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Neha ki pehli chudai

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Added : 2015-09-17 07:28:06
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My name is shaqib i am from jaipur jo ladki mujhse sex karna chahe mail me on simranpasha786@gmail.com ye kahani h meri aur neha ki jo ki mere makan malik ki beti h mene kiraye par dusri manzil par kamra liya tha neha ikoti aulad thi aur sirf uske papa the
यह कहानी बिल्कुल सत्य घटनाओं पर आधारित है। मैं इस कहानी को कुछ संक्षेप में लिख रहा हूँ।
यह बात सन 2013 की है मेरे मकान मालिक की बेटी 20 साल की है, और उसका नाम नेहा है। नेहा का फ़िगर 34-28-36 के लगभग है, और उसका कद 5fit है। उसका भरा हुआ बदन देख कर मेरे लण्ड में आग सी लग जाती है, वो बिल्कुल चिकनी चमेली जैसी है।
मकान मालिक का अपना खुद का बिजनेस है और वो अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि समय नहीं दे पाता है। वो कुछ अधेड़ उम्र का लगता है जैसे कि वो बिल्कुल ही झड़ गया हो।
मुझको सवेरे-सवेरे जाना पड़ता था और शाम को ही आता था। इसलिए मैं उन लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं हो पाती थी, कभी कभी बस ‘हाय-हैलो’ ही हो जाती थी।
नेहा हमेशा मुझसे बातचीत करने के बहाने खोजती रहती थी, क्योंकि मैं भी कुछ कम नहीं दिखता हूँ। मेरा कद 5f6i शरीर भी काफ़ी अच्छा है, एक दिन मैं घर पर जल्दी आ गया था और शायद नेहा उस दिन कालेज नहीं गई थी। नेहा ने मुझको चाय पर बुलाया।
उस दिन नेहा ने एक पतली सी नाईटी पहन रखी थी, जिसके अन्दर नेहा ने एक लाल रंग की ब्रा और पैन्टी पहन रखी थी, जिसमें वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी। नेहा को इस तरह के कपड़े में देख कर मेरा लण्ड अपने आकार में आने लगा था।
शायद नेहा ने इस बात को भांप लिया था। वो मुस्कराते हुए चाय बनाने चली गई। कुछ देर में नेहा ने चाय के साथ कुछ नमकीन भी लेकर आई। मेरी नज़र नेहा के उभारों से हट ही नहीं रही थी। नेहा मेरी इस हरकत को देख कर मन्द-मन्द मुस्करा रही थी।
फ़िर हम दोनों में बातचीत शुरु
Neha - aap ki study kaisi chal rahi h
Me fist class aur aap ki
Neha meri b study sahi chal rahi h
Íske baad hum dono batein karte rahe par main to uske boobs par se nazar hi nhi hata pa raha tha aur wo muskra deti aur phir achanak
नेहा ने पूछा- आपकी कोई गर्लफ़्रेन्ड नहीं है क्या?
तो मैंने कहा- इतना समय नहीं है कि कोई गर्लफ़्रेन्ड बनाई जाए। तुम बताओ, तुम्हारा कोई बॉयफ़्रेन्ड है या नहीं?
नेहा ने कहा- मैं भी बस आपकी तरह ही हूँ, मैं बॉयफ़्रेन्ड बनाने पर विश्वास नहीं करती हूँ।
फ़िर मैंने थोडी सी हिम्मत कर के कहा- क्यों न हम दोनों ही एक दूसरे का ही ख्याल रखा करें !
तो नेहा राजी हो गई।
मैंने कहा- नेहा, तुम बहुत ही सुन्दर हो और मैं बस तुम्हारी ही वजह से इस घर में रह रहा हूँ। इतने दिनों से मैं अपने दिल की बात बस अपने दिल में ही रख कर ही घूम रहा था कि कभी न कभी तो मैं अपने दिल की बात तुमसे जरूर कहूँगा।
नेहा मेरी इस बात को सुन कर खुश हो गई और कहा- अब पापा के आने का समय हो गया है। तुम अब जाओ हम कल बात करते हैं।
मैंने अपनी चाय खत्म की और नेहा को थैंक्स बोल कर अपने कमरे में आ गया।
अगली सुबह पांच बजे ही नेहा ने मेरे दरवाजे की घन्टी बजाई और मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि नेहा खड़ी है। वो मुझको देख कर हँसने लगी और गुड मॉर्निंग बोल कर छत पर चली गई। मुझको कुछ समझ में नहीं आया कि वो हँसने क्यों लगी थी? फ़िर मैंने देखा तो मेरा लन्ड तम्बू ताने हुए खड़ा था।
फ़िर नेहा जब नीचे जाने लगी, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने कमरे मे खींच लिया और नेहा से लिपट गया और उसके दोनों स्तनों को पकड़ कर दबाने लगा।
नेहा ने कहा- अभी मुझको छोड़ो, मैं आज तुमको फोन करूँगी तो तुम आ जाना।
मैं नेहा के फ़ोन का इन्तजार करने लगा।
फ़िर कुछ देर के बाद नेहा का फ़ोन आया, “आज मैं घर में अकेली हूँ, तुम जल्दी से आ जाओ क्योंकि पापा आज शादी में जाने वाले हैं।”
मैंने छुट्टी ली और घर निकाल आया। घर आते ही मैं सीधे नेहा से मिला।
नेहा ने कहा- पहले तुम फ़्रेश हो जाओ, तब तक मैं तुम्हारे कमरे में आती हूँ।
फ़िर नेहा ने अपने घर के मेन गेट में लॉक लगा कर अन्दर वाले गेट से मेरे कमरे मे आ गई। मैं जिस कमरे में रहता हूँ। उसमें एक और गेट था, जो नेहा के घर के अन्दर ही खुलता था। फ़िर हम दोनों ने कुछ देर बातचीत की और हम दोनों ही एक-दूसरे के करीब आकर बैठ गए।
मैंने धीरे से नेहा का हाथ पकड़ लिया और उसको दबाने लगा, तो नेहा को कुछ-कुछ होने लगा। नेहा उस दिन साड़ी पहन कर मेरे पास आई थी। नेहा बहुत ही कम साड़ी पहनती थी।
मैंने नेहा को अपनी बाहों में भर के उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और हम दोनों कम से कम 10-15 मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे।
इसी बीच मेरे हाथ नेहा के स्तन और उसके चूतड़ों पर चले गए। अब मैं नेहा के कान को चूमने लगा, जिससे नेहा बहुत ही गर्म होने लगी थी। मैंने देर ना करते हुए उसकी साड़ी निकाल दी।
नेहा मना कर रही थी, पर प्यार से। लेकिन अब मैं कहाँ मानने वाला था। फ़िर जैसे ही मैंने अपना हाथ नेहा के ब्लाउज में डाला तो नेहा ने शर्म के कारण अपने हाथ अपने चेहरे पर रख लिए।
फ़िर मैंने नेहा के दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर उसका दूध पीने लगा, तो नेहा उत्तेजित होने लगी और उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया।
फ़िर मैंने नेहा के कान को चुभलाने लगा क्योंकि यदि किसी लड़की को अपने वश में करना हो तो उसके कानों को चूमना जरुर चाहिये। नेहा तड़प उठी थी और मैंने धीरे से उसके ब्लाउज को भी निकाल दिया।
अब वो लाल रंग की ब्रा में बहुत ही कयामत ढा रही थी। ऐसा लगा की अभी मेरा लन्ड पैन्ट को फ़ाड़ कर बाहर आ जाएगा।
अब मैंने देर ना करते हुए नेहा से कहा कि अब वो भी मेरे कपड़े निकाल दे, क्योंकि यदि चुदाई का असली मज़ा लेना हो तो दोनों को एक-दूसरे का साथ जरूर देना चहिए। इससे दोनों के बीच प्यार बढ़ता है।
अब मैंने नेहा की चूत पर जब अपना एक हाथ लगाया, तो नेहा के मुँह से 'सीईईईई' की आवाज निकाल गई।
नेहा बहुत ही प्यासी लड़की थी और आज तक वो कभी किसी से चुदी भी नहीं थी। नेहा का यह पहला चुदाई अनुभव था। अब, मैंने नेहा के बदन पर से सारे कपड़े निकाल कर फेंक दिये।
नेहा बिना कपड़ों के मेरे सामने थी। नेहा के चूचे बहुत ही मस्त लग रहे थे। उसकी चूत से एक अजीब सी महक आ रही थी, जो मुझको एकदम मदहोश कर रही थी। अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। मैं उसकी चूत का रसपान करने लग गया और वो मेरा लण्ड का।
जब मैं उसकी चूत का रसपान कर रहा था, वो दो बार झड़ चुकी थी।
नेहा को अभी तक शान्ति नहीं मिली थी। मेरा लण्ड तो अभी भी शेषनाग की तरह फ़न फैलाए बैठा हुआ था। हम दोनों एक-दूसरे से एकदम लिपट कर चूमा-चाटी करने लगे। चुम्मी करते हुए मैं अपने एक हाथ से नेहा की चूत को भी सहलाता रहा था।
फ़िर नेहा को मैंने अपने लण्ड चूसने को कहा, तो पहले ना-नुकर करने के बाद वो मान गई। अब हम दोनों एक-दूसरे का पानी निकालने लगे। अब हम दोनों को देर करना बर्दास्त नहीं हो रहा था।
मैं एक क्रीम की डिब्बी ले आया और उसमें से खूब सारी क्रीम निकाल कर नेहा की चूत पर लगा दी ताकि नेहा को कुछ कम दर्द हो। और नेहा मेरा लन्ड आसानी से अपने अन्दर ले सके।
फ़िर मैंने अपने लन्ड का सुपाड़ा नेहा की चूत पर लगाया और एक जोर का धक्का लगाया। तो नेहा इतनी जोर से चिल्लाई कि जैसे किसी ने गर्म लोहे की सलाख उसके चूत में डाल दी हो।
अब मैं कुछ देर के लिये रुक गया ताकि नेहा को कुछ आराम मिल सके। जब नेहा का दर्द कुछ कम हुआ, तो नेहा ने कहा- अब शुरू करो।
तो मैं धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा और उसके रस भरे संतरे भी दबाते रहा। इसी बीच नेहा दो-तीन बार झड़ गई।
कुछ देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने नेहा से कहा- नेहा, अब मैं भी झड़ने वाला हूँ।
तो नेहा ने कहा- मेरे अन्दर ही झड़ना।
फ़िर मैंने अपना ढेर सारा माल नेहा की चूत में भर दिया और नेहा के ऊपर ही कुछ देर तक पड़ा रहा। फ़िर कुछ देर के बाद हम दोनों एक साथ नहाए।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे आपके जबाब का इन्तजार रहेगा।

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