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Chhappan Ki Umar aur Phone Sex

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Added : 2015-09-29 11:29:32
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दोस्तो, बाहर बारिश हो रही है और अकेले बैठे बैठे एक आइडिया आया, तो एक कहानी के रूप में आपके सामने पेश है, मज़ा लीजिये।

मेरा नाम आशा है, मेरी उम्र इस वक़्त 56 साल है और मैं अपने बेटे और बहू के साथ मुंबई में रहती हूँ। पति गुज़र चुके हैं, बेटा बहू दोनों जॉब करते हैं। अभी तक दोनों ने अपना अपना करियर बनाने के चक्कर में कोई बच्चा पैदा नहीं किया है तो उनके जाने के बाद मैं घर में अकेली होती हूँ।

हम बिल्डिंग के पांचवे माले पर रहते हैं। सुबह साढ़े आठ बजे तक बेटा और बहू के चले जाने के बाद शाम के 6 बजे तक मैं अपने फ्लैट में अकेली ही होती हूँ।
प्रोब्लम ये है कि आस पास के सभी फ्लैट्स में भी ज़्यादातर नौकरी पेशा लोग रहते हैं, तो बिल्डिंग में मुश्किल से 5-10 लोग ही होते हैं। बाहर कहीं मैं जाती नहीं थी, तो करती क्या, सारा दिन बैठे टीवी देखते रहो या फिर मैं घर के ही छोटे मोटे काम करती रहती, सारा दिन घर को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखती, कोशिश करती कि सारा दिन अपने आप को किसी काम में व्यस्त रखूँ।

एक दिन बहुत बारिश हो रही थी, मैं अपने फ्लैट की खिड़की से बाहर पड़ रही बारिश को देख रही थी, तभी फोन की घंटी बजी।
मैंने फोन उठाया- हैलो!
मैंने कहा।
‘हैलो’ उधर से भी आवाज़ आई।
‘जी किस से बात करनी है आपको?’ मैंने पूछा।

पहले तो उधर से किसी के हल्के से हंसने की आवाज़ आई, फिर उधर से वो बोला- जी आपसे ही बात करनी है।
मैंने कहा- मुझसे, क्या आप मुझे जानते हैं?
वो बोला- जी नहीं, मगर जानना चाहता हूँ।
फिर दबी दबी हंसी की आवाज़ आई।

मुझे लगा कोई मनचला खामख्वाह मुझे परेशान कर रहा है, मैंने थोड़ा कड़क कर पूछा- देखिये अगर आपने कोई बात करनी है तो बोलिए, वरना फोन काटिए।
‘अरे बात ही तो करनी है यार, मगर आप इतना गुस्सा मत करो!’ वो थोड़ा अटक कर बोला।
‘जी कहिए!’ मैंने फिर पूछा।
‘देखिये मिस, बात ऐसी है कि मैं नहीं जानता कि आप कौन हो, मेरा नाम वरुण है और मैं मुंबई में रहता हूँ, बाहर बारिश हो रही है, बाहर कहीं जा नहीं सकता तो ऐसे ही घर में बैठा बैठा बोर हो रहा था, सोचा किसी से बात की जाए, तो फोन पर बिना सोचे नंबर मिला दिया और वो आपका मिल गया।’ उसने एक ही सांस में सब बता दिया।

‘तो अगर घर में बैठे बोर हो रहे हो तो किसी को भी परेशान करोगे?’ मैंने पूछा।
वो बोला- देखिये, मेरा आपको परेशान करने का इरादा बिल्कुल नहीं है, मैं सिर्फ टाईम पास करना चाहता हूँ और अगर आप भी फ्री हैं तो हम बात कर सकते हैं।मैंने पूछा- तो आपको लगता है कि अगर आप फ्री हैं तो सारी दुनिया फ्री है आपसे बात करने के लिए?
वो बोला- देखिये, मैं आपको मजबूर नहीं कर रहा हूँ, पर अगर आप फ्री हैं तो क्या हम बात कर सकते हैं?
फ्री तो मैं भी थी और जब उसने हर बात मुझे साफ साफ बता दी तो मुझे भी लगा कि बंदा ठीक है, मैंने कहा- ठीक है, अभी थोड़ी देर के लिए मैं फ्री हूँ, कहिए क्या कहना चाहते हैं आप?
वो बोला- थैंक्स, मेरा नाम वरुण है, 24 साल का हूँ, पढ़ता हूँ, हैण्ड्सम हूँ, 6 फीट हाइट है, जिम जाता हूँ, कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। अब आप अपने बारे में बताइये।

जब उसने कहा तो मैं तो सोच में पड़ गई कि अब इसको क्या बताऊँ। बेशक मैं उसे नहीं जानती थी, पर उससे बात करना मुझे बहुत अच्छा लगा।
मैंने उसे बताया- मेरा नाम अदिति है, और मैं 56 साल की हूँ, पति का 3 साल पहले देहांत हो चुका है।
उसके बाद करीब आधे घंटे हमने बहुत से बातों पर बात की, उसके बाद फोन काट दिया।

पहले तो मुझे डर लगा कि कहीं मैं कुछ गलत तो नहीं कर रही हूँ, कहीं यह मेरे पीछे ही न पड़ जाए, खामख्वाह इस उम्र में बदनामी हो जाए। किसी का क्या पता, कौन कैसा निकले।
इसी वजह से मैंने उसे अपना नाम झूठ में अदिति बता दिया ताकि कल को अगर कोई पंगा भी पड़े तो अदिति से पड़े, मुझ से नहीं।
मगर फिर मुझे लगा कि ‘नहीं यार अच्छा लड़का था, मुझे उससे बात करके अच्छा लगा।;

उसके बाद सारा दिन उसका फोन नहीं आया, अगले दिन फिर उसी वक़्त उसका फोन आया- हैलो अदिति, क्या कर रही हो?
उसने पूछा।
मैंने कहा- बोर हो रही हूँ।

‘डोंट वरी अदिति, मैं तुम्हें बोर नहीं होने दूँगा, मैं रोज़ तुम से फोन करके बातें करूंगा और तुम्हारा दिल बहलाऊँगा, मगर यह बता दो कि मैं तुम्हें कब कब फोन कर सकताहूँ ताकि तुम्हें भी कोई परेशानी न हो।
मैंने कहा- तुम सुबह 10 से लेकर 5 बजे के बीच कभी भी फोन कर सकते हो।

उसके बाद तो हम दोनों की हर रोज़ बातें होती रहती। धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानने लगे। मुझे रोज़ उसके फोन का इंतज़ार रहता।
20 दिन बाद तो हालात ये हो गए कि हम एक दूसरे से बिना बात किया बिना रह ही नहीं पाते थे।

एक दिन वो बोला- देखो आदिति, सच कहूँ, पिछले कुछ दिनों से जब से हम फोन पे बात कर रहे हैं, मुझे तुमसे लगाव बढ़ता ही जा रहा है, मुझे ऐसे लगने लगा है कि जैसे मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।
उसने कहा तो मुझे लगा के जैसे मेरे दिल की भी धड़कन बढ़ गई हो, मैं 56 साल की वो 24 साल का… क्या इस उम्र में किसी से प्यार करना संभव है? मैंने कहा- वरुण। यह क्या कह रहे हो तुम, हम दोस्त हैं।

मगर वो बोला- नहीं आदिति, आई लव यू, मैं तुम से मिलना चाहता हूँ, तुम्हें देखना चाहता हूँ प्लीज मुझसे मिलो।
अब तो मुझे हाथों पैरों की पड़ गई, जिसे मैं मज़ाक समझ रही थी वो तो सच में मुझे प्यार करने लगा। मैंने उसके मिलने की विनती बड़े प्यार से मना कर दी, मगर उससे यह कह दिया कि फोन पर वो चाहे जितनी भी बातें करना चाहे, कर सकता है, मगर मैं उससे बाहर कहीं नहीं मिल सकती और न ही उसे अपने घर बुला सकती हूँ।

‘फोन पर हम क्या बात कर सकते हैं?’ उसने पूछा।
मैंने कहा- जो तुम्हें अच्छा लगे, मैं तुमसे सब बात करूंगी।
‘अगर मैं सेक्स की बातें करूँ तो?’ उसने फिर पूछा।

मैंने कहा- जानते हो, मेरी उम्र कितनी है, 56 साल की है, मैं तुमसे कितनी बड़ी हूँ।
वो बोला- देखो अदिति, हम दोनों दोस्त हैं और अगर मैं इस उम्र में सेक्स की बात नहीं करूंगा तो किस उम्र में करूंगा, और जहाँ तक तुम्हारी उम्र का सवाल है, यह तो और भी अच्छा है, तुम एक बहुत ही तजुर्बेकार औरत हो, मुझे वो भी बता सकती हो जो मुझे नहीं पता, और जब हम दोस्त है तो दोस्तो में कैसी शर्म!

‘वो तो ठीक है मगर…’ अभी मैंने इतना ही कहा था, वो मेरी बात बीच में काट कर बोला- अगर ठीक है तो कोई दिक्कत नहीं है, और सच बताओ क्या तुम्हारा सेक्स करने को दिल नहीं करता कभी?
मैंने कहा- हाँ करता तो है।
वो बोला- अगर करता है तो क्या करती हो?
मैंने कहा- करना क्या है, अपना मन कहीं और लगा लेती हूँ।
वो बोला- तो आज से तुम्हें अपना मन कहीं और लगाने की ज़रूरत नहीं है, तुम अपना मन मुझसे लगाओ, मुझसे अपनी सेक्स की बातें करो, मैं तुमसे करूंगा।
मैंने उससे पूछा- फोन पे बातें करने से क्या होगा?
वो बोला- जब हम फोन पे सेक्स की बातें करेंगे तो मैं अपनी चड्डी में हाथ डाल कर अपना लण्ड सहलाऊंगा और तुम अपना हाथ अपनी सलवार में डाल कर अपनी चूत को सहलान!

मुझे बड़ा अजीब लगा- छीः यह क्या बकवास है?
वो बोला- ये छी छी मत करो, कर तो सकती हो न, अगर कर सकती है तो ऐसे करते हैं एक ट्राई करके देखते हैं, अभी, अगर न अच्छा लगा तो फिर कुछ और करेंगे, ठीक है?

मैंने उसे मंजूरी दे दी।

‘तो सुनो आदिति, सबसे पहले यह बताओ, तुमने पहना क्या है?’ उसने पूछा।
मैंने कहा- मैंने अभी तो मैंने सलवार कमीज़ पहन रखी है।’तो अगर मैं कहूँगा तो क्या तुम अपनी सलवार उतार सकती हो?’ उसने पूछा।
‘हाय, तुम्हें शर्म नहीं आती?’ मैंने पूछा।
वो बोला- अगर तुम सामने होती तो मैं अपने हाथ से तुम्हें नंगी करता, अब तुम बाहर नहीं मिलना चाहती तो फोन पर ही सही… चलो जल्दी करो अपनी सलवार उतारो।

पहले मैंने सोचा सच में उतारूँ या झूठ ही कह दूँ, फिर सोचा अभी कौन सा किसी ने आना है, मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और उतार कर साइड पे रख दी, और फिर उसके कहने पे अपनी कमीज़ और ब्रा भी उतार दिया।
मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि क्यों एक अंजान लड़के के कहने पर मैं खुद ब खुद अपने घर में नंगी हो कर खड़ी थी।

‘अब बेड पे लेट जाओ और अपनी दोनों टाँगें जितनी खोल सकती हो खोल लो!’ उसने कहा।
मैंने वैसा ही किया।
‘अब फोन को स्पीकर पर कर लो ताकि तुम्हारे दोनों हाथ फ्री हो जाएँ!’ उसने कहा और मैंने फोन स्पीकर पे करके बेड के सिरहाने रख दिया।

‘अब ऐसा कर, अपने दोनों हाथों से अपनी चूत के दोनों होंठ खोल और अपनी बड़ी वाली उंगली अपनी चूत के अंदर ले ले!’
मैंने भी मस्ती में कहा- हाँ, ले ली!
हमारी बातचीत जैसे जैसे बढ़ती जा रही थी, वैसे वैसे हम दोनों आपस में बेशर्म होते जा रहे थे।

‘तुम जानती हो अदिति, मैं इस वक़्त बिल्कुल नंगा बैठा हूँ और तुम्हारी एक तस्वीर दिल में बना कर उसे चोदने की तैयारी कर रहा हूँ। मेरा लण्ड इस वक़्त पूरा 6 इंच की लंबाई पर पत्थर की तरह अकड़ा हुआ है, इसकी चमड़ी पीछे हटा कर मैंने इसका गुलाबी टोपा बाहर निकाल रखा है, क्या तुम्हारी चूत भी पानी छोड़ रही है?’

सच तो यही था कि मेरी चूत गीली हो चुकी थी, मैंने कहा- हाँ, यह पूरी गीली हो चुकी है।
‘तो क्या मैं अपना लण्ड डाल दूँ तुम्हारी चूत में?’ उसने पूछा।
मुझसे न नहीं हुई, मैंने कहा- हा डालो!
वो उधर से बोला- आह, लो मैंने अपना लण्ड तुम्हारी चूत पे रख दिया, अब धीरे से अंदर डालूँगा, बस चीखना मत और अपनी चूत का दाना मसलती रहो, आह लो घुस गया, शाबाश!

वो ऐसे कह रहा था जैसे सच में मुझसे सेक्स कर रहा हो, और देखा जाए तो मेरी हालत भी ऐसी ही थी, मेरे मुख से भी ‘आह, आह’ निकल रही थी।
‘तुम्हें मज़ा आया, अदिति मेरा लण्ड लेकर?’ उसने पूछा।
‘हाँ, मुझे मज़ा आ गया, मगर मुझे उंगली से मज़ा नहीं आ रहा, मुझे कुछ बड़ी चीज़ चाहिए, ठहरो मैं कीचन में देख कर आती हूँ।’
मैं उठ कर कीचन में गई और वहाँ से एक लंबा सा घिया उठा लाई, जो मैं सब्जी बनाने के लिए लाई थी।
वापिस बेडरूम में आकर मैंने वरुण को बताया- मैं कीचन से एक घिया ले कर आई हूँ, इसे अंदर लूँगी।

वरुण बोला- नहीं जानेमन, कहो इस घिया को मैं अपनी चूत में ले रही हूँ।
मुझे शर्म तो आई मगर मैंने फिर भी कहा- ये घिया अब मैं अपनी चूत में ले रही हूँ, बस?’ कह कर मैं हंस दी।
वो बोला- अदिति क्या तुम अपना बूब अपने मुख में लेकर चूस सकती हो?’
मैंने कहा- हाँ, मेरे बूब्स बड़े हैं।
‘तो ले न यार, अपना बूब का निप्पल अपने मुँह में ले और चूस, मैं महसूस करना चाहता हूँ, जैसे मैं तुम्हारे बूब्स को चूस रहा हूँ।’

मैंने अपना बूब अपने हाथ में पकड़ा और अपने मुँह में निप्पल ले कर चूसा।
‘हाँ, मैं चूस रही हूँ’ मैंने उसे कहा।

‘घिया कितना ले लिया चूत में?’ उसने पूछा।
‘जितना ले सकती थी, करीब आधा अंदर जा चुका है।’ मैंने उसे बताया।
‘क्या आगे पीछे कर रही हो?’ उसने पूछा।
‘हाँ, कर रही हूँ!’ मैंने बताया।
‘और उंगली से अपनी चूत का दाना भी मसल रही हो?’
‘हाँ मसल रही हूँ!’ मैंने कहा।
‘मज़ा आ रहा है क्या?’ उसने फिर पूछा।
मैंने कहा- हाँ बहुत मज़ा आ रहा है!

और सच भी यही था। बहुत सालों से मैं अपनी जिस इच्छा को अपने मन में दबाये बैठी थी, वो इच्छा आज खुल कर बाहर आई थी।

वो बोला- कहो, मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदो वरुण!
मैं उसकी बात मान कर बोली- मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदो, वरुण, मैं मरी जा रही हूँ, तुमने मेरे तन बदन में वो आग लगा दी है जिसे मैं बरसों से अपने अंदर दबा कर बैठी थी, आज मुझे तुमने फिर से जवान कर दिया है!
और मैं न जाने क्या क्या बोलती रही।

उधर से वो बोला- अदिति, मैं भी तुम्हारे नाम से मुट्ठ मार रहा हूँ, मैं सोच रहा हूँ कि तुम्हारा नंगा बदन मेरे सामने पड़ा है और मेरा लण्ड तुम्हारी चूत में घुसा है, तुम्हारी चूत पानी से भीगी पड़ी है और फ़्च फ़्च की आवाज़ आ रही है, तुम्हारे ढीले बूब्स आगे पीछे हिल रहे हैं, अब मैं तुम्हारे होंठ चूसूँगा।

जब उसने कहा तो मैं तो जैसे पागल सी हो गई।
मैंने ज़ोर ज़ोर से घिया को अपनी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया मगर मैं ज़्यादा देर ऐसे नहीं कर सकी और बस मैं झड़ गई। मेरी चूत से पानी के फव्वारे छूट गए।
‘हाय, मैं मर गई वरुण, तुमने तो मुझे झड़वा दिया!’ कह कर मैं तो एक तरफ को लुढ़क गई।
‘बस मेरी जान, सब्र करो मैं भी झड़ने वाला हूँ!’ आह आह करते करते वो भी झड़ गया।

फोन काल कट गई, मैं कितनी देर उसी तरह नंगी लेटी सोचती रही, क्या जो हुआ, वो सही था या नहीं!?!
alberto62lopez@yahoo.in

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