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Kamsin Kunvari Sonu Ki Bur Chudai-2

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Added : 2015-12-11 15:25:05
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करीब दो महीने बाद हमारा प्रोग्राम बना मगर इस दौरान मैं उसे पूरी ट्रेंड कर चुका था, लंड चूसना, चूत चटवानी, चूची चुसवानी, ये सब जब भी मौका मिलता, हम करते।
एक दिन उसने कहा कि उसे मुझसे प्यार हो गया है। मगर मेरे मन में ऐसा कोई भाव नहीं था, मुझे सिर्फ उसकी कच्ची जवानी और अनचुदी चूत से मतलब था, वर्ना अपनी गोरी चिट्टी बीवी छोड़ कर एक काली कलूटी से कौन इश्क़ करता है।

मैंने अपने एक दोस्त के खाली पड़े घर में अपना प्रोग्राम सेट किया, घर किराए के लिए खाली था, मैंने उसे कह दिया कि किसी दिन जुगाड़ फिट करना है।

शनिवार का दिन था, मैं सुबह ही तैयार होकर ऑफिस का बहाना कर के निकल गया। करीब 11 बजे वो मेरे से तय जगह पर मिलने आई।
उसने काली स्लेक्स और गुलाबी सी शर्ट पहन रखी थी, बाल सलीके से बनाए हुये। मैंने उसे अपनी कार में बिठाया और चल पड़े सीधे अपने दोस्त के घर।
घर पहुँच कर मैंने उससे पूछा- कुछ खाओगी?
उसने न में सर हिलाया।
‘पियोगी?’ फिर पूछा तो हाँ में सर हिलाया।
‘क्या पियोगी?’ मैंने पूछा।
‘फेंटा!’ वो बोली।
मैंने फेंटा की एक बड़ी बोतल, कुछा चिप्स वगैरह ला कर दिये उसे।

कमरे में सिर्फ फर्श पे एक गद्दा बिछा था। मैंने उसे बिठाया और फेंटा खोल कर दी, वो बड़े चाव से खाने पीने लगी।
मैंने उसका दुपट्टा उतार दिया और खुद भी अपने कपड़े उतारने लगा, सिर्फ चड्डी छोड़ कर मैं भी गद्दे पे बैठ गया और उसे उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया।

चड्डी में तना हुआ मेरा लंड उसकी पीठ से लगा हुआ था। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों चूचे पकड़ लिए और धीरे धीरे उनसे खेलने लगा।
जब उसने अपनी फेंटा खत्म कर ली तो मैं लेट गया और उसे अपनी कमर पे बैठा लिया, मेरा लंड बिल्कुल उसकी चूत के नीचे था, मैंने उसे भी अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।
हाथ फेरते फेरते मैंने उसकी शर्ट ऊपर उठा दी, और उसकी छोटी सी गाँड को सहला कर देखा। बमुश्किल सौ डेढ़ सौ ग्राम मांस होगा उसके चूतड़ों पर।

एक हाथ मैंने उसकी स्लेक्स में डाल दिया और दूसरे से उसकी शर्ट के अंदर उसकी पीठ सहलाता रहा, अपनी बीच वाली उंगली से मैंने उसकी गाँड के छेद को छूआ तो वो चिहुँक उठी।’ये क्या करते हो?’ वो रोआब से बोली।
मैंने हंस टाल दिया और उंगली नीचे करके उसकी चूत से लगाई और टटोलने लगा। मैंने उसकी चूत के सुराख और दाने को सहलाया, वो आराम से लेटी मज़े लेती रही।

फिर मैंने उसे उठाया और उसकी शर्ट उतारने लगा, उसने भी साथ दिया और अपनी शर्ट उतार दी।
दो लाजवाब चूचियाँ मेरे सामने थी, जैसे दो कटोरियाँ उल्टी करके चिपका दी हों उसके सीने पे!
मैंने अपने हाथों से उन्हें दबा के सहला के देखा। पहले हमेशा डर सा लगा रहता था, मगर आज पूरा इत्मिनान था कि हमें कोई नहीं देखेगा, कोई डिस्टर्ब करने नहीं आएगा।

मैंने उसे अपने ऊपर खींचा और बारी बारी से उसकी दोनों चूचियाँ अपने मुँह में लेकर चूसी, अपनी जीभ से उसके निप्पल सहलाए।
उसके मुँह से आनन्द भरे सीत्कार निकल रहे थे।
आज पहले बार मैंने उसके चूचक बाहर उभरी हुई अवस्था में देखे, शायद मेरे बार बार चूसने से ही बन गए हों।
उसने भी मेरे सर के बालों को मुट्ठियों में पकड़ा हुआ था, और जब भी मेरे चूसने से उसको मज़ा आता वो मेरे सर के बाल थोड़े से खींच देती।

कुछ देर चूचियाँ चूसने के बाद मैंने उसे उठाया और खड़ी करके उसकी स्लेक्स भी उतार दी। आज पहली बार मैंने उसे पूरी तरह से नंगी देखा था।
ऐसा कुछ खास तो नहीं था उसके बदन में, पतली पतली जांघें, छोटा सा पेट, नाज़ुक सी कमर, छोटी छोटी चूचियाँ, जबकि मुझे हर चीज़ बड़े साइज़ में ही पसंद थी।
उसके पास अगर कुछ था तो सिर्फ कुँवारा बदन।

मैंने उसे नीचे सीधा लिटाया और अपनी चड्डी भी उतार दी।
मेरा लंड भी पूरे शवाब पर था।
पहले मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पे रखीं और फिर नीचे झुक कर उसकी चूत से मुँह लगाया।
आज उसकी चूत बिल्कुल फ्रेश थी, सिर्फ अंदर से आने वाली पानी से गीली।
मैंने उसकी चूत के ऊपर से पहले अपनी जीभ फिराई, फिर उसके अंदर तक।

‘आह’ सिर्फ यही निकला उसके मुँह से।
मैंने उसकी कमर अपने हाथों में पकड़ी और ऊपर उठा कर अपने मुँह से लगा ली।
चूत क्या मैं उसकी गाँड को भी चाट गया। मैं कोशिश कर रहा था अगर मेरी जीभ भी उसकी चूत के अंदर घुस जाती, मगर ऐसा हुआ नहीं, पर सोनू का आनन्द के मारे बुरा हाल था।

मेरे चाटने से वो बार बार अपनी कमर को झटके दे रही थी, कभी ऊपर को, कभी दायें को कभी बाएँ को, मैंने भी उसकी तड़प का अंदाज़ा लगा लिया था कि अब यह चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
मैंने उसे नीचे लेटाया और खुद उसके ऊपर लेट गया।
‘सोनू, मेरी जान, अपने यार का लंड अपनी चूत पे रखो!’ मैंने कहा तो उसने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत पर रख लिया।
मैंने ज़ोर लगाया मगर अंदर नहीं गया, शायद ठीक से नहीं रखा था।

मैं उठ कर बैठ गया, उसकी दोनों टाँगें पूरी तरह खोल कर मैंने अपने लंड से ही टटोल कर उसकी चूत का छेद ढूंढा और अपना लंड उसपे टिका दिया।
‘जानेमन, आज तुम्हारा पहली बार है, तुम्हें थोड़ा सा दर्द तो होगा, मगर मुझे पता है तुम बर्दाश्त कर लोगी।’ कह कर मैंने अपने लंड पे ज़ोर डाला और मेरे लंड का टोपा उसकी कुँवारी चू’त को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया।

उसकी तो आँखें बाहर आ गई, बेशक उसने अपनी चीख को अपने मुँह पर हाथ रख कर दबा लिया, मगर दर्द के मारे आँसू उसकी आँखों के दोनों कोरों से बह निकले।’भैया…आह…’ उसके मुँह से बड़े दर्द के साथ निकला।

मुझे उसके दर्द का एहसास था। मगर ऐसे मौके बार बार नहीं आते जब आप किसी कुँवारी कन्या की सील तोड़ते हैं।
और मेरे लिए भी ये न तो संभव था न ही जायज़ था के मैं पीछे हट जाऊँ।
मैंने थोड़ा सा अपना लंड पीछे को किया, उसके चेहरे पे जैसा थोड़ा सा आराम आया हो, और उसके बाद मैं और जोर से वापिस अपना लंड उसकी चूत में ठेल दिया।

‘आह…’ अबकी बार चीख और ऊंची और ज़्यादा दर्द भरी थी।
एक बार मुझे उस पर तरस भी आया, मन में सोचा- छोड़ यार!
मगर मन का शैतान बोला- चूतिये, छोड़ना नहीं, चोदना है, दोबारा ज़िंदगी में यह मौका नहीं मिलेगा!बस यह बात दिमाग में आते ही मैंने फिर से अपना लंड थोड़ा सा पीछे करके दोबारा अंदर धकेल दिया।
‘आ…ह्ह्ह…’ करके चीख उसके मुँह से निकली और वो फूट फूट के रोने लगी।

मैंने नीचे देखा आधे से ज़्यादा लंड मेरा उसकी चूत में घुस चुका था, मैंने सोचा अगर एक दो धक्के और मारूँ तो पूरा लंड अंदर चला जाएगा, उसके बाद बाहर निकाल कर मैं उसे कुछ आराम दे सकता हूँ।
यह सोच कर मैंने फिर से अपना लंड उसकी चूत में घुसेड़ा, एक, दो, तीन, चार बार मैंने अपने पूरे ज़ोर से लंड को उसकी चूत में धकेला।
जब भी मैं लंड को उसकी चूत में धकेलता वो दर्द के मारे अपनी टाँगे भींच लेती, अपनी चूत को कस लेती, जिस वजह से उसकी चूत और टाईट हो जाती, इससे मुझे भी अपने लंड को अंदर धकेलने में दिक्कत होती और उसको भी दर्द ज़्यादा होता।
मगर उसका भी तो पहली बार था, उसे भी यह नहीं पता था कि सेक्स के दौरान लंड को अंदर आने देना चाहिए, रोकना नहीं चाहिए, रोकने से और दर्द होता है।

खैर मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी कुँवारी चूत को फाड़ के अंदर समा चुका था। मैंने देखा, मेरी झांट और उसकी झांट आपस में मिली हुई थी।
मैं अपना लंड अंदर डाल कर रुक गया, बाहर नहीं निकाला।
उसने रोते हुये मेरे सामने हाथ जोड़े- भैया, प्लीज़ निकाल लो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी।
मैंने कहा- पता है जानू, अभी मैं निकाल लेता हूँ, मगर इस काम को पूरा करना है, थोड़ी देर बाद इसे फिर से करना, ठीक है?
कह कर मैंने उसके होंठों को चूमा और अपना लंड धीरे से बाहर निकाल लिया।

मैंने देखा मेरा सारा लंड खून से सराबोर था, इतनी टाईट चूत फाड़ने के बाद मेरे लंड में भी हल्का सा दर्द हो रहा था।
सोनू, मेरी बगल में लेटी रो रही थी- हाय, इतना खून, ये क्या कर दिया भैया आपने, अब मैं घर कैसे जाऊँगी।

मैं उठ कर बाथरूम गया, अपना लंड पानी से धोया और एक मग में पानी ले कर आया, और अपने रुमाल को पानी में भिगो कर उसकी चूत साफ की।
उसको दर्द तो हो रहा था, मगर अब वो रो नहीं रही थी।
मैंने कपड़े पहने और उसे ‘अभी आया 5 मिनट में’ कह कर बाहर आ गया।

पहले अपने एक केमिस्ट दोस्त के पास गया, उसे सारी बात बता कर दवा ली और वापिस आया, वापिस आकर उसे दवा खिलाई। करीब आधे घंटे बाद वो काफी अच्छा महसूस कर रही थी।

मैंने उसे फिर से गरम करने की कोशिश शुरू की। अपने सारे कपड़े उतार दिये, कभी उसके होंठ चूमता, कभी चूचियाँ चूसता, मेरी 5-7 मिनट की मेहनत रंग लाई, वो भी मुझसे लिपटने लगी, मैंने अपने हाथ की उंगली से उसकी चूत का दाना सहलाया और उसे मेरा लंड चूसने को कहा।

थोड़ी से ना नुकर के बाद उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।
मैंने देखा उसकी चूत में अभी भी थोड़ा सा खून लगा था, मगर मेरे सहलाने से उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने लगी, मैं उसकी कमर के आस पास चूमता, अपनी जीभ घुमाता तो वो बहुत कसमसाती।

मौसम बनता देख मैंने उसे लेटाया और उसकी टाँगें चौड़ी की।
वो बोली- भैया क्या फिर से उतना ही दर्द होगा?
मैंने कहा- नहीं अब नहीं होगा, अब तो मज़ा आएगा।
कह कर मैंने अपना तना हुआ फिर से उसकी चूत पे रखा और धीरे से लंड का टोपा अंदर को धकेला।

थोड़ी सी दिक्कत से मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया।
‘देखा, कोई दर्द हुआ?’ मैंने पूछा।
उसने ना में सर हिलाया।
उसके बाद मैंने आराम आराम से करते हुये, अपने पूरा लंड उसकी चूत की गहराई में उतार दिया। मैं बार बार उस से पूछता रहा के दर्द हो रहा था या नहीं मगर असल बात तो उस दर्द निवारक गोली की थी, जो दर्द होने नहीं दे रही थी।
नई मशीन थी, पहली बार चली थी, सो थोड़ा सा वक़्त तो लगता है, मशीन को रवां होने में।

मैंने भी कोई जल्दी नहीं की। वो अब भी अपनी टाँगें भींच रही थी, अपनी चूत के मसल टाईट कर लेटी, इससे मुझे उसकी चूत और भी टाईट लगती थी।
मैंने कहा- अपनी टाँगों का घेरा मेरी कमर के इर्द गिर्द डाल ले!
उसने वैसे ही किया।
मैं बड़े आराम से उसको चूम चाट कर चोद रहा था, मुझे पानी निकालने की कोई जल्दी नहीं थी। मैं तो चाहता था कि कम से कम एक घंटा तो मैं इसकी चुदाई करूँ।

फूल जैसी हल्की थी वो… मैंने उसे चोदते चोदते ही अपने से लिपटा लिया और मैं अपने पाँव पर खड़ा हो गया, उसे दीवार से लगा दिया और एक तरह से उसे हवा में लटका कर चोद रहा था।

फिर मैंने उसे नीचे उतारा और घोड़ी बनने को कहा, वो अपने चारों पाँव पर आ गई।
उसके बाद मैं पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। बिल्कुल छोटी सी गाँड उसकी, और गाँड में छोटा सा छेद।
मैंने उसकी गाँड के छेद पर थूका और अपना एक अंगूठा धीरे धीरे करके उसकी गाँड में डालना शुरू किया मगर उसने मना कर दिया- न भैया, ये मत करो।
मैंने अपना अंगूठा बाहर निकाल लिया और चोदता रहा।

उसकी चूत से निकालने वाले पानी के साथ मेरे लंड पर अब भी उसका थोड़ा सा खून लगा हुआ था। मतलब उसकी चूत की झिल्ली फटी थी, या यूं कहें कि उसकी कौमार्य झिल्ली से अभी भी खून आ रहा था। मगर अब वो आराम से मेरा पूरा लंड ले रही थी।

मैं उसे हर अंदाज़ में चोद लेना चाहता था, इसलिए मैंने उसे उल्टा लेटा दिया खुद उसके ऊपर लेट गया और अपना लंड उसकी चूत में डाला।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसे अपने ऊपर कर लिया, मैं नीचे लेट गया और उसे कहा कि वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर खुद चुदाई करे।
उसने वैसा किया मगर इस स्टाईल में उसे दर्द हो रहा था तो मैंने उसे फिर से नीचे लेटा कर खुद ऊपर आ गया।

इसी तरह खेल तमाशे करते करते करीब एक घंटा बीत गया, मैंने अपना माल नहीं झड़ने दिया। इतनी लंबी चुदाई के बाद पता नहीं उसका हुआ या नहीं मगर उसकी चूत भी सूख चुकी थी, जिस वजह से मुझे बार बार थूक लगाना पड़ता था।

जब मैं उसके साथ सारे तौर तरीके आज़मा चुका तो मैंने सोचा, अब पानी निकाल देना चाहिए।
यह सोच कर मैंने उसकी दमदार, ताबड़तोड़ चुदाई शुरू की। उसको मज़ा आया, वो भी खुद ऊपर उठ उठ कर बार बार मेरे होंठ चूम रही थी, चूत ने फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया और वो एकदम से नीचे को गिरी ‘आह… आह… आ… ‘ कई बार उसके मुँह से निकला। मतलब वो स्खलित हो चुकी थी।

मुझे बड़ी खुशी हुई। मन में सोचा, वह यार मज़ा आ गया, एक कुँवारी लड़की की सील तोड़ी और उसे स्खलित भी किया, बहुत सालों बाद ऐसा आनन्द, ऐसी खुशी ऐसी संतुष्टि मन को मिली।
बस फिर तो मैंने भी ज़्यादा टाइम नहीं लगाया और 2 मिनट बाद ही एकदम से अपना लंड बाहर निकाला और उसके पेट और चूचियों पे अपना सारा माल झाड़ दिया।
‘ईईए, ये क्या है?’ उसने पूछा।
‘जानेमन इसी से बच्चा पैदा होता है, अगर ये तेरे अंदर छुड़वा देता तो तू गर्भवती हो जाती!’ मैंने उसे बताया।
‘सच में?’ उसने बड़ी हैरानी से पूछा।
‘हाँ…’ कह कर मैं साइड पे लुढ़क गया।
कितनी देर मैं लेटा अपनी इस खुशी का आनंद लेता रहा।

फिर थोड़ी देर बाद मैं उठा बाथरूम में गया और अपना लंड धो कर आया। वो भी मेरे पीछे पीछे बाथरूम में आ गई, जब वो नहाने लगी, तो मैं भी उसके साथ ही नहाया।
मैंने उसके बदन पे और उसने मेरे बदन पे साबुन लगा कर एक दूसरे को नहलाया। जब वो मेरे लंड पे साबुन लगा रही थी तो उसने अपने हाथों में पकड़ के कई बार मेरे लंड को चूमा।
मैंने पूछा- बहुत प्यार आ रहा है इस पे?
वो बोली- ये है ही बहुत प्यारा।

मैंने उसे खड़ा किया और उसके होंठों पे एक भरपूर चुंबन दिया।
नहा कर हम दोनों नंगे ही बाहर आ गए। कुछ देर बैठे रहे, जो फेंटा और चिप्स बचे पड़े थे वो खाये और फिर कपड़े पहन कर वापिस आ गए।

रास्ते में मैंने सोनू से पूछा- सोनू, अब फिर कब?
वो बोली- जब आप कहें?
मैंने कहा- तो ठीक है, अभी एक दो दिन तुम यह दवा खाओ, जब सब बिल्कुल ठीक हो जाएगा, तब हम फिर से मिलेंगे।
‘ठीक है’ वो बोली।
‘जानती हो आज हमने जो किया, उसे क्या कहते हैं?’ मैंने पूछा।
‘क्या कहते हैं?’ उसने बड़े भोलेपन से पूछा।
‘सेक्स, चुदाई, आज तुम चुद गई, अब तुम कुँवारी नहीं रही, सुहागरात को भी यही सब होता है।’

सुहागरात का नाम सुन कर वो मुस्कुरा दी और मैंने कार घर की तरफ घूमा दी।
alberto62lopez@yahoo.in

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