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पड़ोसन की खूबसूरत चूत

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Added : 2016-04-10 11:00:10
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प्रेषक : विकास …

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम विकास है और में दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 25 है, दोस्तों मुझे शुरू से ही सेक्स करना और antarvasna.us पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता था और में बहुत सालों से इस पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों यह बात आज से तीन साल पहले की है। मेरे घर के सामने वाले घर में एक औरत कुछ समय पहले किराए पर रहने आई, वो शादीशुदा थी और उसकी एक बेटी थी और उसका पति कहीं बाहर रहकर अपनी नौकरी किया करता था। दोस्तों में जब भी अपनी बालकनी में खड़ा होता वो हमेशा मुझे देखती रहती थी। हमारा घर रोड पर है तो वहाँ पर एक दिन बहुत देर से ट्रॅफिक जाम हो रहा था और वो शाम का टाईम था तो मैंने देखा कि भी अपनी छत पर खड़ी हुई थी और मुझे पता नहीं अचानक से क्या हुआ? मैंने उसे बिना कुछ सोचे समझे छेड़ दिया और फिर उसे पता नहीं क्या हुआ उसने मुझसे बोला कि आपको क्या कुछ समस्या है? तो मैंने कहा नहीं मुझे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन शायद आपको है? अब मैंने उसे यह सब बोल तो दिया, लेकिन में कुछ देर बाद बहुत डरने लगा और वैसे उस वक़्त मेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी गांड फटी कि अब पता नहीं क्या होगा? और में सीधा उसी टाईम घर से बाहर चला गया और अब मेरी गांड बहुत फटने लगी कि ना जाने अब क्या होगा? फिर में रात को दस बजे तक अपने घर पर नहीं गया मैंने सोचा कि अगर कुछ पंगा होगा तो मेरे मोबाईल पर किसी का भी फोन आ जाएगा, लेकिन मेरे बहुत इंतजार करने के बाद भी ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

फिर उसके थोड़े दिनों बाद दिवाली से चार पांच दिन पहले मेरे घर के लेंडलाईन पर फोन आया किसी लड़के का वो कहने लगा कि क्या घर पर विकास है, में उसका दोस्त अजय बोल रहा हूँ? तो मेरे भाई ने फोन उठाया और उसने उससे बोला कि आप उसका मोबाईल नंबर ले लो वो इस समय घर पर कम ही मिलता है। फिर जब में अपने घर पर आया तो मेरे भाई ने मुझे बताया कि तेरे किसी दोस्त का फोन आया था और उसका नाम अजय है। तो मैंने कहा कि यार मेरा तो कोई भी दोस्त अजय नाम का नहीं है और फिर मैंने उससे कहा कि चल ठीक है वो जो भी होगा अपने आप मेरे नंबर पर फोन कर लेगा। फिर उसके थोड़े ही दिनों के बाद में दिवाली वाली रात को पूजा में बैठा हुआ था कि मेरे पास एक मैसेज आया कि मेरी तरफ से तुम्हारी पूरी फेमिली को और तुम्हे वेरी वेरी हैप्पी दिवाली और अब मैंने बहुत सोचा कि यह बिना जाना पहचाना नंबर किसका हो सकता है जो मुझे दिवाली की बधाईयाँ दे रहा है? और फिर हमारी मैसेज पर दो तीन दिन तक लगातार बात चलती रही और उसके बाद उसने मुझे बताया कि वो मेरी सामने वाली पड़ोसन है। दोस्तों यह बात सुनकर में बहुत खुश हुआ जैसे कि मेरी तो लाटरी ही लग गयी और फिर हमारी बात चीत फोन पर होने लगी और कई कई बार तो देर रात तक हमारी बात होती थी। एक बार हम बाहर भी मिले वो मेरे लिए चोकलेट लेकर आई और फिर एक बार हम फिल्म गये। वो फिल्म तो क्या देखनी थी, वो तो एक बहाना था। दोस्तो बस मुझे तो उसके साथ मज़े लेने थे। मैंने ना फिल्म देखी और ना उसको देखने दिया, मैंने बस उसके साथ बहुत मज़े लिए। उसके बाद हमारी ऐसे ही हर दिन फोन पर बात चलती रही क्योंकि ना तो में उसे अपने घर बुला सकता था और ना ही वो मुझे अपने घर बुला सकती थी, क्योंकि उसकी बेटी हमेशा घर पर होती थी और साथ में मकान मालिक भी। में बस ऐसे ही उससे फोन पर बात करके अपना समय गुज़ारने लगा और अब हम दोनों फोन पर बहुत देर तक बातें करने लगे थे जिसकी वजह से वो मुझे बहुत अच्छी लगने लगी और मुझे उसे पाने की और भी इच्छा करने लगी। फिर एक दिन भगवान ने मेरे मन की बात सुन ली। उसे किसी काम से दिल्ली से बाहर जयपुर जाना था क्योंकि उसकी बेटी पिछले कुछ दिनों से उसकी नानी के घर पर जयपुर थी तो उसे भी वहाँ पर जाना था और फिर मेरे दिमाग में एक बहुत अच्छा आइडिया आया। मैंने सोचा कि क्यों ना उसके जयपुर जाने से पहले इसे चोदा जाए। फिर जिस दिन उसे जाना था हमने सुबह अपना एक प्रोग्राम बनाया और वो मुझे सुबह दस बजे मिल गयी। में ईस्ट दिल्ली में रहता हूँ जहाँ पर जगह की थोड़ी समस्या थी, लेकिन मुझे एक जगह पता थी जहाँ पर रूम बहुत आसानी लिया जा सकता था। फिर हम वहाँ से फरीदाबाद को निकल गये और वहाँ पर जब में पहुंचा तो उसने मुझसे पूछा कि हम कहाँ पर जा रहे हैं? तो मैंने बोला कि यहाँ पर जगह मिलती है हम यहाँ पर अकेले कुछ देर थोड़ा आराम से बैठेंगे और कॉफी पियेंगे फिर चले जाएँगे, लेकिन दोस्तों मेरे दिमाग़ में तो आज उसे चोदने का प्लान था।

फिर अचानक से उसने बोला कि मुझे यह जगह बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही है। मैंने बोला कि ऐसा कुछ नहीं है यहाँ पर सब कुछ ठीक है। फिर वो बोली कि ठीक है और फिर में उसे रूम में अंदर लेकर गया, तो बोली कि हम यहाँ से वापस चलते हैं मुझे यह जगह ठीक नहीं लग रही है, लेकिन में तो उस रूम के पैसे देकर आ चुका था और अब मेरे अंदर आग लगने लगी थी कि मेरा सारा प्लान चोपट ना हो जाए। फिर मैंने उससे बोला कि तुम्हे कुछ नहीं होगा, क्यों तुम्हे मुझ पर विश्वास है? तो वो बोली कि हाँ है तो मैंने उससे कहा कि तो फिर चलो अंदर चल कर पहले हम कॉफी पिएँगे और फिर वापस चलेंगे। फिर वो बोली कि ठीक है और फिर में रूम में अंदर गया और जाते ही रूम को अंदर से बंद कर दिया तो वो बोलने लगी कि विकास तुम कुछ तो नहीं करोगे? तो मैंने बोला कि हाँ में कुछ नहीं करूँगा तुम्हे मुझ पर विश्वास है ना। फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और खुद भी उस पर आकर लेट गया। तो वो बोली कि नहीं विकास, तो मैंने बोला कि मुझ पर विश्वास है ना? वो बोली कि हाँ तो में बोला कि में बस तुम्हे किस करूँगा और कुछ नहीं करूँगा। अब में उसे पागलों की तरह की किस करता रहा। दोस्तों ये कहानी आप antarvasna.us पर पड़ रहे है।

फिर वो एकदम से उठकर खड़ी हो गई और मैंने उसे पीछे से पकड़ा और उसे पीछे से किस करने लगा, जिससे वो धीरे धीरे मदहोश होने लगी थी। फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और अब में उसके ऊपर लेट गया और उसे लगातार किस करता रहा और उसे स्मूच करने लगा। वो मेरी जीभ से खेलने लगी और में धीरे धीरे उसके कपड़ो के ऊपर से उसके बूब्स को दबाने लगा। फिर मैंने उसके स्वेटर को उतार दिया और फिर अपने स्वेटर को भी उतार दिया और फिर में उसके सूट की कमीज़ के पीछे से हाथ डालकर उसकी पीठ को मसलने लगा था जिसकी वजह से वो अब और भी मदहोश हो रही थी। फिर मैंने उससे अपनी कमीज़ को उतारने को कहा तो वो मुझसे कहती है कि नहीं विकास यह सब ठीक नहीं है। मैंने बोला कि क्यों तुम्हे मेरे ऊपर विश्वास है ना? वो बोली कि हाँ है तो मैंने बोला कि बस में और कुछ नहीं करूँगा और फिर में उसके जिस्म को किस करने लगा और फिर मैंने भी जल्दी से अपनी शर्ट को उतार दिया और अपने बनियान को भी और उसके ऊपर आ गया। फिर में उसकी कमर पर किस करने लगा और करते करते मैंने उसकी ब्रा का हुक अपने मुहं से खोल दिया और अब उसके बूब्स को चूमने, चूसने लगा और उसकी निप्पल को किसी बच्चे की तरह काटने लगा था और कभी अपने एक हाथ से उसकी दूसरी निप्पल को दबा रहा था जिसकी वजह से वो बिल्कुल पागल हो रही थी। वो मेरे ऊपर आ गयी और अब मेरी छाती पर किस करने लगी जो मेरी एक बहुत बड़ी कमज़ोरी है। मेरी छाती पर बाल भी बहुत सारे है और वो मेरी गर्दन पर किस करने लगी। में तो जैसे अब पागल हो रहा था। अब मैंने जल्दी से अपनी जीन्स को उतार दिया और उसके ऊपर आ गया। फिर उसकी सलवार को उतारने लगा तो वो अब मुझे ऐसा करने से रोकने लगी। फिर मैंने उससे कहा कि में बस इसके आगे कुछ नहीं करूँगा और मैंने उसकी सलवार को भी उतार दिया और अब जल्दी से उसकी पेंटी को भी और मैंने अपना अंडरवियर भी उतार दिया। अब मैंने उससे अपना लंड चूसने को कहा तो पहले तो उसने मुझसे साफ मना किया, लेकिन फिर मेरे बहुत कहने पर वो मान गई। दोस्तों वाह वो क्या लंड चूस रही थी। में तो बिल्कुल पागल हुए जा रहा था और फिर में 69 की पोज़िशन में आ गया और उसकी चूत को चाटने लगा। क्या स्मेल थी दोस्तों उसकी चूत की? मुझे तो सूंघते ही एक अजीब सा नशा सा चढ़ गया और अब में उसकी चूत को बहुत बुरी तरह से पागलों की तरह चाटने लगा और दो उंगलियाँ चूत के अंदर डालकर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करके चोदने लगा। फिर थोड़ी ही देर के बाद वो झड़ गयी।

अब ज़्यादा टाईम ना खराब करते हुए में उसके ऊपर आ गया और उसके ऊपर लेट गया और उससे पूछा कि कैसे डालूं कंडोम लगाकर या बिना कंडोम के? तो उसने बोला कि जैसे तुम्हारा मन करे डाल दो। दोस्तों में हमेशा अपने साथ कंडोम रखता हूँ और में बिना कंडोम के कभी भी कोई भी चूत नहीं चोदता। फिर मैंने जल्दी से उसे कंडोम अपने लंड पर चढ़ाने को दिया और उसने चढ़ा दिया। फिर मैंने पहले उसे बहुत आसान तरीके से उसके ऊपर लेटकर चोदा और फिर थोड़ी देर बाद के में सीधा बैठ गया और वो मेरी कमर पर अपने दोनों पैर लपेट कर मेरे ऊपर बैठ गयी और फिर मैंने उसे ऐसे थोड़ी देर तक चोदा और उसके बाद में नीचे लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गयी। फिर में उसके बूब्स को चूसने लगा और लंड को नीचे से धक्के मारने लगा। वो पागल हो रही थी और हम दोनों पूरे जोश से चुदाई कर रहे थे और पूरे रूम में उसकी चीखने चिल्लाने की आवाज़ गूँज रही थी आआअहह आईईई ऊऊऊओह औचह विकास और ज़ोर से करो, में आज बिल्कुल पागल हो रही हूँ।

फिर उसके बाद वो सीधी लेट गयी और में भी उसके साथ में लेट गया और उसका एक पैर उठाकर उसे चोदने लगा और उसके बूब्स को चूसने लगा और उसे लगातार धक्के देकर चोदता रहा। उसके कुछ देर बाद मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और अब में उसे घोड़ी बनाकर चोदने लगा। अब उसकी सिसकियों की बहुत तेज़ तेज़ आवाज़ आ रही थी आअहह ऊऊऊओह पच पच उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी क्योंकि इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी। फिर में उसके ऊपर आकर लेट गया और उसे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। करीब 15-20 मिनट उसके ऊपर लेटकर चोदने के बाद मैंने उससे पूछा कि क्यों अंदर ही कर दूं? तो वो मुझसे बोली कि आपकी मर्ज़ी और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपने लंड का पानी अंदर ही छोड़ दिया और उसके ऊपर थककर लेट गया। फिर कुछ देर बाद उठा और हमने अपने अपने कपड़े पहने और हम वहां से बाहर आ गये ।।

धन्यवाद …

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