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Chut Jwan Jab hoti hai-8

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Added : 2016-02-03 23:57:26
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उसकी चूत का आकार भी बहुत छोटा सा था, देखने में बहुत मासूम भोली सी चूत, किसी अवयस्क बच्ची की तरह. कचौरी जैसी फूली हुई उसकी चूत बहुत ही मोहक लग रही थी, चूत के उपरी भगोष्ठ आपस में चिपके हुए थे और उसकी दरार एक पतली रेखा की तरह थी जैसे किसी ने ब्लेड से चीरा लगा दिया हो!
उसकी चूत से रस के स्राव के कारण पूरा तिकोना भीगा भीगा सा था।

मैं उस पर झुक गया और उसके भगोष्ठ चाटने लगा, उसके रस का हल्का नमकीन स्वाद भा गया मुझे! यह स्वाद आरती की चूत के स्वाद से भिन्न था और बेहतर भी!
कुछ देर चूत ऊपर से चाटने का आनन्द लेने के बाद मैंने उसकी चूत धीरे से अपने दोनों हाथों से खोल दी।
चूत के भीतर जैसे तरबूज के जैसा लाल रसीला गूदा भरा हुआ था जिसे मैं बरबस ही चाटने लगा।

वत्सला अब बिस्तर पर अपनी एड़ियाँ रगड़ रही थी और बार बार अपनी कमर उचका कर अपनी चूत मेरे मुंह में ठेल दे रही थी।
‘अंकल जी… करो न अब!’ वत्सला इतनी देर के फोरप्ले के बाद मुझसे बोली।
‘कर तो रहा हूँ वत्सला… चाट रहा हूँ न… बस अभी तुम्हें पूरा मज़ा मिल जायेगा।’ मैंने कहा।
मेरा जवाब सुनकर उसने अपनी चूत जोर से मेरे मुंह पर दे मारी जैसे उसे मेरा जवाब पसन्द न आया हो।

आरती ने मुझे कहा था कि यह वत्सला सेक्सी बिल्ली है इसलिये मैं उसे पूरा कामोत्तेजित करके इस मुकाम तक लाना चाहता था कि वो अपना नारी सुलभ शील, संकोच, लज्जा, शर्म, हया सब तज कर एक चुदासी नवयौवना की तरह लण्ड लेने के लिए मचल जाये।

यही सोचकर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के सबसे संवेदनशील जगह उस नन्ही सी कलिका पर रख दी जिसे भगांकुर कहते हैं।
ऐसा करते ही मानो उसके बदन में भूचाल आ गया…
‘अंकल जी… अब आ भी जाओ… मेरे हो जाओ… आह आः हः… पूरे समा जाओ मुझमें!’ वत्सला बड़े कामुक स्वर में बोली।
‘हां…बेबी, मेरी जीभ समाई हुई है न… बस अभी तू झड़ जायेगी।’ मैंने कहा और उसका लहसुन अपने होठों से दबा के चूसने लगा।

‘ओ नो… ऐसे नहीं… फक मी नाऊ…’ वो बोली और मेरे सिर के बाल खींचने लगी।
‘या बेबी… एम फकिंग यू ना…’ मैंने शरारत से कहा।
फिर वो एकदम से उठ कर बैठ गई और मुझसे लिपट कर मेरा लण्ड पकड़ लिया- I urgently need this tool inside me…अंकल जी अब जल्दी से इसे मेरी में घुसा दो!
वो सिसकार के बोली।

‘वत्सला यह बहुत बड़ा है तुम्हारे हिसाब से… अभी तुम झेल नहीं सकोगी इसे… you are too young for that!’ मैंने उसे समझाते हुए कहा।
‘उफ्फ्फ… thats none of your business, uncle… I can and will handle yours… you just fuck me right now pls… I beg your cock inside my cunt!’ वो थोड़ा झुंझला कर लगभग दांत पीसती हुई सी बोली।
‘बेबी, फट जायेगी तुम्हारी चूत… अभी भी समय है, एक बार फिर से सोच लो।’ मैंने उसे और सताया।
‘अरे तो फट जाने दो ना… आपको उससे क्या, मैं जब खुद कह रही हूँ तो?’ इस बार वो रोने के से अंदाज़ में बोली।

‘अच्छा ठीक है… मुझे क्या, लो लण्ड को मुंह में ले के अच्छे से गीला करो इसे चूस चूस के!’ मैंने कहा।
तो वत्सला ने झट से लण्ड मुंह में भर लिया और पूरी तन्मयता के साथ जल्दी जल्दी चूसते हुए लण्ड को अपनी लार से गीला करने लगी, फिर जल्दी से बाहर निकाल दिया- लो अंकल जी… अब फुर्ती से आ जाओ मुझमें!
उसने कहा और प्यासी निगाहों से मुझे आमंत्रित किया।

फिर मैंने उसके घुटने ऊपर की तरफ मोड़ दिए और एक तकिया उसकी कमर के नीचे रख दिया, अब उसकी चूत पूरी खिल कर मेरे सामने थी।
‘अपनी चूत खोलो वत्सला!’ मैंने कहा।
उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत के ऊपर रखे और फिर अँगुलियों से अपनी चूत के भगोष्ठ खोल दिए। ऐसा करने के साथ ही उसका चेहरा लाज से लाल पड़ गया और उसने अपनी आँखें मूँद कर मुंह दूसरी तरफ कर लिया।

मैंने झुक कर उसकी खुली हुई चूत के भीतर चाटा और अच्छे से गीला कर दिया और फिर अपना सुपारा उसके छेद में दबा कर फंसा दिया और धक्का देने की पोजीशन में बैठ गया।

मित्रो, जब कोई लड़की अपनी चूत अपने हाथों से खोल कर इस तरह से लेटकर चोदने का न्यौता देती है तब यह उसके समर्पण की पराकाष्ठा होती है, अपनी लाज शर्म त्याग कर ही वो ऐसा कर पाती है…. किसी कामलोलुप नारी के निर्लज्ज होने की सीमा है ये, इसके आगे कोई लड़की और कर भी क्या सकती है?

‘वत्सला, you ready?’ मैंने पूछा।
‘हाँ अंकल जी!’ वो बोली।
मैंने आरती की तरफ देखा, वो मुस्कुरा रही थी।
फिर उसने मुझे इशारा किया कि एक बार में ही…

वत्सला अभी भी आरती की गोद में सिर रख कर लेटी थी और अपनी टाँगें ऊपर उठाये हुए अपने हाथों से अपनी चूत के पट पूरी तरह खोले हुए मेरे लण्ड के इंतजार में थी।

‘hold it Vatsala… here I come!’ मैंने कहा।
और लण्ड को पूरी ताकत से उसकी चूत में भोंक दिया, मेरा सुपाड़ा उसकी चूत के कसाव को ढीला करता हुआ गहराई तक धंस गया और मेरी झांटें उसकी चूत से जा टकराईं।

‘आह.. ऊई मम्मी… हाय राम.. क्या करूं… भाभी… लगता है चीर दी मेरी अंकल जी ने!’ वो तड़प कर बोली और मुझे अपने पैरों से दूर धकेलने लगी।
लेकिन मैंने उसकी दोनों टाँगें कस कर पकड़ के आरती को पकड़ा दीं। आरती ने भी उसके दोनों पैर पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिए जिससे उसकी चूत अच्छे से मेरे लण्ड के निशाने पर आ गई।
मैंने अपने लण्ड को जरा सा पीछे लिया और फिर से एक पॉवरफुल शॉट दे मारा, इस बार रही सही कसर भी पूरी हो गई और मेरा लण्ड उसकी चूत में जाम हो गया।

‘अंकल जी छोड़ दो मुझे… निकाल लो अपना… मुझे माफ़ करो. मैं नहीं सह पाऊँगी।’ वत्सला दर्द से बिलखते हुए बोली।
‘I warned you baby to keep your cunt off my cock… didn’t I? समझाया था न तुझे?’ मैंने उसे याद दिलाया।
‘हाँ, मेरी गलती, पर अब क्या करूं… आपका ये सहन ही नहीं कर पा रही मैं… बहुत हिम्मत जुटा रहीं हूँ फिर भी… अआः भाभी आप ही बचा लो मुझे!’ उसने आरती की तरफ देख के मदद मांगी।

‘अरे कुछ ना होयेगा तेरे को.. चुपचाप पड़ी रह! अभी देखना कैसे उछल उछल के चुदेगी! तेरी तो खुली खुलाई चूत है! मेरी सील बंद कच्ची चूत जिसमें कभी हवा भी नहीं घुसी थी, वो भी तो इसी लण्ड से फटी थी… सोच मेरा क्या हाल हुआ होगा।’ आरती ने उसे थोड़ा डांटते हुए कहा।

मित्रो, उस सेक्स की गोली का असर अब मुझ पर भरपूर था और मेरा लण्ड बांस के लट्ठ की तरह वत्सला की चूत में गड़ा हुआ था जिसके झड़ने की अभी दूर दूर तक सम्भावना नहीं थी।
मुझे वत्सला को हो रहे दर्द की भी फ़िक्र थी इसलिये मैंने अपने लण्ड को एक झटके में बाहर खींच लिया।

जैसे ही उसकी चूत से वेक्यूम रिलीज हुआ तो ‘पक्क’ जैसी आवाज वत्सला की चूत से निकल गई जैसे कोल्ड ड्रिंक का ढक्कन ओपन करने से आती है।
फिर वो तुरंत अपनी टांगों को सिकोड़ कर औंधी लेट गई एवं गहरी गहरी साँसें भरने लगी और उसके मुंह से राहत भरी कराहें आने लगीं जैसे लण्ड बाहर निकल जाने से उसे भारी राहत मिल गई हो।

मैं अब उसके ऊपर लेट गया और यहाँ वहाँ चूमते हुए दुलारने पुचकारने लगा।
आखिर अभी बेचारी की उमर ही क्या थी! वो ठीक है कि अपनी चूत की सनसनी से परेशान होकर उसमें ऊँगली या पेन पेन्सिल घुसेड़ कर अथवा आरती के साथ लेस्बियन सम्बन्ध बना कर तृप्त हो लेती थी परन्तु वो ऐसी कोई खेली खाई लड़की भी नहीं थी जो पहले से चुदाई करवाती रही हो।

लड़की जब खुद अपनी मर्जी से अपनी चूत में कोई चीज घुसाती है और मूव करती है तो उस पर उसका खुद का कंट्रोल होता है… कितना घुसाना है, किस पॉइंट पर कितना प्रेस करना है, किस एंगल से मूव करना है… ये सब वो अपने हिसाब से मैनेज कर लेती है। लेकिन जब कोई आदमी लण्ड उसकी चूत में पेलता है तो लड़की को सिर्फ अनुभव करना होता है लण्ड के मूवमेंट पर उसका कोई बस नहीं रहता… चोदने वाला जैसे चाहे अपने लण्ड को ड्राइव करे, यह कमान उसी के हाथ रहती है।

मैंने तीन चार मिनट वत्सला को आराम दिया, उस दौरान मैं उसके नितम्ब चूमता रहा, उन्हें काटता रहा, उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी गर्दन पर चुम्बन करता रहा और नीचे हाथ डाल कर उसके मम्मे मुट्ठी में भर के जोर जोर से दबाता मसलता रहा।

अब वो धीरे धीरे आहें कराहें भरने लगी थी और बार बार अपने नितम्ब ऊपर की तरफ उठा लेती। मैंने अपना लण्ड उसकी जांघों के बीच फंसा दिया और धीरे धीरे उसे भीतर बाहर करने लगा।
वत्सला को शायद ये अच्छा लगा और उसने अपनी टाँगें और चौड़ी कर लीं जिससे मुझे और थोड़ा ज्यादा रूम मिल गया, अब मेरा लण्ड उसकी चूत पर घिस रहा था।

‘बड़े पापा, अब पीछे से ही डाल दो इसकी चूत में… ले जायेगी अब ये!’ आरती मुझसे बोली।
कहानी जारी है!
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