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Angrej Kanya Ki Madmast Gand Aur Chut Chudai- Part 1

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Added : 2015-12-30 01:29:47
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ऐसे ही मुझे एक बार अंग्रेज कन्या को चोदने का मौका मिला! वह कैसे..
इस कहानी के जरिये आपके समक्ष प्रस्तुत है।

हमारे शहर से 110 किलोमीटर की दूरी पर खजुराहो नाम का एक विश्व प्रसिद्ध स्थान है। यहाँ चंदेल कालीन राजाओं द्वारा बनाये गए भव्य मन्दिर हैं जिनमें पत्थर पर सम्भोग करते हुए महिलाओं और पुरुषों के चित्र बनाए गए हैं। इन्हें देखने कई विदेशी यहाँ आते हैं और देखते हैं और सम्भोगरत चित्रों का आनन्द उठाते हैं।
मेरा खजुराहो आना-जाना लगा रहता है।

ऐसे ही कुछ दिनों पहले मैं बस द्वारा काम से खजुराहो जा रहा था.. तो मेरी बगल वाली सीट पर एक अंग्रेज कन्या आकर बैठ गई। वह अकेली ही इंगलैंड से घूमने यहाँ आई थी, उसका नाम एडलिना थॉमस था।
मैंने उससे पूछ लिया- कहाँ जा रही हो?
तो उसने कहा- मुझे खजुराहो जाना है।
मैंने उससे पूछा- क्या आप अकेली हैं?
तो उसने ‘हाँ’ कहा।

बस में वह मुझसे खजुराहो की जानकारी लेती रही और बाद में उसने मुझे अपने साथ खजुराहो घुमाने की बात कही। मैंने भी तुरंत ‘हाँ’ कह दी।

रास्ते भर हम दोनों बात करते रहे और बीच-बीच में मैं अपना हाथ उसकी जाँघों पर चलाता रहा.. पर उसने कोई प्रतिकार नहीं किया और वह मुस्करा देती थी। मैं समझ गया कि आज विदेशी माल का मजा मिलने वाला है। उसके चूचे बड़े-बड़े और टाइट थे। मैं उसके चूचों को दबाना चाहता था.. पर बस में भीड़ होने के कारण कुछ नहीं कर पा रहा था।

तभी वह अपना हाथ मेरी पैन्ट के ऊपर हाथ चलाने लगी.. तो मेरा लण्ड टनटना गया.. जिससे मेरी हालत खराब होने लगी थी। किसी तरह मैं अपने को सम्भाल रहा था। क्योंकि लोकल का मामला था.. काफी लोग जान-पहचान के बैठे थे। खैर.. किसी तरह खजुराहो पहुँचे।

खजुराहो पहुँच कर उसने एक होटल बुक किया और हम लोग कमरे में पहुँचे, पीछे-पीछे वेटर हमारा सामान लेकर आया।
उसने काफी के लिए आर्डर दिया.. तो वेटर आर्डर लेकर चला गया।

मेरी हालत बस से ही खराब थी और लण्ड अपने पूरे तनाव पर था। जिस वजह से लण्ड से लण्ड रस निकलने के कारण अंडरवियर गीली हो चुकी थी, मैं उसको जल्दी से चोदकर अपनी गर्मी शांत करना चाहता था।
मैंने वेटर के जाने के बाद तुरंत दरवाजा बंद कर उसको अपनी बाँहों में लेकर किस करने लगा। तभी एडलिना बोली- अभी नहीं.. घूम कर आते हैं फिर मजे लेंगे।

थोड़ी देर में वेटर कॉफ़ी देकर चला गया और हम कॉफ़ी पीकर मंदिर घूमने चले गए।

मैं उसे मन्दिरों के ऊपर बने हुए सम्भोग करती हुई मूर्तियां दिखा रहा था। मूर्तियों को देखते हुए उत्तेजना से उसका चेहरा लाल हो रहा था और नाक से गर्म-गर्म श्वास ले रही थी। बीच-बीच में अपने हाथ से चूचों को भी दबा लेती थी और कभी-कभी अपनी मिडी के ऊपर से ही अपनी चूत को भी सहला रही थी। वह मूर्तियों को देखते-देखते बहुत उत्तेजित हो चुकी थी।

मैंने उससे पूछा- कैसी लगीं?
तो वह बोली- नाइस.. वंडरफुल एंड वैरी सेक्सी.. अब हम होटल चलते हैं।
रास्ते में उसने स्कॉच की बोतल खरीद ली और हम वापिस होटल आ गए।

होटल में वेटर को लंच का आर्डर देकर वह बाथरूम नहाने जाने लगी.. तो मैं बोला- दरवाजा बंद नहीं करना.. मैं तुझे नहाते हुए देखना चाहता हूँ.. एनी प्रॉब्लम?
‘राइट.. नो प्रॉब्लम..’ कहकर कमरे में ही कपड़े उतार कर नंगी हो कर बाथरूम में नहाने लगी। मैं उसको देख रहा था.. वह अपने चूचों को दबा-दबा का साफ कर रही थी और चूत में उंगली डाल कर साफ कर रही थी। उसको नहाते हुए देख कर मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया।

तभी वह मुझे साथ में नहाने के लिए बोली। मैंने भी अपने कपड़े निकाल कर अन्दर आ गया। तभी डोरबेल बजी तो मैं तुरंत बाहर आ गया।

मैंने कपड़े पहन कर दरवाजा खोला। वेटर लंच लेकर आया था। तब तक वो भी नहाकर बाहर आ गई थी और कपड़े पहनने लगी। मैंने तुरंत उसको पीछे से पकड़ लिया। उसको पकड़ कर अपनी बाँहों में ले लिया और उसके चूचों को दबाते हुए गालों, कान के नीचे, गर्दन पर चूमने लगा। मेरा लण्ड पहले से ही टन्ना रहा था.. जिस कारण मेरा लण्ड उसकी गाण्ड के उभारों के बीच फंस गया था।

अब वह मुँह से ‘सीइइ.. आआ.. ओह.. गॉड..’ कहकर एक हाथ से लण्ड सहलाने लगी और उसने पीछे मुड़कर मेरी पैन्ट और अंडरवियर को निकाल दिया।

अब हम दोनों एकदम नंगे थे.. तभी उसने मेरा लण्ड नीचे बैठ कर चूसना चालू किया। पांच-दस मिनट चूसते हुए मेरे लण्ड ने उसके मुँह में ही पानी छोड़ दिया.. जिसे वह पूरा अपने हलक में गटक गई।

एडलिना को भूख लगी हुई थी। उसने कहा- अभी भूख लगी है.. खाना खाने के बाद फिर करेंगे।
मैंने भी ‘हाँ’ कर दी।

एडलिना ने स्कॉच की बोतल खोल कर दो पैग बनाए और हम दोनों शराब पीते हुए खाना खाने लगे। बीच-बीच में हम लोग शरारत भी करते जाते थे। कभी वो मेरे लण्ड को टेबल के नीचे से अपने पैरों से पकड़ कर खींचती.. कभी मैं अपने पैर का अंगूठा उसकी चूत में डाल देता और दाने को दबा देता, अब फिर से वह गरम हो गई थी।

खाना खा लेने के बाद मैंने उसको उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और स्कॉच को उसके चूचों पर डाल कर चूचों को पीने लगा। कुछ देर बोबे पीने के बाद धीरे-धीरे मैं उसकी चूत के पास पहुँच कर उसकी चूत को स्कॉच से भरकर पीने लगा। मैं जीभ से दाने को रगड़ रहा था.. जिस कारण वह अपने कूल्हों को ऊपर-नीचे करते हुए अपनी चूत चटवा रही थी।

एडलिना ने इशारे से लण्ड को मुँह में डालने के लिए कहा। अब 69 की पोजिशन में होकर मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया। वो मेरा पूरा लण्ड चूस रही थी। जब वो मेरे लण्ड के टोपे को जीभ से चाटती.. तब मेरे बॉडी में एक अलग प्रकार की झनझनाहट होती.. जिसका वर्णन नहीं कर सकता।
लण्ड चुसाते-चुसाते कब मेरा पानी निकल गया मुझे पता ही नहीं चला, मेरा सारा रस पीने के बाद उसने मेरे लण्ड को साफ़ किया।

इसके बाद हम दोनों ने फिर से स्कॉच पी। कुछ देर बाद वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेकर सहलाते हुए लण्ड के चमड़े को ऊपर-नीचे करने लगी, मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
अब की बार एडलिना ने अपनी बैग से एक बोतल निकाल कर मेरे लण्ड पर स्प्रे किया.. यह बड़ा ठंडा था।
मैंने पूछा- ये क्या है?
तो वो बोली- इससे तेरा जल्दी नहीं होगा.. वक्त लगेगा। अब डालो.. जल्दी डालो.. और मुझे चोदो.. अब आ भी जाओ.. फक मी.. माई डार्लिंग।

मैंने भी लण्ड उसकी चूत के मुँह पर लगाकर एक झटके में लण्ड अन्दर कर दिया।
तभी एडलिना बड़े जोर से चिल्ला पड़ी- उईईई.. आह्ह.. उम्म्म्म्म्.. ओहह.. गॉड स्लोली.. स्लोली..
मैं धक्के देता रहा।

कुछ देर बाद एडलिना भी अपने चूतड़ उचका-उचका कर चुदाई के मजे लेने लगी- आआआअह.. और करो.. फक मी.. डार्लिंग.. फाड़ दो.. आआआआह मजा आ रहा है।
वो मेरे कानों को भी बीच-बीच में अपने दांतो से काटती जा रही थी- आअह.. चोदो मेरे राजा.. करते जाआओ.. रूउको नहीं.. ह्म्म्म्म्.. ओईई..इस्स्स्स..

तभी उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और अपनी जांघों को जोर से चिपका लिया। मैं समझ गया कि इसका हो गया है.. पर स्प्रे के कारण मेरा नहीं हो रहा था।
मैंने उसको डॉगी पोजिशन में बनने के लिए कहा.. तो वो बन गई, अब मैं पीछे से उसको चोद रहा था।

कुछ देर बाद एडलिना ने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी गाण्ड पर लगाया। मैं समझ गया कि यह गोरी गाण्ड भी मरवाना चाहती है.. तब मैंने क्रीम उसकी गाण्ड के छेद पर लगाकर अपनी उंगली उसकी गाण्ड में डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा।
अब मैंने लण्ड उसके छेद पर लगाते ही एक झटका लगा दिया.. जिससे लण्ड ‘ठप्प’ से अन्दर चला गया।

‘आआ.. आहह..’ वो जोर से चीखी और अपने हाथों से मुझे पीछे को धकेलने लगी।
मैंने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर दूसरे हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया, उसकी आँखों से पानी निकल आया था।
मैंने एक तगड़ा झटका मार दिया.. जिस कारण वह गिर गई इसी के साथ मेरा भी संतुलन बिगड़ जाने के कारण मैं उसके ऊपर गिर गया.. जिस कारण एकदम से मेरा पूरा लण्ड उसके अन्दर घुस गया था।

उसे दर्द हो रहा था.. मैं भी कुछ देर रुका रहा। उसके सामान्य होने पर मैंने धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरू किया। कुछ देर में वह अपने चूतड़ों को उठा-उठा कर लण्ड अपनी गाण्ड में लेने लगी।
दस मिनट करने के बाद उसने मुझे नीचे से धक्का देकर मुझे नीचे करते हुए वो मेरे ऊपर आ गई। अब वो मेरे ऊपर बैठ कर लण्ड को अपनी गाण्ड के अन्दर करके उठक-बैठक करने लगी। मैं उसके चूचों को दबाता जा रहा था और वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूस रही थी।

इस पोजिशन में दोनों को मजा आ रहा था। अब मैं भी अपनी उंगली से उसकी चूत की चुदाई करता जा रहा था। दस मिनट बाद हम दोनों एक साथ फुर्सत हुए और हम दोनों उसी पोजिशन में एक डेढ़ घंटे लेटे रहे।
इसके बाद उसने उठकर मेरे सूखे हुए लण्ड को चाटकर साफ़ किया और हम दोनों साथ में बाथरूम चले गए।

मैंने उसकी चूत को साफ़ किया और उसने मेरे लण्ड को साफ किया। बाहर आकर हम दोनों ने कपड़े पहने और वेटर को कॉफी का आर्डर दिया। कॉफी पीने के बाद हम लोग फिर से घूमने निकल गए और रात होने तक उसको सारे मन्दिर, म्यूज़ियम, मार्किट आदि दिखाता रहा। रात को लाइट एंड साउंड प्रोग्राम देखते देखते वहीं पर वह मेरे लण्ड को चूसना चाहती थी.. पर मैंने मना कर दिया और उससे कहा- ये इंडिया है.. तुम्हारा इंगलैंड नहीं..
तब वह मानी।

लौट कर होटल आने के बाद जितने आसन उन मूर्तियों द्वारा दिखाए गए थे.. उन सब आसनों में उसने चुदवाया।

कहानी के अगले भाग में एक बार तो उसने अपने साथ लाए हुए डिल्डो से मेरी गाण्ड भी मारी और मैंने उसका डिल्डो अपने लण्ड के ऊपर बांध कर उसकी चूत और गाण्ड दोनों को एक साथ चोदा।
वो कैसे हुआ, यह बात कहानी के अगले हिस्से में आगे जारी रहेगी।

यह कहानी आपको कैसी लगी.. मुझे ईमेल जरूर करें। आपके उत्तर की प्रतीक्षा मैं आपका राकेश शर्मा।
rksharma7732@gmail.com

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