. ठंडा मँगवा लो।
मैंने समोसे और कोल्ड ड्रिंक मँगवाया.. हम दोनों समोसे खाए और फिर थम्स-अप पीते हुए मैं बोला- आज कुछ तूफ़ानी करते हैं।
वो थोड़ी चौंक कर बोली- क्या?
मैं बोला- कुछ नहीं.. मैं तो ये बोतल पर लिखा है.. वो पढ़ रहा हूँ।
वो मुस्कुरा दी..

फिर हम दोनों वापस प्लॅटफॉर्म पर आ गए और ट्रेन का इन्तजार करने लगे, इस बीच हम दोनों बात करते रहे, लगभग 8:30 बजे हमारी ट्रेन आई तो हम ट्रेन पर चढ़े.. त्योहार का समय होने की वजह से ट्रेन में काफ़ी भीड़ थी।

किसी तरह हम दोनों ने ट्रेन में जगह बनाई, भीड़ अधिक होने के कारण हम दोनों बिल्कुल पास-पास खड़े थे और बात कर रहे थे।
मैंने उससे पूछा- पूनम.. जब तुम स्टेशन पर आई थीं.. तो कुछ परेशान सी लग रही थीं?
तो वो बोली- हाँ.. वो एग्जाम आने वाला है ना.. और ट्रेन भी लेट थी.. तो परेशान हो रही थी..

फिर मैंने पूछा- तो बाद में मुस्कुरा क्यों रही थी?
मेरे इतना कहते ही.. वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी और बोली- कुछ नहीं, बस ऐसे ही..
मैंने थोड़ा सा जगह लेकर उसे बैठाया और खुद उसके आगे खड़ा था और बातें कर रहा था।

मेरी निगाहें उसकी सीने पर बार-बार जा रही थी, गर्मी होने की वजह से उसने दुपट्टा भी नहीं डाला था, मैं बार-बार उसकी चूचियों को देख रहा था और कब मेरा लण्ड खड़ा हो गया.. मुझे पता भी नहीं चला।

तभी आगे स्टेशन पर ट्रेन रुकी और मैं थोड़ा असंतुलित होते हुए उसके ऊपर गिर सा गया। जिससे मेरा लण्ड उसके मुँह से टच हो गया। फिर मैं उठा और मैंने ‘सॉरी’ बोला।
वो बोली- इसमें ‘सॉरी’ वाली क्या बात है। वो तो ट्रेन के रुकने से सभी थोड़ा झटका खा जाते हैं।

फिर स्टेशन पर कुछ लोग उतरे तो मुझे भी जगह मिली.. तो मैं भी पूनम के बगल में बैठ गया.. ट्रेन फिर से चलने लगी..

रात के करीब 10 बज गए थे.. उसे हल्की-हल्की नींद आने लगी.. तो वो मेरे कंधे पर सिर रख कर सोने लगी।
उसे इस हालत में जो भी देखता तो मुझे उसका ब्वॉयफ्रेण्ड समझता।
अगले स्टॉप पर उसकी नींद खुली.. तो थोड़ा हिचकिचाते हुए बोली- सॉरी.. नींद आ गई थी.. तो तुम्हारे कंधे पर ही सो गई।
मैं बोला- तो क्या हुआ.. इसे अपना ही कंधा समझो।
मेरी बात सुनकर मुझे चिपकते हुए अपने आमों को मुझसे रगड़ने लगी और बोली- हाँ.. अब तो मेरा ही है..

मैंने उसके गालों पर प्यार से सहला दिया और एक तरह से हम दोनों के बीच ‘चुदाई का राजीनामा’ हो चुका था बस कुछ और ओपन होने की कसर बाकी थी।

फिर हम अपने स्टेशन पर पहुँचे स्टेशन पर उसके पापा आए हुए थे। जाते-जाते वो अपना मोबाइल नंबर दे गई और मैं अपने घर को चला आया।

तो फ्रेंड्स बस इतना ही.. अब मैं अपने अगले भाग में बताऊँगा कि कैसे मैंने उसे पटाया और अपने कमरे पर लाकर कई बार जबरदस्त चुदाई भी की.. तब तक के लिए बाय..
आप लोगों के ईमेल का इंतजार रहेगा।
pk80720@gmail.com

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