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Majedar Sex Photocopy Center vali ke sath

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Added : 2016-02-03 23:34:15
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मैंने काफी लोगों की कहानियाँ पढ़ी हैं, पर उनके जैसे न तो मैंने किसी लड़की को ब्ल्यू फ़िल्म दिखाई, न ही बिजली कड़की कि वो मेरी बाहों में आये।
मुझे किसी तरह का आडम्बर करना या झूठा समां बाँधना नहीं आता, इसलिए हो सकता है कुछ लोगो को मेरी कहानियाँ इतनी सेक्सुअल न लगें। मेरी कहानी सामान्य और 100% सत्य है, मेरे अब तक के जीवन काल में कई बार शारीरिक सम्बन्ध लड़कियों के साथ बने हैं, एक एक कर के मैं आप लोगो के सामने प्रस्तुत करता रहूँगा।

मैं सामान्य और फिट शरीर वाला 6 फ़ीट हाइट का लड़का हूँ, भिलाई, छत्तीसगढ़ में रहता हूँ, यहीं मेरी नौकरी भी है।

यह कहानी उस समय की है जब मैं चौथे सेमेस्टर BE में था, हमारे रूम से कुछ दूर एक फोटोकॉपी और स्टेशनरी सेंटर था। वहाँ एक खूबसूरत नैन नक्श वाली 22-23 साल की लड़की मधु काम करती थी, हालांकि वो इतनी गोरी नहीं थी पर वो गदराये और गठीली बदन वाली लड़की थी, जिस पर कोई भी फ़िदा हो जाये। उसका फिगर 34D-26-36 के करीब था।
कई लड़कों की तरह मैं भी काफी दिनों से उसको पटाने में लगा था।

गर्मियों का समय था, मुझे एग्जाम के समय नोट्स कॉपी करने के लिए बहुत बार उससे बात करने का मौका मिला।
बस इसका फायदा उठा के मैंने ‘मधु’ को अपना मोबाइल नंबर दे दिया, पर उसका फ़ोन ही नहीं आया करीब 2-3 हफ्ते, बीच में मैंने कई बार उससे बात की मिलने के लिए या फ़ोन के लिए कहा।
पर हर बार वो पूछती ‘क्यों मिलना है?’
मैं कहता ‘प्यार करने के लिए!’

मेरी मेहनत तब रंग लाई जब मेरे आखिरी पेपर के गैप पर उसका फ़ोन आया कि अगले दिन सुबह दस बजे वो मिलेगी मेरे रूम पर।

मैं सुबह जल्दी उठ गया, रूम की अच्छे से साफ़ सफाई कर दी, दोस्त के रूम से एक्स्ट्रा गद्दा लाकर जमीन पर बिछा दिया। मेडिकल की दुकान से KS का डॉटेड कंडोम ले आया।
यह मेरा पहला मौका नहीं था फिर भी कोई चांस नहीं लेना चाहता था, मैंने नहाते वक़्त मुठ मार लिया, ताकि सेक्स के समय को लम्बा खीच सकूँ।

अच्छे से भर पेट नाश्ता करने के बाद उसका बेसब्री से इंतज़ार करने लगा।
समय कट नहीं रहा था, घड़ी में दस बज चुके थे, उसका फ़ोन 15-20 मिनट बाद आया कि वो रूम पास वाले चौक पर है, लेने आओ! मैं तुरंत ही पैशन ले के गया और उसको ले आया रूम पर!

मधु कसी हुई फिट सलवार सूट में आई थी, उसका गदराया बदन उभर कर दिख रहा था।
रूम देखते ही उसने कहा- रूम देख कर लगता नहीं कि इतना साफ़ रहता होगा, और यह गद्दा ज़मीन पर बीच में क्यों बिछाया है, इरादा क्या है?
मैंने कहा- इतनी मेहनत तुम्हे पाने के लिए की है, अब तरसाओ ना!
और मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया, उसने भी मुझे कस लिया और बोली- मैं जानती हूँ तुम क्या चाहते हो, न तो तुम्हें मुझसे और मुझे तुमसे प्यार है पर पता नहीं क्यों मिलने के लिए खुद को रोक नहीं पाई।

मैंने कहा- जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है।
और उसे चूमने लगा माथे पर, आँख और गालों पर, कान के पीछे…
वो सिहर उठी, अपनी पकड़ को उसने और कस लिया।

मैं समझ गया कि कान के पीछे मधु का ‘वीक स्पॉट’ है, और थोड़ा ज्यादा समय कान के पीछे और गले पर चूमने लगा।
अब वो गर्म हो रही थी और मेरा साथ देने लगी और मेरे होठों को चूमने लगी। उसके रसीले गुलाबी होंठों को चूमते हुए उसे ज़मीन पर बिछे गद्दे पर बिठा दिया।
फिर मैंने अपना टी शर्ट निकला और उसके रसीले होठों का रस पीने लगा। फिर उसे लेटा कर अपनी उंगलियों से उसे हल्के हल्के छूने लगा।

मधु के चेहरे से छूना शुरु किया, गाल, होंठ, फिर नीचे गर्दन, कान के पास, उसका कन्धा, धीरे धीरे हल्के हाथों से छू रहा था।
मधु आँखें बंद कर के होठों को दाँत भींचते हुए एन्जॉय कर रही थी।
मेरे हाथ कपड़ों के ऊपर से मधु के मस्त उभारों को छू रहे थे, चूचुक धीरे धीरे आकार ले रहे थे, जिसका आकार स्पष्ट दिख रहा था।
इसी तरह सहलाते हुए मैंने उसके कपड़ों के अंदर हाथ डाल कर पेट पर स्पर्श करने लगा, नाभि के आस पास गोल गोल सहलाया।

और जैसे ही मैं नीचे जाने वाला था, मधु ने मुझे अपनी ओर खींच कर चूमना शुरु कर दिया।उसके रसीले होंठो को चूसते हुए मैंने कहा- कपड़े उतार लो पूरे!
मधु ने जल्द ही सब कपड़े निकाल लिए और मैंने भी।
हम दोनों पूरी तरह नग्न थे।

वो नज़ारा मैं देखता ही रह गया, मधु के मम्मे बहुत बड़े और कसे हुए थेम चूचु एकदम टाइट हो गए थे, वो पैर पर पैर कर बिस्तर पर बैठी थी, मधु ने चूत के बाल साफ किये हुए थे।
मैं झट से उस पर कूद कर चोदना चाहता था, पर मेरी शुरु से आदत रही कि सेक्स जान पहचान या अनजान किसी भी लड़की से किया, हमेशा आराम से एन्जॉय करते हुए किया।
मधु को बिस्तर पर लेटा कर मैं भी उसके बगल में लेट गया।

मैं मधु के होंठों से होंठ मिला कर चूमने करने लगा और वो भी किस करने लगी, हमने फ्रेंच किस करना शुरु कर दिया, एक दूजे की जीभ चूसने लगे और बहुत देर तक चूमते रहे।
साथ ही मैं अपने सीधे हाथ से बड़े बड़े मम्मो को दबाने और मसलने लगा।

मेरा पैर उसकी जांघों पर था, मधु की त्वचा बहुत ही मुलायम, कोमल रेशम जैसी थी।
मधु सिसकारियाँ भरने लगी ‘म्म्म्म म्म्म्म मम्म मम्म…’ उसका बायां हाथ मेरे लंड को खोजने लगा।
मेरा लंड भी मधु के स्पर्श के लिए तड़प रहा था, वो मधु की पकड़ में आ गया था और वो धीरे धीरे सहलाने भी लगी।
इतने बड़े मम्मों से दूर मुझे रहा नहीं जा रहा था, इसलिए अब मैं सीधा उन पर टूट पड़ा, दोनों हाथों से मम्मों को दबा कर चूमने और चूची चूसने लगा।

मम्मे बहुत बड़े थे, हाथों में समाना मुश्किल था उनका।
अब मधु आवाज़ के साथ सिसकारियाँ भरने लगी- आआह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह… म्म्म्म्म हम्म्म…
और अपने कूल्हे को मटकाने लगी।

कभी दोबारा ऐसा मौका मधु के साथ मिले या नहीं, यह सोच कर बस उसके मम्मों को चूमने चाटने लगा, चूचुकों को चूसने और काटने लगा।
वो कराहने लगी- उउउईए.. ह्ह्ह्ह्म्म्म्म आआह्ह्ह!

अब मैं उसके पेट को चूमने लगा, नाभि और आस पास जीभ गोल गोल घुमाने लगा।
फिर मैंने उसको कहा- 69 की अवस्था में तुम्हारी रसीली चूत को चाटने का मजा लेना चाहता हूँ!
मधु तैयार हो गई।
मैं बिस्तर पर लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गई!

उफ्फ्फ… क्या नज़ारा था, बड़ी गांड और मस्त गीली चूत मेरे मुँह के सामने थी।
मधु ने तुरंत ही मेरा लंड मुह में लिया और वो उसे मजे से चूसने लगी, मैं भी बिना देरी किये मधु के चूत के दाने को चाटने लगा। बहुत ही मस्त स्वाद था उसकी गीली चूत का… मैं उसकी चूत को मजे से चाटे जा रहा था।
मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी, मज़े से अंदर बाहर करने लगा और अँगूठे से चूत के दाने को सहलाने लगा।
मधु मज़े ले ले कर मेरे लंड को लॉलीपॉप तरह चूस रही थी।
छोटे पप्पू से उसने उसे सात इन्च का दानव बना दिया।

वो बहुत ही उत्तेजित हो गयी थी, मेरे लंड को चूसते हुए उसने लंड में अपने दाँत गड़ा दिए।
मधु एक बार झड़ गई, पानी बाहर बहने लगा, मैंने सारा पानी चाट लिया, बहुत ही मस्त नमकीन पानी था, चूत के दाने से लेकर उसकी गांड तक जीभ से चाटने लगा।
एक बात थी मधु की चूत में बहुतों की तरह महक नहीं थी।

अब उसके चुदने की बारी आ गई थी, हमने अपनी अवस्था बदली, मैंने उसे सीधा लेटा कर कमर के नीचे तकिया रखा, कंडोम लगा कर पैर फ़ैलाने को कहा।
तुरंत ही मैं उसके ऊपर आ गया, लंड के सुपारे को चूत से सटा कर पूछा- मधु, झटके से या आराम से?
उसने मादक नज़रों से देखते हुए जवाब दिया- आराम से, हौले हौले!

फिर मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर डालना शुरू किया, मधु की चूत टाइट थी, मस्त अहसास था, उसकी चूत का एक एक इन्च मैं महसूस कर रहा था।
मधु बहुत उत्तेजित थी, उसने अपनी उसने अपनी आँखें बंद कर ली, उलटे हाथ से मेरी कलाई को जकड़ लिया और सीधे हाथ से तकिये को कस लिया।

उसकी चूत बहुत गीली और गर्म थी, मेरे हल्के जोर से लंड पूरा चूत में समां गया, उसके मुँह से मादक आवाजें आ रही थीं- उउइ.. आआआहह.. आआह्ह्ह..
मैं उसे धीरे धीरे चोदने लगा, वो मजे से कराहने लगी- उउउईए.. माँ.. ह्ह्ह्ह्म्म्म्म आआह्ह्ह!

मैंने थोड़ा ज़ोर लगाना शुरु कर दिया और उसके चूचुकों को चूसने लगा।
मधु ने मुझे अपनी ओर खींच कर बाहों में कस लिया, हर धक्के के साथ उसकी पकड़ और मजबूत होती गई, मेरी पीठ पर उसके नाख़ून गड़ने लगे।
मेरी जांघ के उसकी जांघ से टकराने से ‘चट चट..’ की आवाज़ें आने लगी।

मधु सेक्सी आवाज़ में कहने लगी- मुझे चोदो जान, आहाह्ह आआअह्ह… अपनी मधु को चोदो आआअह्ह!
मधु अब अकड़ने लगी, मैंने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ा ली।
कुछ ही सेकंड में वो झड़ गई, मेरे लंड के अंदर बाहर होने से चूत का पानी बाहर आने लगा, मैंने कहा- तेरी चूत को पाने के लिए ही महीनों से तेरे पीछे लगा था, आज मुराद पूरी हुई!
तो उसने कहा- तो कर लो मुराद पूरी, खूब चोदो, खा जाओ मुझे!

मैंने तेजी से चोदना शुरु कर दिया, उसकी चूत दोबारा पानी झड़ने से बहुत गीली हो चुकी थी।
फिर मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से लंड को उसकी गीली चूत में लगा कर जोर से धक्का मारा.. पूरा लंड मधु की चूत में उतर गया। उसकी दोनों बाहों को पकड़ कर जोर जोर से धक्का लगाना शुरु कर दिया।

वो अब पूरे मज़े लेने लगी थी- आआ ऊओह्ह्ह… चोदो और जोर से चोदो मुझे.. फाड़ दो मेरी चूत.. आआअह्हह, मेरी जान खूब चोदो, आज अपना बना लो… आआअह्हह!
मधु अपनी जोरदार चुदाई का भरपूर मज़ा उठा रही थी, वो एक बार फिर झड़ गई.. पर मैं अभी बाकी था और मैंने अपने धक्कों की बारिश को बनाए रखा, मैं लगातार शॉट्स मार रहा था.. उसकी चूत में उसका पानी भरा हुआ था और जब जब लंड अन्दर जा रहा था.. तो अन्दर से ‘पुच– पुच’ की आवाजें आने लगी थीं।

फिर कुछ मिनट बाद.. मेरा भी होने वाला था.. मैंने कंडोम लगाया था इसलिए पूरा पानी गिरने तक लंड को चूत के अंदर ही रहने दिया और फिर हम दोनों निढाल हो गए।
हमने दूसरे को कुछ देर किस किया फिर वो कपड़े पहन कर जाने को तैयार हुई।
मैंने फिर मिलने का वादा लिया और चौक तक छोड़ आया।

उसके नौकरी छोड़ के जाने से पहले, मैंने उसे 8-10 बार और चोदा होगा।
दोस्तो, आपके ईमेल का इन्तजार है।
am.durgbhilai@gmail.com

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