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lift dene ke baad

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Added : 2015-08-10 10:00:00
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निलहेलो दोस्तो, मेरा नाम नील है, मैंपुणे का रहने वाला हूँ।मैं आपको अपने यौन जीवन केबारे में बताने जा रहा हूँ।यह कहानी लगभग चार सालपुरानी हैं जब मैं एक लेडीज़हॉस्टिल के एरिया में रहता था।वहाँ पर बहुतसी लड़कियाँ थी। मैं हमेशा किसीचूतको ढूंढता रहता था पर मैं दिखने मेंइतना खासनहीं था तो कोई लड़की मुझे घासनहीं डालती थी।एक रात मैं अपने जॉब से बहुतलेट आ रहा था, करीब रातके साढ़
े बारह बजे होंगे, एकलड़की ने मुझे लिफ्ट के लिएइशारा किया। वैसे मैं रात कोकिसी को भी लिफ्टनहीं देता था पर एक सुनसानरास्ते पर एकलड़की को खड़े देख उसे लिफ्टदेने का विचार आया और मैंमुड़ कर वापस उसके पास गया।मैंने पूछा- कहाँ जाना है?उसने उसके जगह का नामबताया तो मैंने कहा- मेरे घर केबाजू में ही है।उसने सलवार-सूट पहना था तोवो दोनों साइड पैर रख करबैठ गई। रास्ते में हम इधर उधरकी बातें कर¤
े लगेतो पता चला कि वो एक प्रायवेटकंपनी में काम करती हैऔर तलाक़शुदा है। थोड़ी ही देर मेंहम उसके घर के पासआ गये। उतरने के बाद उसने मुझेथैंक्स कहा और चाय केलिए ऑफर किया, कोई चूतिया हीरहेगा जो ऐसे ऑफरठुकराए।वो अकेली रहती थी, जब हम अंदरआए तो उसने पूछा- तेरेपास टाइम है ना?मैंने कहा- हाँ, कल छुट्टी है तो कोईजल्दी नहीं है।फिर वो अंदर गई और चाय बनालाई। चाय पीते पीते हमएक दूसरे की जिन्दगी कà
‡ बारे मेंबहुत कुछ जान गये थे औरमैं उसकी तरफ आकर्षित हुए जारहा था, मेरी नज़रेंउसको उपर से नीचे तक टटोलरही थी। मेरा यह सलूकउसने देख और समझ लिया था।वो बोली- नील, मैं ज़रा चेंज करकेआती हूँ।वो अंदर चली गई और मैं उसकोचोदने की सोच में डूबा रहगया। जब वो वापस बाहर आई तोकयामत ढा रही थी,उसने गुलाबी नाइट सूट पहना था,मेरे तो होश ही उड़ गये।मेरा हाल देखकर वो बोली- क्याहुआ नील?"कुछ नहीं ! तुम्हें ¤
ेखकर थोड़ाबहक गया !"मेरा सीधा जवाब देने से वो सिर्फ़मुस्कुराई और बोली-कुछ करने का इरादा मत बनाओ,कुछ नहीं कर पाओगे।मैंने कहा- इरादा तो नहीं, अगरइजाज़त मिल जाएतो कुछ भी हो सकता है।"सही में तुम कुछ भी कर सकतेहो?"मैंने कहा- हाँ !वो फिर से मुस्कुराई और एकटकमुझे देखने लगी,मेरी आँखों में पहले से ही वासनाभरी पड़ी थी,उसको देखकर और भी बढ़ गईथी। पर वो मुझसे इज़हारनहीं कर पाई, अपने आप कोरोकते हà
ए बोली- मैं वॉशरूमहोकर आती हूँ।मैं पहले ही उससे बात करके जानचुका था कि यह पिछलेदो साल से चुदाई की भूखी है।बाथरूम में घुसने के बाद उसनेदरवाजा पूरा बन्दनहीं किया, मैं उसको बाहर सेदेखने लग गया। वो एक एककरके अपने सारे कपड़े उतारनेलगी और पूरी नंगी हो गई।उसके चुचे इतने बड़े नहीं थे परमस्त और प्यारे थे।उसकी चूत भी दिखी मुझे, एकदमसाफ़ थी और एक बालभी नहीं था उसकी चूत केआसपास !वो पूरी नंà
ी होकर बैठ कर मूतनेलगी और इधर मैंनेअपना लण्ड निकाल कर हिलानाशुरू कर दिया। मूतने केबाद उसने अपनी चूत साबुन लगाकर खूब अच्छे से धोई,तब तक मैं झड़ चुका था तो मैंजाकर टीवी देखने लगा औरथोड़ी देर के बाद वो भी गाउनपहन कर आ गई। गाउनबहुत झीना था, हल्का फुल्का अंदरका दिख रहा था।उसने नीचे कच्छी, ब्रेजियर कुछनहीं पहना था।वो आकर मेरे सामने बैठ गई औरमैं उसे देख रहा था औरदेखते देखते मेरा फिर सà
‡ खड़ा होगया। वो उठ कर मेरे पासआकर बैठ गई और बोली- नील,तुम्हें पता है जब तुम मुझेवाशरूम में पेशाब करते हुए देखरहे थे तब मैं भी तुम्हें देखरही थी, तिरछी नजर से ! इतनासुनते ही एक पल के लिएमेरी फट गई कि साला यह क्या होगया, पर उसके बादजो हुआ तब मेरी गांड में जान आगई। उसने मेरेदोनों हाथों को पकड़ कर अपनेमम्मो पे रख दिया, मुझेपहले कुछ समझ नहीं आया परफिर मैं उन्हें दबाने लगगया और वो सोफे पर प
ीछे सररख कर बैठ गई।नमिता भी अब मुझसे अपने अंगोंको मसलवा कर मज़ेलेना चाहती थी, उसने अपने होंठआगे बढ़ा दिए और मैंउसके होंठों को चूसते उसकेगाउन को उतार करचुचों चूसने लगा। उसकों चुचों कोदबाने परवो भी मस्ती दिखाती हुई मेरे लंडको सहलाने लगी। अबमैं उसकी चूत की फांकों में अपनीउँगलियों से उसकी चूतके अंदर देते हुए आगे–पीछे करनेलगा और वो भी मेरे लंडको निकालकर अपने हाथ मेंमसल रही थी। मà
ं भी अबज़बरदस्त मूड में आ गया तो मैंनेउस सोफे पर पूरा लिटातेहुए अपने लंड को उसकी चिकनीचूत में अंदर दे दिया जिससेउसकी वासना भरी सीत्कारनिकल पड़ी, उसकी चूत बहुतही कसी हुई थी।लंड क़रीब तीन इंच तक अन्दरचला गया था, फिर धीरे-धीरे मेरा पूरा छः इंच का लण्डउसकी चूत मेंचला गया और मैं पूरी ताक़त सेधक्का लगाया तो वहकहने लगी- प्लीज़ ! दर्द हो रहा है।फिर मैंने उसके एक निप्पल कोमुँह में भर लिय
ा और दूसरेको हाथ से दबाता रहा।वो अब कराह रही थी, मुझसे छुटनेकी कोशिश कररही थी पर मैंने कस कर पकड़रखाtttt था उसे ! वो आआ आईईई ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्हकरके रोने लग गई पर मैंरुका नहीं और लगातार धक्केमारता गया, साथही चूचियों को भी दबाता जा रहाथा।तभी वह चिल्ला उठी- आआहहह... मैं गई... और तेज़करो...पर मैं अब ख़ुद पर नियंत्रण पाचुका था और लगातार चोदेजा रहा था।थोड़ी देर के बाद वह कहने लगीं-अब मुझे छोड़ à
ो, जलनहो रही है, मैं दो बार छूट चुकी हूँ।मैंने कहा- पर अभी मेरा तो नहींहुआ है।फिर मैंने उसे लगातार दस मिनटऔर चोदा और उसके अंदरही झड़ गया। अगले दस मिनट मैंउसके ऊपर ही लेटा रहा।मैं उठा तो बोली- क्या हुआ, कहाँजा रहे हो?"कुछ नहीं, कहीं नहीं जा रहा !"मैंने हँस कर जवाब दिया।उसके चेहरे पे बहुत खुशी झलकरही थी- तुमने आज मुझेबहुत दिनों के बाद ढेर सारा सुखदिया है, थॅंक्स आ लॉट !मैं कुछ नहीं बोला, ¤
सके होठों परहोंठ रख दिए औरउसको बाहों में लेके वहीं पर सोगया।हम एक साल तक साथ में रहे,बाद में उसके पिताजी नेउसकी शादी कहीं करवा दी औरवो मुझे छोड़ करचली गई।मेरी कहानी के बारे में अपनी रायबताने के लिए मुझे मेलकरें

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