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Bhai Ne Meri Chut Chod Kar Meri Antarvasna Jaga di- Part 4

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Added : 2016-03-03 17:13:39
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हाय मैं ऋतु.. अन्तर्वासना पर मैं आपको अपनी चूत की अनेकों चुदाईयों के बारे में बताने जा रही हूँ.. आनन्द लीजिएगा।
अब तक आपने जाना..
राजू सोफे पर बैठते हुए बोले- क्या बात है.. आज मेरी जान मेरी बीवी का रूप धरे हो.. आज मेरी जान कहूँ.. बीवी कहूँ या फिर बहन बोलूँ?
मैं उनके पास बैठती हुई बोली- कुछ भी कहो.. हूँ मैं तुम्हारी.. तन-मन से.. राजू- आज से मैं तुझे अकेले में बीवी ही कहूँगा।
मैं- आपका हुकुम सर आँखों पर।
फिर हम लोगों ने खाना खाया खाते समय भी हम दोनों एक-दूसरे को खूब छेड़ रहे थे। तभी राजू भाई के फोन पर एक कॉल आया.. उनके किसी फ्रेंड का था.. जिसका आज ही देहरादून में एक्सिडेंट हो गया था.. वो बहुत ही सीरीयस था।
फिर राजू चले गए.. मैं अब घर में अकेली थी।
अब आगे..

राजू के जाने के बाद मैं अपनी चूत चुदाई की कल्पनाओं में डूब गई और मेरा हाथ मेरी चूत पर रेंगने लगा.. मुझे फिर से चुदास चढ़ने लगी, मुझे किसी भी हालत में लण्ड की खुराक की जरूरत होने लगी।

तभी मेरे फोन पर माँ का कॉल आया कि तेरी नानी की तबियत ज्यादा खराब हो रही है.. मुझे अभी कुछ दिन और लगेंगे.. तू अपना ख़याल रखना.. राजू का फोन आया था कि आज तू घर में अकेली है.. तू सुधा को बुला ले न..
मैं- ठीक है मम्मी.. आप ही उनको बोल दो आने को.. या मैं उनके घर चली जाऊँगी।
मम्मी- ठीक है ऋतु.. जैसा तेरे को अच्छा लगे.. तू खुद कॉल कर लेना उसको.. अब मैं फोन रखती हूँ।

मैं आप लोगों को बता दूँ.. सुधा आंटी और मेरी मम्मी बहुत अच्छी फ्रेंड थीं.. लेकिन अब थोड़ा कम हो गया है क्योंकि सुधा आंटी जिसे प्यार करती थीं.. उनसे तो मम्मी की शादी हो गई और इस बात को लेकर दोनों में काफ़ी लड़ाई भी हो गई थी। जब मेरा जन्म हुआ.. तो फिर दोनों में फ्रेंडशिप हो गई.. लेकिन वो दोस्ती ज्यादा अच्छी नहीं थी। उसके बाद ला उन्होंने मेरे से लिया मैंने सुधा आंटी को कॉल किया।

मैं- हैलो सुधा आंटी.. मैं ऋतु बोल रही हूँ!
सुधा- हाँ ऋतु.. बोल क्या बात है.. आज कैसे याद किया?
मैं- मैं आंटी में घर पर अकेली हूँ.. तो मम्मी ने कहा कि आपको बुला लेना।

आपको एक बात और बता दूँ.. सुधा आंटी चालू टाइप की एक रंडी की तरह बाहर जाती हैं। लेकिन यह बात सिर्फ़ मुझे और मेरी मम्मी को पता है… तभी वो मम्मी से डरती हैं।
सुधा आंटी का फिगर 34-30-34 का है.. अभी तक इनके कोई बच्चा भी नहीं हुआ है.. रंग भी गोरा है और हमेशा साड़ी पहनती हैं।

सुधा- ठीक है मैं अभी 2 घन्टे में आऊँगी.. जब तक तू तैयार रहना.. मार्केट चलेंगे।
मैं- ठीक है आंटी..

मैं कपड़े चेंज करके सोने चली गई। जब मेरी आँख खुली तो काफी देर हो चुकी थी और गेट की बेल बज रही थी, मैंने गेट खोला तो देखा कि सुधा आंटी थीं।
वो अन्दर आ गईं और सोफे पर बैठ गईं।

मैं- आंटी क्या लेंगी आप.. चाय या ठंडा?
सुधा- देख यार तू मुझे आंटी मत बोल अपनी मम्मी की तरह सुधा बोल.. तो मैं यहाँ तेरे साथ रहूँगी.. नहीं तो मैं चली जाऊँगी।
मैं- लेकिन आप तो मेरी से बड़ी हो.. और मेरी आंटी भी मैं आपका नाम कैसे ले सकती हूँ?

सुधा- अब तू मेरी फ्रेंड भी है.. अपनी मम्मी की तरह से अब तू बड़ी हो गई है.. तेरी एमसी आने लगी ना.. तेरी मम्मी ने बताया था मुझे।
मैं एकदम शर्मा गई और बोला- ठीक है सुधा जी..
सुधा- सुधा जी.. नहीं सिर्फ़ सुधा बोल।
मैं- ओके बाबा।

मैंने चाय बनाई और हम दोनों ने पी और मार्केट चले गए।

एक मॉल में मैंने कहा- सुधा यहाँ से क्या खरीदना है?
सुधा- कुछ ड्रेस ले लें.. नहीं तो कुछ फैंसी टाइप की ब्रा-पैन्टी ले लेते हैं।
मैं- ओके।
सुधा- तू भी ले ले.. पैसे मैं दे दूँगी.. बाद में दे देना।

मैं भी लेने लगी, मैंने भी लहँगा साड़ी ली और मैचिंग का ब्लाउज ले लिया।
सुधा- ये क्या.. बस.. ब्रा-पैन्टी भी ले लो न..

फिर उन्होंने बड़े प्यार से मेरे लिए ट्रांसपेरेंट ब्रा-पैन्टी ली और कहा- एक बार चैक कर लूँ।
मैंने कहा- ठीक है घर कर लूँगी।
सुधा- चल अब घर चलते हैं!

तभी सुधा को कॉल आया.. मेरी मम्मी का था.. वे बोली- सुधा, ऋतु का ध्यान रखा.. वो अभी छोटी है।
सुधा- तो चिंता मत कर मैं इसका पूरा ध्यान रखूँगी.. ओके बाइ..
हम घर आ गए।

सुधा- ऋतु तू तो बहुत सुन्दर लग रही है
मैं- आप भी तो कितनी सुन्दर हो।
सुधा- तो तू मॉडलिंग कर.. मैं तुझे पैसे दूँगी।
मैं खुश हो गई.. और उनकी तरफ देखने लगी।

सुधा- मेरी एक जान-पहचान में है.. मैंने कई लड़कियों को उनसे ट्रेनिंग दिलाई है.. तू कहे.. तो तेरी भी बात करूँ।
मैं बोली- यस सुधा.. तुम मुझे मॉडल बनबा दो.. मैं तुम्हारी हर बात मानूँगी।

सुधा- लेकिन तुम्हारी मम्मी और तुम्हें ‘कम्प्रोमाइज’ भी करना पड़ सकता है.. मतलब सब कुछ.. लेकिन बाद में तुम पैसे भी ले लोगी।
मैं- मैं अपनी मम्मी को कुछ नहीं बताऊँगी और जैसा आप कहोगी.. मैं वैसा ही करूँगी.. आप उनसे बात कर लो और चलते हैं उनसे मिलने..
सुधा- ठीक है.. मेरी रानी.. मैं देखती हूँ.. अब तू तैयार हो जा अच्छे से.. तेरे जिस्म पर एक भी बाल नहीं होना चाहिए.. ना नीचे.. ना बगलों में.. और ये वाले ब्रा-पैन्टी पहनना नए वाले.. क्योंकि इसमें तेरी चूचियों का साइज़ अच्छा उभर कर आएगा।
मैं- ठीक है..

मैं तैयार होने लगी।
सुधा ने फोन लगाया और कॉल पर बोली- राकेश जी.. मैं सुधा..।
राकेश- हाँ.. बोलो मेरी जान..
सुधा- वो मेरी आपसे बात हुई थी ना.. एक लड़की है मेरी फ्रेंड्स की.. उसको मॉडलिंग करनी है.. आपसे मिलवाना था।
राकेश- आज पार्टी है.. उधर ही लेके आ जाओ।
सुधा- ठीक है दो घन्टे में आते हैं।

वो मेरे पास आई और उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी दोनों चूचियों को दबा दिया। मैं एकदम से सिहर उठी और मुँह से निकलने लगा- आउच.. मान जा सुधा.. लगती है।
वो मेरी पीछे ही थी।

सुधा- वाउ ऋतु.. तू तो पूरी जवान हो गई है.. मेरी नज़र नहीं पड़ी इस पर.. क्या दूध हैं तेरे.. क्या मस्त गाण्ड है तेरी.. कहीं राकेश बेहोश ना हो जाए।
मैं- इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ मैं सुधा.. राकेश जी मुझे सिलेक्ट कर लेंगे ना?
सुधा- ऋतु, वैसे तू सिलेक्ट तो हो जाएगी.. फिर भी यदि कुछ समझौता करना पड़े.. तो कर लेना.. समझ रही है न?
मैं- ठीक है..

मैं साड़ी पहन कर तैयार हो गई और हम दोनों राकेश जी के घर पहुँच गए।
वहाँ एक पार्टी थी.. ज्यादा लोग नहीं थे बस 10-15 लोग थे।
मैं और सुधा वहाँ पहुँचे.. लोग जा रहे थे उन सबकी नज़रें मेरे को घूर रही थीं।

मैंने सुधा से कहा- यार ये तो सब मुझे घूर रहे हैं।
तो सुधा बोली- अच्छा है.. थोड़ा सा साड़ी का पल्लू भी अपनी चूचियों से हटा ले।
मैंने वही किया।

फिर राकेश जी हमसे आकर मिले, उन्होंने पहले सुधा को गले लगाया और उनकी कमर पर हाथ फेरने लगे.. वो तो खुले आम एक हाथ से उनकी चूचियाँ भी दबा रहे थे।
सुधा- राकेश जी.. ये है मेरी फ्रेंड की लड़की.. जो कि आपसे मॉडलिंग की ट्रेनिंग लेगी।
मैंने कहा- हैलो..

सुधा- अरे भाई तुम ऐसे मॉडलिंग करोगी.. इनके गले मिलो..

मैं थोड़ा झिझकी तभी राकेश जी ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और अब वे एक हाथ से मेरी को कमर सहला रहे थे.. वहीं उनका हाथ मेरी गाण्ड दबा रहा था। कुछ ही पलों में उनका एक हाथ मेरी चूचियाँ दबा रहा था। उन्होंने मेरे कान में बोला- बहुत सुन्दर लग रही हो।
मैं उनसे अलग हुई और शर्माने लगी।

सुधा- कैसी लगी ऋतु?
राकेश- ये तो आग लगा देगी आग.. ऋतु जी आप बुरा ना माने तो मैं आपका स्क्रीन टेस्ट लेना चाहता हूँ।
मैं कुछ बोलती.. उससे पहले सुधा बोल पड़ी- राकेश जी आप कैसी बातें कर रहे हैं.. अभी तो हम आए हैं.. ऋतु तू बता?
मैं बोली- मैं क्या बताऊँ.. आप दोनों को जो अच्छा लगे।

सुधा बोली- राकेश जी.. आप स्क्रीन टेस्ट ले ही लो।
राकेश बोले- अगर आपको बुरा लगे.. तो बता देना, यहाँ पर सब ओपन होता है।
मैं- कोई बात नहीं राकेश जी.. आप जैसे कहेंगे मैं वैसा ही करूँगी।

इसी बीच राकेश ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और उसे दबा दिया.. मैं मुस्कराने लगी।
वो मेरी तरफ से ग्रीन सिंगल था।
मैं बोली- राकेश जी स्क्रीन टेस्ट कहाँ लेना है?

अब मैं समझ गई थी कि मेरी चुदाई होनी है सुधा के सामने.. तो मैं भी मज़े लेने लगी।
राकेश- ऋतु.. तुम्हें मैं जान बोल सकता हूँ या फिर कुछ और?
मैं- राकेश जी आप कुछ भी बोलिए.. मुझे मॉडलिंग करनी है.. आप जैसे चाहे स्क्रीन टेस्ट ले सकते हैं।

सुधा ने मेरे पास आकर मेरी पीठ थपथपाई और बोली- वाहह.. ऋतु तू तो बहुत आगे जाएगी..
और फिर धीरे से मेरे कान में बोली- राकेश जी को खुश कर दो।
मैंने सुधा को स्माइल दी- ठीक है।

उन्होंने राकेश जी को इशारा किया कि मैं तैयार हूँ.. फिर क्या था।
राकेश ने मेरी कमर में हाथ डाल दिया और मेरे पेट को सहलाने लगे.. मेरे गालों पर किस किया.. मेरे होंठों पर भी चूमा.. मैं भी उनका साथ देने लगी।

तभी सुधा की आवाज आई- राकेश जी.. सारा स्क्रीन टेस्ट यहीं ले लोगे क्या.. ऊपर कमरे में ले जाओ इस छमिया को.. जिस कमरे में आप सब का स्क्रीन टेस्ट लेते हो।

दोस्तो.. मेरी कहानी एकदम सच के आधार पर लिखी हुई है इसके विषय में आपके विचारों का स्वागत है।
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